राफेल से AMCA तक: आसमान में भारत की नई रणनीति, 114 फाइटर जेट की डील पर साल के अंत तक तस्वीर साफ होने की उम्मीद, अधिकांश विमानों की भारत में असेंबली; साथ-साथ तेजस Mk2 और AMCA पर भी तेज हुआ काम

बी. के. झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर

भारत की लड़ाकू विमान शक्ति को लेकर एक साथ कई मोर्चों पर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है। एक तरफ फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद प्रक्रिया अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ सरकार इन विमानों में अधिक से अधिक भारतीय हथियारों और स्वदेशी प्रणालियों को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके समानांतर देश का अपना LCA Mk2 यानी तेजस Mk2 और पांचवीं पीढ़ी का AMCA कार्यक्रम भी आगे बढ़ रहा है।यानी भारत की रणनीति अब केवल विदेश से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान खरीदने तक सीमित नहीं दिखती।

लक्ष्य यह भी है कि विदेशी प्लेटफॉर्म के साथ भारतीय हथियार, भारतीय सिस्टम, भारतीय उत्पादन क्षमता और घरेलू औद्योगिक इकोसिस्टम को जोड़ा जाए।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक 114 राफेल की खरीद के लिए प्राप्त बोलियों का औपचारिक मूल्यांकन चल रहा है। सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत से पहले खरीद प्रक्रिया में किसी नतीजे तक पहुंचा जा सकता है।

राफेल में ‘मेड इन इंडिया’ की बढ़ती छाप

इस प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता केवल विमानों की संख्या नहीं, बल्कि उनका भारतीयकरण है।रक्षा सचिव ने कहा कि राफेल मरीन के लिए पहले से खरीदे गए विमानों में भी भारतीय हथियारों को शामिल करने पर फ्रांस सहमत हुआ था। अब 114 राफेल के मामले में भारत इससे आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

यह ‘Buy and Make’ मॉडल है, जिसमें बड़ी संख्या में विमानों को भारत में ही असेंबल किए जाने की योजना है। साथ ही भारतीय सिस्टम और हथियारों का बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण और इंटीग्रेशन किया जाना प्रस्तावित है।फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 Multi Role Fighter Aircraft यानी राफेल की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने उस समय कहा था कि प्रस्तावित विमानों में अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा।

मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार करीब 90 राफेल भारत में फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation और एक भारतीय कंपनी के सहयोग से बनाए जाने की योजना बताई गई थी। इसी प्रक्रिया में भारतीय हथियारों के एकीकरण के लिए आवश्यक तकनीकी इंटरफेस पर भी बातचीत की गई है।

बोलियां सामने, अब मूल्यांकन की बारी

राफेल खरीद प्रक्रिया अब उस चरण में है जहां संबंधित पक्ष अपनी बोलियां जमा कर चुके हैं और उनका औपचारिक मूल्यांकन किया जा रहा है।रक्षा सचिव के अनुसार इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा और सरकार को उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से पहले खरीद प्रक्रिया में कोई ठोस नतीजा सामने आ सकता है।हालांकि अंतिम अनुबंध तक पहुंचने के लिए मूल्यांकन, वाणिज्यिक बातचीत और आवश्यक सरकारी मंजूरियों जैसे चरण पूरे होने बाकी हैं। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम डील के बजाय तेजी से आगे बढ़ रही खरीद प्रक्रिया के रूप में देखना उचित होगा।राफेल के साथ भारतीय हथियारों की ताकतइस पूरी रणनीति का एक अहम पहलू यह है कि भारत विदेशी विमान को केवल एक तैयार प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उसमें अपने विकसित हथियार और सिस्टम जोड़ना चाहता है।मसलन, भारतीय हथियारों के एयरक्राफ्ट इंटीग्रेशन की क्षमता बढ़ने से भविष्य में स्वदेशी मिसाइल और अन्य प्रणालियों को अलग-अलग विदेशी प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

यहां राफेल केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारतीय हथियार प्रणालियों के लिए एक महत्वपूर्ण एयरबोर्न प्लेटफॉर्म भी बन सकता है।

तेजस Mk2: विदेशी निर्भरता से स्वदेशी क्षमता की ओर अगला कदम

राफेल की खरीद के समानांतर भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को भी आगे बढ़ा रहा है।LCA Mk2 यानी तेजस Mk2 की पहली उड़ान अगले साल के मध्य तक प्रस्तावित है। रक्षा सचिव के अनुसार प्रोटोटाइप तैयार होने और भारतीय वायुसेना द्वारा उसके मूल्यांकन के बाद इसकी वास्तविक आवश्यकता और आगे की खरीद पर फैसला किया जाएगा। शुरुआती तौर पर करीब 120 विमानों की आवश्यकता बताई गई है।लेकिन तेजस Mk2 की कहानी सिर्फ एक विमान विकसित करने की नहीं है। इसके जरिए भारत ऐसा एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहा है जिसमें HAL के साथ निजी कंपनियां और MSME सेक्टर भी बड़ी भूमिका निभाएं।

HAL अब निजी क्षेत्र की मदद से बड़े विमान घटकों, जिसमें फ्यूजलेज जैसे महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं, के उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

AMCA पर भारत का अपना दांवऔर इसी श्रृंखला की सबसे महत्वाकांक्षी कड़ी है AMCA—Advanced Medium Combat Aircraft।रक्षा सचिव के अनुसार भारत ने अभी तक किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। फिलहाल भारत की प्राथमिकता अपना स्वदेशी AMCA कार्यक्रम है।AMCA के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए निजी क्षेत्र के वेंडर्स से RFP मांगा जा चुका है। मई 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार Tata Advanced Systems, Larsen & Toubro-BEL और Bharat Forge-BEML से जुड़े समूहों को प्रोटोटाइप विकास के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।

इससे एक और बड़ा बदलाव सामने आता है—भारत के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में निजी उद्योग की भूमिका अब केवल सप्लायर तक सीमित नहीं रह रही, बल्कि डिजाइन और प्रोटोटाइप विकास जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

राफेल आज की जरूरत, तेजस और AMCA भविष्य की क्षमता

भारत के सामने चुनौती दोहरी है। वायुसेना की मौजूदा लड़ाकू क्षमता की जरूरतों को पूरा करना भी है और भविष्य के लिए स्वदेशी तकनीकी आधार भी तैयार करना है।इसीलिए एक तरफ राफेल जैसे अत्याधुनिक विमान की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ तेजस Mk2 और AMCA जैसे कार्यक्रमों पर जोर है।राफेल तत्काल और निकट अवधि की परिचालन जरूरतों को पूरा करने वाला प्लेटफॉर्म बन सकता है, जबकि तेजस Mk2 और AMCA भारत की दीर्घकालिक स्वदेशी लड़ाकू विमान क्षमता के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं।

असली कहानी विमान की संख्या नहीं, तकनीक पर पकड़ की है

114 राफेल की प्रस्तावित खरीद की सबसे बड़ी कहानी केवल यह नहीं है कि भारत कितने लड़ाकू विमान खरीदेगा। असली सवाल यह है कि इन विमानों के साथ भारत कितना उत्पादन, कितना स्वदेशीकरण और कितनी तकनीकी एकीकरण क्षमता देश में ला पाता है।यदि भारतीय हथियारों और प्रणालियों का व्यापक इंटीग्रेशन आगे बढ़ता है, भारत में असेंबली और उत्पादन का आधार मजबूत होता है और निजी उद्योग तथा MSME क्षेत्र सप्लाई चेन में गहराई से जुड़ते हैं, तो इसका असर केवल राफेल कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा।यही औद्योगिक क्षमता आगे तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों के लिए भी आधार बन सकती है।

आसमान में भारत की अगली कहानी इसलिए केवल राफेल की नहीं है। यह राफेल से तेजस Mk2 और तेजस Mk2 से AMCA तक पहुंचती उस रणनीति की कहानी है, जिसमें विदेशी क्षमता को तत्काल जरूरत के लिए इस्तेमाल करते हुए देश के भीतर भविष्य की लड़ाकू तकनीक और उत्पादन क्षमता खड़ी करने की कोशिश की जा रही है।

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