बी. के झा
NSK news India




गुरुग्राम , 7 अक्टूबर
गुरुग्राम में बुधवार को राजनीति की दो अलग-अलग तस्वीरें एक साथ दिखाई दीं। एक ओर महाराणा प्रताप स्वर्ण जयंती उद्यान यानी लेजर वैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ और ‘सेवा ज्योति यात्रा’ का आयोजन हुआ, तो दूसरी ओर राजधानी दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था। एक तरफ मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुटे, दूसरी तरफ विपक्ष सड़क पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रहा था।
हरियाणा सरकार के मुताबिक गुरुग्राम के इस राष्ट्रीय आयोजन में फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और झज्जर सहित दक्षिण हरियाणा के विभिन्न जिलों से भी जनभागीदारी हुई। कार्यक्रम सुबह से ही राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। प्रशासन ने यातायात, पार्किंग और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
सड़क से मैदान तक दिखा आयोजन का असर
कार्यक्रम स्थल की ओर सुबह से वाहनों की आवाजाही बढ़ने लगी। स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के अनुसार गुरुग्राम के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ा। दिल्ली-जयपुर हाईवे, सोहना रोड, राजीव चौक, इफको चौक और सिग्नेचर टावर के आसपास यातायात व्यवस्था को संभालना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।हालांकि, किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ का आकार अपने आप में राजनीतिक समर्थन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। भीड़ में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक, आम नागरिक और विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी अलग-अलग कारणों से शामिल हो सकते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि इतने बड़े क्षेत्र से लोगों की भागीदारी किसी आयोजन की राजनीतिक दृश्यता को बढ़ाती है।
अमित शाह ने क्या संदेश दिया?
गुरुग्राम में अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन को सेवा और राष्ट्र निर्माण की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया। आकाशवाणी के अनुसार शाह ने मोदी सरकार के कार्यकाल में अनुच्छेद 370 हटाने, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखा।‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है और इसका फोकस सेवा, जनभागीदारी, जागरूकता और विकास जैसे विषयों पर रखा गया है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को जनभागीदारी और संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर भी है। हरियाणा सरकार ने भी इस अभियान को सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया है।
गुरुग्राम के मैदान से राहुल गांधी पर तंज
कार्यक्रम में मौजूद एक वयोवृद्ध आम नागरिक ने राहुल गांधी और विपक्ष के मौजूदा आंदोलन पर तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सुनने के लिए विशाल मैदान में बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं।उस बुजुर्ग नागरिक ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और सत्ता का फैसला जनता अपने वोट से करती है।
उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के मुद्दों पर काम करना चाहिए और यदि लगातार इसी तरह की राजनीति होती रही तो मतदाता भविष्य में ऐसे नेताओं के बारे में अपने तरीके से फैसला करेंगे।हालांकि यह एक नागरिक की व्यक्तिगत राजनीतिक राय है, इसे पूरे जनसमूह की राय मानना उचित नहीं होगा।
दिल्ली में विपक्ष का अलग नैरेटिव
इसी दिन दिल्ली में राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा। विपक्ष की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया।विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के इस आंदोलन को राजनीतिक विरोध के तौर पर देख रहा है। इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच असली लोकतांत्रिक सवाल यही है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का समाधान तथ्य, पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया के जरिए कैसे हो।
NDA के लिए गुरुग्राम का संदेश क्या?
NDA और भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव में ‘विकसित भारत’, प्रधानमंत्री के 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन, विकास और जनभागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। गुरुग्राम का आयोजन इसी नैरेटिव को जमीन पर उतारने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।भाजपा के लिए हरियाणा विशेष रूप से महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा के विभिन्न जिलों से लोगों का गुरुग्राम पहुंचना संगठन की क्षेत्रीय लामबंदी को प्रदर्शित करता है। लेकिन इसे सीधे चुनावी परिणाम का संकेत मानना राजनीतिक विश्लेषण को जरूरत से ज्यादा सरल बना देगा।
विपक्ष के सामने चुनौती भी कम नहीं
दूसरी ओर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग की भूमिका, SIR और मतदाता सूची को लेकर लगातार सड़क पर हैं। राहुल गांधी का आंदोलन विपक्ष के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा है। कांग्रेस इसे मतदाता के अधिकार से जोड़ रही है।लेकिन विपक्ष के आंदोलन की राजनीतिक प्रभावशीलता का आकलन केवल भीड़ या हिरासत की घटनाओं से नहीं किया जा सकता।
उसके लिए यह देखना होगा कि वह अपने आरोपों को कितनी मजबूती से दस्तावेजों और तथ्यों के साथ जनता तक पहुंचाता है और क्या उसके सहयोगी दल उसके नैरेटिव के साथ लंबे समय तक एकजुट रहते हैं।
शिक्षाविद और सामाजिक संगठनों के लिए भी बड़ा सवाल
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की ताकत केवल मंचों पर जुटने वाली भीड़ से नहीं, बल्कि जनता के बीच मुद्दों की विश्वसनीयता से भी तय होती है। शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के नजरिए से इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि सत्ता पक्ष विकास और जनभागीदारी की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहा है।
यानी दोनों पक्ष जनता के सामने अलग-अलग राजनीतिक एजेंडा रख रहे हैं। अब फैसला जनता के विवेक पर है कि वह किस मुद्दे को अधिक महत्वपूर्ण मानती है।
गुरुग्राम से निकली तस्वीर बनाम दिल्ली का संघर्ष
बुधवार की राजनीति को यदि एक तस्वीर में समेटें तो गुरुग्राम में मंच पर ‘सेवा, विकास और विकसित भारत’ का संदेश था, जबकि दिल्ली की सड़कों पर ‘चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता अधिकार’ का सवाल।यही भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा राजनीति का दिलचस्प विरोधाभास है।
एक तरफ सत्ता पक्ष अपने शासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रहा है, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हीं संस्थागत प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रहा है जिनके जरिए सत्ता का जनादेश तय होता है।
गुरुग्राम की भीड़ भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से उत्साहजनक दृश्य जरूर हो सकती है, लेकिन लोकतंत्र में भीड़ अंतिम फैसला नहीं होती।
अंतिम फैसला मतदाता करता है—और वह फैसला मतदान के दिन अपने विवेक से करता है।
बी. के. झा, एनएसके (NSK)

