ट्रंप से मुलाकात में ममदानी का अलग अंदाज, बोले- ‘हम सभी पत्रकारों को बुलाएंगे’, व्हाइट हाउस ने CNN, MS NOW और POLITICO पर लगाया प्रतिबंध, तो पांच बड़े टीवी नेटवर्क ने रोकी राष्ट्रपति की पूल कवरेज

बी के झा

NSK news Ind

न्यूयॉर्क/ नई दिल्ली, 22 सितंबर

अमेरिका की राजनीति में सोमवार को एक ही दिन दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क स्थित ग्रेसी मैंशन में आमने-सामने बैठे और किफायती आवास, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुरक्षा तथा आव्रजन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दूसरी तरफ व्हाइट हाउस और प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों के बीच टकराव और तेज हो गया।मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ममदानी से पूछा गया कि क्या उन्होंने ट्रंप के सामने CNN, MS NOW और POLITICO पर व्हाइट हाउस की पाबंदी का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने प्रेस की मौजूदगी को लेकर अपना रुख साफ किया।ममदानी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से कहा था कि ग्रेसी मैंशन के लॉन पर सभी प्रेस सदस्यों को मौजूद रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रेस की मौजूदगी में विश्वास करते हैं, चाहे किसी पत्रकार की राय या आलोचना उनके पक्ष में हो या उनके खिलाफ।

ममदानी का संदेश—राय अलग हो सकती है, प्रेस की जगह नहीं

ममदानी के इस बयान ने ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात को सिर्फ एक राजनीतिक बैठक से आगे मीडिया बहस से भी जोड़ दिया। खास बात यह रही कि यह बयान उसी दिन आया जब अमेरिकी मीडिया जगत में व्हाइट हाउस की प्रेस नीति को लेकर बड़ा विवाद चल रहा था। ममदानी ने किसी विशेष मीडिया संस्थान का पक्ष लेने के बजाय पत्रकारों की मौजूदगी और आलोचनात्मक कवरेज के अधिकार की बात की। उनका संदेश था कि पत्रकार की राय या आलोचना चाहे जैसी हो, प्रेस को कार्यक्रम कवर करने का अवसर मिलना चाहिए।यही वजह है कि ग्रेसी मैंशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस अमेरिकी मीडिया विवाद के बीच एक अलग दृश्य पेश करती नजर आई—एक तरफ व्हाइट हाउस में प्रवेश को लेकर विवाद और दूसरी तरफ न्यूयॉर्क के मेयर की ओर से सभी पत्रकारों के लिए खुला निमंत्रण।

ट्रंप ने CNN और दूसरे मीडिया संस्थानों पर क्या कहा?

पत्रकारों ने ट्रंप से भी CNN, MS NOW और POLITICO को व्हाइट हाउस से बाहर रखने को लेकर सवाल किया। ट्रंप ने कहा कि इन मीडिया संस्थानों ने उनके बहिष्कार की बात कही थी, हालांकि उन्होंने दावा किया कि ऐसा वास्तव में नहीं हुआ।ट्रंप ने यह भी कहा कि मीडिया की अपनी जिम्मेदारी होती है और उनके मुताबिक उन्हें प्रेस से अक्सर नकारात्मक कवरेज मिलता है। इसके बाद उन्होंने अपने चुनावी प्रदर्शन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े अपने दावों का भी उल्लेख किया।इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल सिर्फ ममदानी और ट्रंप की बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे अमेरिका में राष्ट्रपति और मीडिया के रिश्तों पर पहुंच गया।

CNN, MS NOW और POLITICO ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

व्हाइट हाउस द्वारा इन तीन मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद CNN, MS NOW और POLITICO ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया।तीनों संस्थानों का आरोप है कि उन्हें उनकी रिपोर्टिंग के कारण व्हाइट हाउस से बाहर किया गया और यह अमेरिकी संविधान के First Amendment में निहित प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने अपनी व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई का बचाव किया गया है और ट्रंप ने प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों पर गलत या ‘फेक’ खबरें प्रकाशित करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों और मीडिया संस्थानों की संवैधानिक चुनौती का अंतिम कानूनी फैसला अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।

पांच बड़े टीवी नेटवर्क ने एक साथ रोक दी पूल कवरेज

विवाद ने सोमवार को एक और बड़ा मोड़ लिया। अमेरिका के पांच प्रमुख टीवी नेटवर्क—ABC, CBS, CNN, Fox News और NBC—राष्ट्रपति की साझा टीवी पूल कवरेज व्यवस्था में शामिल हैं।व्हाइट हाउस द्वारा CNN को उसकी निर्धारित पूल ड्यूटी से रोकने के बाद इन पांचों नेटवर्क ने राष्ट्रपति के पूल कवरेज को फिलहाल रोकने का फैसला किया। इन नेटवर्कों ने संयुक्त रूप से कहा कि जनता को सरकार के बारे में सटीक और स्वतंत्र जानकारी पाने का महत्वपूर्ण अधिकार है और किसी प्रशासन को किसी मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग पसंद न आने पर उसे प्रतिबंधित नहीं करना चाहिए।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रपति के सभी कार्यक्रमों को अलग-अलग कैमरों से कवर करना हर मीडिया संस्थान के लिए संभव नहीं होता। टीवी पूल में शामिल नेटवर्क बारी-बारी से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की वीडियो कवरेज करते हैं और उसे अन्य समाचार संस्थानों के साथ साझा करते हैं।

व्हाइट हाउस कवरेज का पूरा सिस्टम क्यों चर्चा में है?

मीडिया पूल का उद्देश्य राष्ट्रपति की गतिविधियों की व्यापक और साझा कवरेज सुनिश्चित करना है। CNN इस व्यवस्था के पांच प्रमुख नेटवर्कों में शामिल था और सोमवार को उसे अपनी निर्धारित जिम्मेदारी निभानी थी।व्हाइट हाउस द्वारा CNN को रोकने के बाद बाकी नेटवर्कों ने उसकी जगह दूसरा नेटवर्क भेजने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति के कुछ कार्यक्रमों की पारंपरिक साझा टीवी कवरेज बाधित हुई।यही कारण है कि यह विवाद केवल तीन मीडिया संस्थानों की मान्यता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सार्वजनिक गतिविधियों की कवरेज के स्थापित सिस्टम तक पहुंच गया।

ममदानी-ट्रंप बैठक में किन मुद्दों पर हुई बातचीत?

मीडिया विवाद से इतर ट्रंप और ममदानी की बैठक में न्यूयॉर्क से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने किफायती आवास, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुरक्षा और आव्रजन जैसे विषयों पर चर्चा की।बैठक का महत्व इसलिए भी है क्योंकि दोनों की राजनीतिक प्राथमिकताओं और सार्वजनिक बयानों में कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। इसके बावजूद दोनों नेताओं ने बैठक को व्यापक मुद्दों पर बातचीत का अवसर बनाया। बैठक के बाद दोनों एक साथ मीडिया के सामने भी आए।

एक मंच पर दो तस्वीरें—ट्रंप और ममदानी

सोमवार की घटना की सबसे दिलचस्प तस्वीर यही रही कि एक ही शहर में अमेरिकी राजनीति के दो अलग-अलग राजनीतिक अंदाज दिखाई दिए।एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप मीडिया की रिपोर्टिंग और उसकी जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे थे। दूसरी तरफ न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने कहा कि उनके कार्यक्रम में सभी पत्रकारों के लिए जगह होगी, चाहे उनकी राय या आलोचना कुछ भी हो।यह अंतर दोनों नेताओं के बीच किसी व्यापक राजनीतिक सहमति या असहमति का स्वतः प्रमाण नहीं है, लेकिन प्रेस की भूमिका को लेकर सार्वजनिक रूप से सामने आए दोनों रुखों में स्पष्ट अंतर जरूर दिखाई देता है।

अब नजर अदालत और व्हाइट हाउस के अगले कदम पर

CNN, MS NOW और POLITICO की कानूनी चुनौती अब इस विवाद को अदालत तक ले गई है। मामला सिर्फ प्रेस मान्यता का नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सरकार और राष्ट्रपति के साथ काम करने वाले पत्रकारों की पहुंच किन परिस्थितियों में सीमित की जा सकती है और क्या किसी संस्थान की रिपोर्टिंग सरकार की नाराजगी का आधार बन सकती है।आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि इन मीडिया संस्थानों की व्हाइट हाउस पहुंच को लेकर क्या अंतरिम और आगे की कानूनी स्थिति बनती है।

एनएसके विश्लेषण

ग्रेसी मैंशन की बैठक ने अमेरिकी राजनीति की एक असामान्य तस्वीर सामने रख दी है—एक ओर राष्ट्रपति और मेयर के बीच संवाद, दूसरी ओर उसी दिन प्रेस की पहुंच को लेकर राष्ट्रपति प्रशासन और बड़े मीडिया संस्थानों में कानूनी टकराव।

ममदानी का ‘सभी प्रेस को बुलाएंगे’ वाला बयान इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि यह उसी समय सामने आया जब व्हाइट हाउस की मीडिया नीति पर अमेरिका में संवैधानिक और पत्रकारिता संबंधी बहस तेज हो रही है।

अब यह विवाद सिर्फ CNN, MS NOW और POLITICO तक सीमित नहीं दिखता; इसने राष्ट्रपति की सार्वजनिक कवरेज की पूरी व्यवस्था और स्वतंत्र प्रेस की भूमिका को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

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