बी के झा
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रांची, 30 सितंबर
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन मामले में बुधवार को कानूनी प्रक्रिया ने एक अहम मोड़ ले लिया।
रांची की विशेष PMLA अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। मुख्यमंत्री अदालत की कार्यवाही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। आरोप तय होने के साथ ही मामला अब ट्रायल के चरण में प्रवेश कर गया है।हालांकि, आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों और साक्ष्यों को ट्रायल के दौरान साबित करना होगा। हेमंत सोरेन ने अदालत में अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
8.86 एकड़ जमीन से शुरू हुआ मामला अब ट्रायल की चौखट पर
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और कब्जे से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर तथा अवैध तरीके से जमीन हासिल किए जाने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच की थी।ED की जांच के आधार पर इस मामले में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने के साथ इस मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया सभी आरोपियों के खिलाफ पूरी हो गई है। अब अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्यों की जांच ट्रायल के दौरान होगी।
ED का दावा क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि बड़गाईं की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए हासिल किया गया। सितंबर में झारखंड हाईकोर्ट के सामने मामले की सुनवाई के दौरान ED की ओर से लगाए गए आरोपों में कहा गया था कि जांच में 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन के कथित कब्जे और नियंत्रण से जुड़े साक्ष्य सामने आए।ED ने अदालत में यह भी दावा किया कि जमीन पर मौजूद देखरेख करने वाले लोगों के बयानों तथा जांच के दौरान मिले दस्तावेजों से सोरेन को जमीन से जोड़ने की कोशिश की गई।
एजेंसी ने जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में ‘CMO URGENT’ नाम से एक फाइल मिलने का भी उल्लेख किया था। ये सभी ED के आरोप हैं, जिनकी अंतिम न्यायिक जांच ट्रायल में होनी है।
31 जनवरी 2024 को हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले के मनी लॉन्ड्रिंग एंगल में ED ने हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद मामला PMLA की विशेष अदालत में आगे बढ़ा।बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने जून 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी। इस साल सितंबर में हाईकोर्ट ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया और आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ।
हाईकोर्ट में भी चल रही है कानूनी लड़ाई
दिलचस्प बात यह है कि निचली अदालत में आरोप तय होने के साथ ही मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। झारखंड हाईकोर्ट में भी इस मामले से संबंधित याचिका पर सुनवाई जारी है।30 सितंबर को हाईकोर्ट ने ED को मामले में सप्लीमेंट्री हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और उसकी प्रति सभी पक्षों को उपलब्ध कराने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है।
सोरेन का पक्ष- आरोप निराधार
अदालत की कार्यवाही के दौरान हेमंत सोरेन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को निराधार बताया है। अब ट्रायल में अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें पेश करेंगे।
अब आगे क्या?
आरोप तय होने के बाद मामला अब ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा। अभियोजन पक्ष अपने गवाह और साक्ष्य पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को उन पर जिरह और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।इसलिए बुधवार की कार्रवाई को मामले में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
अदालत ने फिलहाल आरोपों को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है; यह तय होना अभी बाकी है कि अभियोजन पक्ष ट्रायल के दौरान अपने आरोपों को किस हद तक साबित कर पाता है।
8.86 एकड़ जमीन से शुरू हुआ यह मामला अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां जांच एजेंसी के दावों और हेमंत सोरेन के बचाव—दोनों की असली कानूनी परीक्षा ट्रायल में होगी।
एन एस के विशेष, बी. के. झा
