INDIA गठबंधन की कल बड़ी बैठक, अखिलेश यादव की दूरी से उठे सवाल; राज्यसभा नामांकन या यूपी की सियासत? कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग तेज की

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 29 सितंबर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन की 30 सितंबर को प्रस्तावित बैठक से पहले दिल्ली से लखनऊ तक सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही आक्रामक है। अब INDIA गठबंधन के घटक दल इस मुद्दे पर अपनी साझा रणनीति तय करने की तैयारी में हैं। इसी बीच बैठक में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के स्वयं शामिल नहीं होने ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।

हालांकि, सपा की ओर से इसे संगठनात्मक और चुनावी व्यस्तता से जोड़ा गया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन में मौजूद रहेंगे, इसलिए वह व्यक्तिगत रूप से दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। सपा की ओर से बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया जाएगा।

अखिलेश क्यों नहीं पहुंचेंगे दिल्ली?

अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सबसे पहले सवाल यही उठा कि क्या समाजवादी पार्टी INDIA गठबंधन की रणनीति से दूरी बना रही है?

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं अखिलेश यादव से बातचीत की है और उनकी अनुपस्थिति का कारण उत्तर प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन से जुड़ी व्यस्तता है।यानी कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर जो वजह बताई गई है, वह किसी राजनीतिक बहिष्कार की नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की है।

लेकिन राजनीति में किसी बड़े नेता की अनुपस्थिति सिर्फ कार्यक्रमों के कैलेंडर से नहीं पढ़ी जाती। खासकर तब, जब उसी समय उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे की चर्चाएं भी महत्वपूर्ण दौर में हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में अखिलेश यादव की अनुपस्थिति को कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के संदर्भ में भी देखा गया है। हालांकि यह एक राजनीतिक आकलन है, न कि अखिलेश यादव की घोषित वजह।

बैठक का केंद्र—ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग

30 सितंबर की बैठक का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विपक्ष के आरोप बताए जा रहे हैं।विपक्षी दल SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। बैठक में विपक्षी सांसदों से संभावित हटाने के प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर जुटाने, साझा रणनीति बनाने और आगे के राजनीतिक अभियान पर चर्चा होने की खबरें हैं।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं। इसलिए इस पूरे विवाद में आरोप, आधिकारिक जवाब और सत्यापन योग्य चुनावी आंकड़े—तीनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

कांग्रेस का तेवर और ज्यादा तल्ख

INDIA गठबंधन की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं।कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी राजनीतिक मांगें रखीं।

कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब देना लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि वह संसद, न्यायपालिका और सड़क—तीनों स्तरों पर अपना विरोध जारी रखेगी।कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इससे भी आगे बढ़ते हुए आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे हैं और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के निर्देशों के बिना ऐसा संभव नहीं है।

यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है, जिसकी केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से अलग प्रतिक्रिया है।

INDIA गठबंधन के सामने असली चुनौती सिर्फ चुनाव आयोग नहीं

दिल्ली की बैठक का बाहरी एजेंडा भले ही चुनाव आयोग और SIR हो, लेकिन अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते।उत्तर प्रदेश 2027 के विधानसभा चुनाव की दृष्टि से विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारा आने वाले महीनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस और सपा के बीच सीटों और संभावित समझौते को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में मतभेद का उल्लेख किया गया है।ऐसे में अखिलेश यादव का दिल्ली बैठक में स्वयं न पहुंचना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बना है।

लेकिन फिलहाल दो तथ्य अलग रखना जरूरी है—सपा की घोषित वजह राज्यसभा नामांकन से जुड़ी व्यस्तता है, जबकि सीट बंटवारे से जोड़कर की जा रही बातें राजनीतिक रिपोर्टों और अटकलों का हिस्सा हैं।

ममता से लेकर दूसरे दलों तक विपक्षी संपर्क तेज

30 सितंबर की बैठक से पहले विपक्षी दलों के बीच संपर्क भी तेज हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बातचीत की खबरें सामने आई हैं। INDIA गठबंधन की बैठक में तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के शामिल होने की संभावना बताई गई है।विपक्षी दल चुनाव आयोग के मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बैठक में संभावित संसदीय कार्रवाई, साझा बयान और आगे के आंदोलन पर चर्चा होने की संभावना है।

हालांकि INDIA गठबंधन की एकजुटता की तस्वीर पूरी तरह निर्विवाद नहीं है। आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह खुद को INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं मानती और इसी कारण बैठक में शामिल नहीं होगी, हालांकि उसने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संभावित कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ खड़े होने की बात कही है।

अखिलेश की गैरमौजूदगी का संदेश क्या?

राजनीति में मौजूदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, कभी-कभी गैरमौजूदगी भी उतनी ही चर्चा पैदा करती है।अखिलेश यादव का बैठक में स्वयं नहीं जाना निश्चित रूप से यह साबित नहीं करता कि सपा INDIA गठबंधन से दूरी बना रही है। उनकी पार्टी बैठक में अपना प्रतिनिधि भेज रही है। लेकिन यह भी सच है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और सपा के बीच तालमेल का सवाल लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।इसलिए 30 सितंबर की बैठक में अखिलेश यादव की अनुपस्थिति से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि सपा का प्रतिनिधि क्या रुख रखता है, कांग्रेस के साथ समन्वय किस स्तर पर होता है और बैठक के बाद विपक्ष संयुक्त रणनीति के रूप में क्या घोषणा करता है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष कितना आगे जाएगा?

विपक्षी दलों की बैठक का एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि क्या वे केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रहेंगे या संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ औपचारिक हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएंगे।रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल इस दिशा में सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने और आगे की संसदीय रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।दूसरी ओर चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं करते।

भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया है और SIR के दौरान फर्जी, डुप्लीकेट तथा मृत मतदाताओं से जुड़े नामों को हटाने की प्रक्रिया का बचाव किया है।यानी अब विवाद सिर्फ किसी एक चुनाव या एक राज्य तक सीमित नहीं दिख रहा। यह चुनावी सूची, निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और राजनीतिक दलों के बीच भरोसे का व्यापक प्रश्न बन चुका है।

30 सितंबर पर टिकी निगाहें

अब निगाहें 30 सितंबर की दिल्ली बैठक पर हैं।

क्या विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक साझा राजनीतिक और संसदीय रणनीति घोषित करेगा?

क्या SIR को लेकर देशव्यापी अभियान का फैसला होगा?

क्या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर कोई राजनीतिक संकेत सामने आएगा?

और सबसे अहम—क्या अखिलेश यादव की अनुपस्थिति को महज राज्यसभा नामांकन की व्यस्तता माना जाएगा या आने वाले दिनों में इसका कोई बड़ा राजनीतिक अर्थ सामने आएगा?

इन सवालों का जवाब बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।.फिलहाल इतना जरूर है कि चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है, कांग्रेस अपने अभियान को राष्ट्रीय मुद्दे में बदलने की कोशिश कर रही है और INDIA गठबंधन के भीतर भी समन्वय की परीक्षा शुरू हो चुकी है।

30 सितंबर की बैठक इसलिए केवल एक बैठक नहीं, बल्कि विपक्ष की अगली रणनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकती है।

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