बी के झा
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कोलकाता/पश्चिम मेदिनीपुर, 25 सितंबर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गिरफ्तारी ने सियासी हलचल तेज कर दी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पिंगला के पूर्व विधायक अजीत मैती को पुलिस ने शुक्रवार तड़के उनके खड़गपुर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। मैती फिलहाल पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद में सह-सभाधिपति के पद पर हैं।
पुलिस की कार्रवाई के बाद उन्हें डेबरा थाने ले जाया गया।शुरुआती खबरों में गिरफ्तारी को पुराने मामले से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन बाद की रिपोर्टों में सामने आया कि मामला पार्टी पद दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 15 लाख रुपये लेने के आरोप से जुड़ा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, आरोपों की सच्चाई का अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।
15 लाख रुपये और पार्टी पद का कथित सौदा
रिपोर्टों के मुताबिक, अजीत मैती के खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण पद दिलाने का भरोसा देकर पैसे लिए गए। कुछ रिपोर्टों में शिकायतकर्ता को टीएमसी से जुड़े पूर्व पदाधिकारी के रूप में बताया गया है। मामले में 23 सितंबर को पिंगला थाने में शिकायत/FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने शुक्रवार सुबह कार्रवाई करते हुए मैती को उनके आवास से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें डेबरा थाने ले जाया गया। अब उनकी अदालत में पेशी के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी किन धाराओं में आगे कार्रवाई करती है और अदालत की ओर से क्या आदेश दिया जाता है।
यानी जिस मामले को शुरुआती तौर पर महज पुराने प्रकरण की कार्रवाई माना जा रहा था, उसने अब पैसे के बदले राजनीतिक पद दिलाने के कथित आरोप का रूप ले लिया है।
2021 में विधायक बने, 2026 में चुनाव भी लड़ा
अजीत मैती पिंगला विधानसभा सीट से टीएमसी के विधायक रह चुके हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने एक बार फिर उन्हें पिंगला से मैदान में उतारा, लेकिन इस बार उन्हें बीजेपी के स्वागत मन्ना से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक मैती को 1,05,709 वोट मिले थे।
विधायक का चुनाव हारने के बाद भी पार्टी संगठन में उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहा और वे पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद में सह-सभाधिपति के पद पर रहे। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय टीएमसी संगठन की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
बंगाल में गिरफ्तारी की सियासी टाइमिंग पर भी नजर
अजीत मैती की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही चुनावी और संगठनात्मक खींचतान के दौर से गुजर रही है। इसी बीच नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी का मामला भी चर्चा में रहा है।मिलन प्रधान को 18 सितंबर को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए राजनीतिक कार्रवाई का आरोप लगाया, जबकि पुलिस और राज्य सरकार की ओर से इसे लंबित कानूनी मामलों तथा वारंट से जुड़ी कार्रवाई बताया गया। इस मामले में बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट में भी कानूनी कार्यवाही हुई।
22 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि मिलन प्रधान से जुड़े पांच मामले वापस ले लिए गए हैं, जबकि अन्य मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी थी।
नंदीग्राम के बाद पिंगला—बंगाल में पुराने मामलों की फाइलें क्यों खुल रहीं?
मिलन प्रधान के मामले के बाद अब अजीत मैती की गिरफ्तारी ने बंगाल की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पुराने मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाई चुनावी और राजनीतिक गतिविधियों के बीच महज संयोग है, या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है?
इस सवाल का उत्तर राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि संबंधित मामलों की FIR, गिरफ्तारी के आधार, अदालत के आदेश और जांच के निष्कर्षों से ही निकलेगा।
अजीत मैती के मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन पर लगाए गए 15 लाख रुपये लेने के आरोप साबित नहीं हुए हैं। यह एक आरोप है और अदालत में इसका परीक्षण होना बाकी है।
अब अदालत में खुलेगा अगला पन्ना
टीएमसी के एक प्रभावशाली नेता और पूर्व विधायक की गिरफ्तारी ने पश्चिम मेदिनीपुर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब निगाहें अदालत पर हैं।
क्या अजीत मैती को पुलिस हिरासत मिलेगी?
क्या कथित 15 लाख रुपये के लेन-देन के कोई ठोस दस्तावेज या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं?
क्या शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि जांच में होती है?
और क्या इस मामले का कोई राजनीतिक पहलू भी सामने आता है?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया से मिलेगा।
फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि पिंगला के पूर्व टीएमसी विधायक अजीत मैती पुलिस गिरफ्त में हैं और उनके खिलाफ पार्टी पद दिलाने के नाम पर पैसे लेने का गंभीर आरोप जांच के केंद्र में है।
आरोप सही हैं या नहीं—इसका फैसला अदालत और जांच के निष्कर्ष करेंगे।
