बी के झा
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नई दिल्ली, 30 सितंबर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों, हरित ऊर्जा और राजधानी दिल्ली की यातायात व्यवस्था से जुड़े तीन अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार के फैसलों में एक ओर रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी कर किसानों को राहत देने की कोशिश की गई है, वहीं दूसरी ओर देश में अक्षय ऊर्जा की बढ़ती क्षमता को बिजली ग्रिड से जोड़ने और दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़े निवेश का रास्ता साफ किया गया है।
गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ा,
सरसों और कुसुम में बड़ी बढ़ोतरी
कैबिनेट ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल करने को मंजूरी दी है। रबी विपणन सत्र 2026-27 में गेहूं का MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं की अनुमानित उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि आगामी विपणन सत्र के लिए MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।सरकार ने गेहूं के साथ पांच अन्य प्रमुख रबी फसलों के MSP में भी वृद्धि की है।
फसल, 2027-28 का MSP- बढ़ोतरी
गेहूं, ₹2,610/क्विंटल| ₹25
जौ- ₹2,286/क्विंटल- ₹136
चना| ₹5,958/क्विंटल-₹83
मसूर| ₹7,390/क्विंटल|
₹390रैपसीड-सरसों- ₹6,613/ क्विंटल- ₹413
कुसुम- ₹7,215/क्विंटल- ₹675
केंद्र के अनुमान के मुताबिक 2027-28 रबी विपणन सत्र में करीब 324 लाख टन फसल की खरीद की जा सकती है।
इसके लिए किसानों को लगभग 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का अनुमान है।MSP तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। उत्पादन लागत के अलावा घरेलू और वैश्विक कीमतों के रुझान तथा अन्य कृषि एवं बाजार परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया है।
1.86 लाख करोड़ रुपये की हरित ऊर्जा योजना को मंजूरी
कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला देश के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा है। सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी है।इस योजना पर कुल 1,86,405 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका लक्ष्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पैदा होने वाली 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए राज्य के भीतर ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना है।
योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।देश में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने और फिर उपभोक्ताओं तक निर्बाध रूप से पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क भी जरूरी है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर इसी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
दिल्ली में ट्रैफिक मैनेजमेंट होगा स्मार्ट
कैबिनेट ने राजधानी दिल्ली की यातायात व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने को भी मंजूरी दी है।इस परियोजना पर 1,789.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।
परियोजना को दिल्ली पुलिस लागू करेगी।
इसके तहत दिल्ली के 42 प्रमुख यातायात कॉरिडोर को तीन चरणों में शामिल किया जाएगा। पूरी परियोजना को 24 महीने में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पांच वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी।
तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन का उद्देश्य
राजधानी की व्यस्त सड़कों पर यातायात संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाना, ट्रैफिक की निगरानी को मजबूत करना और उपलब्ध बुनियादी ढांचे का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना है।किसान, ऊर्जा और राजधानी—एक बैठक में तीन मोर्चों पर बड़ा फैसला
मोदी कैबिनेट के बुधवार के फैसलों को तीन अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़कर देखा जा सकता है। पहला फैसला सीधे किसानों और रबी फसलों के मूल्य समर्थन से संबंधित है।
दूसरा देश के बढ़ते अक्षय ऊर्जा ढांचे और बिजली ट्रांसमिशन क्षमता से जुड़ा है।
तीसरा राजधानी दिल्ली की रोजमर्रा की सबसे बड़ी शहरी चुनौतियों में शामिल यातायात प्रबंधन को आधुनिक बनाने से संबंधित है।
यानी कैबिनेट की एक बैठक में खेती से लेकर ऊर्जा और खेत से महानगर तक, तीन अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नीतिगत फैसलों की तस्वीर सामने आई है।
एन एस के विशेष , बी. के. झा
