फर्जी प्रमाणपत्र से MBBS सीट हथियाने का आरोप, 4 छात्राओं का एडमिशन रद्द; 5 पर FIR स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा; मध्य प्रदेश में भी फर्जी MBBS डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी का मामला सामने आ चुका है

बी के झा

NSK news Ind

देहरादून, 16 सितंबर

मेडिकल कॉलेज में दाखिला सिर्फ एक सीट हासिल करना नहीं होता, बल्कि यह भविष्य के डॉक्टर बनने की दिशा में पहला कदम माना जाता है। लेकिन जब इसी प्रवेश प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो जाएं तो मामला सिर्फ एक छात्र या एक सीट तक सीमित नहीं रहता। उत्तराखंड के देहरादून में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत MBBS में दाखिले से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है।कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए MBBS में प्रवेश लेने के मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। मामला सामने आने के बाद चारों छात्राओं के MBBS दाखिले भी निरस्त कर दिए गए हैं।

प्रशासनिक जांच में संबंधित प्रमाणपत्रों को प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाया गया। इतना ही नहीं, प्रमाणपत्रों में दर्ज पतों का भी सत्यापन नहीं हो सका। जांच के दौरान प्रमाणपत्रों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज भी अधूरे पाए गए।

शिकायत पहुंची तो खुला प्रमाणपत्रों का राज

मामला तब सामने आया जब स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत जारी प्रमाणपत्रों को लेकर शिकायतें मिलीं। इसके बाद देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी की संयुक्त जांच समिति गठित की।समिति ने दस्तावेजों की जांच की तो कई सवाल सामने आए। जांच रिपोर्ट में प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए गए। प्रमाणपत्रों में दर्ज पते का सत्यापन भी नहीं हो पाया। वहीं, प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को भी जांच में अधूरा बताया गया।

जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा निदेशक को भेज दी है। प्रशासन का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

चार MBBS दाखिले रद्द

जांच रिपोर्ट के बाद देहरादून स्थित एचएनबी मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत दाखिला लेने वाली चारों छात्राओं के MBBS प्रवेश निरस्त कर दिए।चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जांच रिपोर्ट के आधार पर दाखिले रद्द किए गए हैं।यानी जिस प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल सीट मिली, उसी प्रमाणपत्र की सत्यता पर सवाल उठने के बाद प्रवेश भी हाथ से चला गया।

दो थानों में अलग-अलग FIR

पुलिस कार्रवाई भी इस मामले को गंभीर बनाती है। क्लेमेंट टाउन थाने में त्रिप्ति और उसकी मां उमा देवी के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र हासिल करने के आरोप में FIR दर्ज की गई है।वहीं रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के मामले में अलग FIR दर्ज की गई है।अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि संबंधित प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार हुए, उनके लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए और यदि फर्जीवाड़ा साबित होता है तो इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

सवाल सिर्फ चार छात्राओं का नहीं

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी आरक्षित या विशेष कोटे के लिए जारी प्रमाणपत्रों की जांच प्रवेश के बाद जाकर करनी पड़े, तो प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआती जांच कितनी मजबूत थी?

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटा उन परिवारों से जुड़ा है जिनके पूर्वजों ने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया था। ऐसे कोटे में प्रमाणपत्र की वैधता सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति गलत दस्तावेज के जरिए ऐसी सीट हासिल करता है तो उसका सीधा असर उस अभ्यर्थी पर पड़ सकता है जो वास्तव में उस पात्रता को पूरा करता हो।

हालांकि, इस मामले में अंतिम दोष सिद्ध होना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है और FIR या प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए गए प्रमाणपत्र अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं।

उत्तराखंड से मध्य प्रदेश तक—मेडिकल सिस्टम के लिए चेतावनी?

देहरादून का मामला सामने आने के बीच कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश में सामने आया कथित फर्जी डॉक्टरों का मामला भी चर्चा में है। वहां पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।आरोपियों की पहचान डॉ. सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और अजय मौर्य के रूप में बताई गई थी।

जांच में सचिन यादव के पास BDS, राजपाल गौर के पास BHMS और अजय मौर्य के पास BSc की डिग्री होने की बात सामने आई, जबकि कथित तौर पर उन्होंने MBBS डिग्री के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी हासिल की थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में करीब पांच लाख रुपये खर्च कर फर्जी MBBS डिग्री तैयार कराने की बात कथित तौर पर बताई थी। उनके खिलाफ फर्जी डिग्री के साथ मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़े आरोप भी सामने आए थे।

एक तरफ फर्जी सीट, दूसरी तरफ फर्जी डॉक्टर

दोनों घटनाओं में परिस्थितियां अलग हैं और इनके बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। लेकिन दोनों मामले मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में दस्तावेजों की कठोर जांच और सत्यापन की जरूरत पर सवाल जरूर खड़े करते हैं।एक मामले में कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल करने का आरोप है, जबकि दूसरे में कथित फर्जी डिग्री के आधार पर चिकित्सा सेवा में प्रवेश लेने का मामला सामने आया।मेडिकल शिक्षा में एक गलत प्रमाणपत्र का असर केवल कागज पर नहीं पड़ता। MBBS सीट किसी छात्र के कई वर्षों के अध्ययन, प्रशिक्षण और अंततः मरीजों की जिम्मेदारी से जुड़ी होती है।

इसलिए प्रवेश से लेकर मेडिकल रजिस्ट्रेशन और सरकारी नियुक्ति तक हर स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

NSK विश्लेषण:

मेडिकल सीट से मरीज की जिंदगी तक

देहरादून की चार छात्राओं का दाखिला रद्द होना फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई का परिणाम है। पुलिस FIR के बाद मामले की कानूनी जांच अलग दिशा में आगे बढ़ेगी।

लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर सामने ला दिया है—क्या मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में प्रमाणपत्रों का सत्यापन दाखिले से पहले पर्याप्त रूप से किया जाता है?

अगर किसी दस्तावेज की वास्तविकता पर सवाल दाखिले के बाद सामने आता है तो नुकसान केवल संस्थान या प्रशासन का नहीं होता। उस सीट के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के अवसर पर भी इसका असर पड़ सकता है।

और जब इसी व्यापक क्षेत्र में फर्जी MBBS डिग्री के सहारे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में पहुंचने के मामले सामने आते हैं, तब चिंता और बढ़ जाती है।

इसलिए देहरादून की कार्रवाई को केवल चार दाखिले रद्द होने की घटना के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।

असली परीक्षा अब जांच की है—प्रमाणपत्र कहां से आए, सत्यापन में चूक कहां हुई, किसने इन्हें स्वीकार किया और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था?

इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि यह मामला केवल कुछ संदिग्ध प्रमाणपत्रों तक सीमित था या मेडिकल प्रवेश व्यवस्था की किसी बड़ी कमजोरी की तरफ इशारा करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *