कोट ठीक किया, बाल संवारे, फिर अपने हाथों से खिलाया खाना… UPPSC इंटरव्यू से पहले पिता का ये प्यार देख भावुक हुए लोग,सोशल मीडिया पर बोली भावनाएं—‘सफलता से पहले मिल गया सबसे बड़ा आशीर्वाद

बी के झा

NSK news Ind

प्रयागराज, 6 अक्टूबर

जिंदगी में कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं, जिनके लिए किसी बड़े संवाद की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ सेकेंड का एक दृश्य ही रिश्तों की पूरी कहानी कह देता है। प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के इंटरव्यू के लिए पहुंचे एक अभ्यर्थी और उसके पिता का ऐसा ही एक भावुक पल इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है।बेटा जिंदगी की एक बड़ी परीक्षा देने पहुंचा था। सामने इंटरव्यू का गेट था, भीतर उसके सपनों की अगली मंजिल और बाहर खड़ा था वह शख्स, जिसने शायद उसके इस सफर की पहली सीढ़ी से लेकर आज तक उसका हाथ थामे रखा था—उसका पिता।

इंटरव्यू के लिए अंदर जाने से ठीक पहले पिता ने बेटे का कोट ठीक किया। फिर जेब से कंघी निकाली और बड़े प्यार से उसके बाल संवारने लगे। इसके बाद उन्होंने अपने पास रखा खाना निकाला और बेटे को अपने हाथों से खिलाया।कुछ ही पलों बाद बेटे ने झुककर पिता के पैर छुए और आशीर्वाद लेकर इंटरव्यू देने के लिए अंदर चला गया।दृश्य छोटा था, लेकिन उसमें एक पिता की पूरी जिंदगी का प्यार दिखाई दे रहा था।

‘अभी भी बच्चा है मेरा बेटा…’वायरल वीडियो में पिता जिस तरह बेटे का कोट ठीक करते, बाल संवारते और फिर उसे खाना खिलाते नजर आ रहे हैं, वह दृश्य देखने वालों को भावुक कर रहा है।

इंटरव्यू देने आया बेटा भले ही बड़ा हो चुका हो, अपने करियर की एक महत्वपूर्ण परीक्षा के मुहाने पर खड़ा हो, लेकिन पिता की नजर में वह शायद आज भी वही बच्चा है जिसे घर से निकलने से पहले ठीक से तैयार करना, खाना खिलाना और संभालना जरूरी है।

यही तो माता-पिता के प्रेम की सबसे खूबसूरत बात है—बच्चा कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, मां-बाप की चिंता छोटी नहीं होती।

पिता के हाथों से खाना और फिर पैर छूकर आशीर्वाद

इंटरव्यू के लिए अंदर जाने से पहले बेटे का पिता के पैर छूना इस पूरे दृश्य को और भी भावुक बना देता है।एक तरफ पिता बेटे को आखिरी बार ठीक से तैयार कर रहे थे, दूसरी तरफ बेटा उस व्यक्ति के सामने सिर झुका रहा था, जिसकी दुआओं को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है।यह सिर्फ पैर छूने की एक रस्म नहीं थी। यह उस विश्वास का दृश्य था, जिसमें बेटे को शायद यह भरोसा था कि पिता का आशीर्वाद साथ है तो मुश्किल सवालों का सामना भी हिम्मत से किया जा सकता है।

UPPSC गेट के बाहर का पल, सोशल मीडिया पर पहुंचा हजारों दिलों तक

बताया जा रहा है कि यह वीडियो प्रयागराज स्थित UPPSC कार्यालय के बाहर का है, जहां इन दिनों इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने वर्षों की मेहनत के बाद इस महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंच रहे हैं।इसी दौरान किसी व्यक्ति ने पिता और बेटे के इस आत्मीय पल को कैमरे में कैद कर लिया।वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो लोगों ने इसे सिर्फ एक वायरल क्लिप के रूप में नहीं देखा। किसी को अपने पिता की याद आई, किसी को मां का चेहरा याद आया और किसी को वह दिन याद आया जब वह खुद किसी परीक्षा या इंटरव्यू के लिए घर से निकला था।

‘ऐसे पिता का आशीर्वाद हो तो हिम्मत कभी कम नहीं होती’

वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बेहद भावुक हैं। कई यूजर्स का कहना है कि पिता ने बेटे को सिर्फ इंटरव्यू के लिए तैयार नहीं किया, बल्कि अपने प्यार, भरोसे और आशीर्वाद से उसका आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

कुछ लोगों ने कहा कि सफलता की दौड़ में हम अक्सर तैयारी, किताबों और अंकों की बात करते हैं, लेकिन उसके पीछे खड़े माता-पिता की तपस्या को भूल जाते हैं।

कई लोगों ने लिखा कि जिस बच्चे के सिर पर माता-पिता का हाथ हो, वह परीक्षा में केवल अपनी मेहनत लेकर नहीं जाता—वह अपने साथ घर की दुआएं भी लेकर जाता है।

हर बड़ी सफलता के पीछे कोई चुपचाप खड़ा होता है

प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया बाहर से जितनी व्यक्तिगत दिखाई देती है, भीतर से उतनी ही पारिवारिक होती है।एक अभ्यर्थी वर्षों तक किताबों के बीच बैठता है, लेकिन उस दौरान किसी मां की चिंता, किसी पिता की मेहनत, परिवार की उम्मीदें और घर की अनगिनत कुर्बानियां भी उसके साथ चलती हैं।

UPPSC का इंटरव्यू देने पहुंचा यह बेटा भी शायद अपने साथ केवल अपनी तैयारी लेकर नहीं गया होगा। उसके पीछे उसके पिता की उम्मीदें भी थीं।और शायद इसी वजह से इंटरव्यू के गेट पर पिता का वह छोटा-सा स्पर्श इतना बड़ा बन गया।

वीडियो ने याद दिलाया—सफलता सिर्फ आपकी नहीं होती

आज प्रतियोगी परीक्षाओं की सफलता को अक्सर रैंक, पद और नौकरी के पैमाने से देखा जाता है। लेकिन इस वीडियो ने सफलता की एक दूसरी तस्वीर सामने रख दी है।बेटे के लिए इंटरव्यू एक परीक्षा थी, लेकिन पिता के लिए यह वर्षों की तपस्या का एक और पड़ाव था।कोट की सिलवट ठीक करने वाला वह हाथ, बालों में कंघी करने वाला वह हाथ और अपने हाथों से खाना खिलाने वाला वही हाथ शायद उस बेटे के बचपन से अब तक उसके साथ रहा है।

बेटा अंदर चला गया।

पिता बाहर रह गए।लेकिन उस इंटरव्यू हॉल के दरवाजे तक बेटे के साथ सिर्फ उसकी मेहनत नहीं गई—पिता का आशीर्वाद भी उसके साथ गया।

शायद इसी रिश्ते को कहते हैं—बच्चा बड़ा हो जाता है, लेकिन मां-बाप का प्यार कभी बड़ा नहीं होता; वह हमेशा उतना ही मासूम रहता है, जितना बचपन में था।

एनएसके डेस्क

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