बी के झा, एन एस के (NSK Delhi)
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चेन्नई,15 अक्टूबर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग अब तमिलनाडु की सियासत में विपक्षी एकजुटता की नई परीक्षा बनती दिखाई दे रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आज तमिलनाडु में सत्तारूढ़ थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK), कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल प्रदर्शन करेंगे।
‘लोकतंत्र बचाओ’ के नारे के साथ होने वाला यह प्रदर्शन केवल चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे तमिलनाडु में बीजेपी विरोधी राजनीतिक ताकतों के साझा मंच और उनकी रणनीतिक एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अनुसार, प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर करेंगे। इसमें कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की है। इसके साथ ही SIR की प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की तैयारी है।
विजय की TVK का पहला साझा आंदोलन, गठबंधन की एकजुटता की होगी परीक्षा
इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कड़ी थलपति विजय की पार्टी TVK की भागीदारी है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, TVK 3 अक्टूबर 2026 को इंडिया गठबंधन में शामिल हुई थी। गठबंधन में आने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर आयोजित साझा प्रदर्शन में उतरेगी।
फिल्मी लोकप्रियता के सहारे राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली TVK के लिए यह कदम गठबंधन की राजनीति में उसकी सक्रिय भूमिका का संकेत है। अब सवाल केवल इतना नहीं है कि पार्टी प्रदर्शन में कितनी ताकत दिखाती है, बल्कि यह भी है कि वह कांग्रेस और दूसरे सहयोगियों के साथ मिलकर साझा राजनीतिक मुद्दों पर कितनी दूर तक चलने को तैयार है।
कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर पहले ही TVK के गठबंधन में शामिल होने को तमिलनाडु में विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण बता चुके हैं। उनके अनुसार, विजय की पार्टी के आने से राज्य में इंडिया गठबंधन का विस्तार होगा और बीजेपी विरोधी मोर्चे को मजबूती मिलेगी। आज का प्रदर्शन इसी दावे को जमीन पर परखने का अवसर बन सकता है।
सातों घटक दलों की भागीदारी पर नजर
टैगोर ने TVK के गठबंधन में शामिल होने के अवसर पर घोषणा की थी कि SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े मुद्दों पर 15 अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु में इंडिया गठबंधन के सभी सात घटक दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही गई थी।सभी सहयोगी दलों की भागीदारी विपक्षी एकता का संदेश देने के लिहाज से अहम होगी। हालांकि, किसी भी राजनीतिक गठबंधन की वास्तविक मजबूती केवल संयुक्त मंच या साझा नारों से तय नहीं होती। उसकी परीक्षा इस बात से भी होती है कि अलग-अलग राजनीतिक हित रखने वाले दल संवैधानिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर कितनी संगति के साथ अपना पक्ष रखते हैं।SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच तमिलनाडु का यह प्रदर्शन विपक्ष को अपनी चिंताओं को एक मंच पर रखने का अवसर देगा। वहीं, चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग जैसे विषयों पर राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं को समझना भी जरूरी है।
विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरण, अब साथ-साथ सड़क पर सहयोगी
तमिलनाडु की राजनीति में इस प्रदर्शन का महत्व राज्य की सत्ता के समीकरणों से भी जुड़ा है। दिए गए विवरण के अनुसार, विजय की TVK ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी। सरकार बनाने के लिए उसे कांग्रेस का समर्थन लेना पड़ा।ऐसे में कांग्रेस और TVK का साझा प्रदर्शन सत्ता में सहयोग के बाद राजनीतिक मुद्दों पर साथ खड़े होने की एक और तस्वीर पेश करेगा। यह साझेदारी भविष्य में दोनों दलों के संबंधों और राज्य में विपक्षी राजनीति की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, इस साझा मंच को केवल राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।
प्रदर्शन के जरिए उठाए जाने वाले सवालों, उनकी संवैधानिक बुनियाद और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग पर भी ध्यान रहेगा। विपक्ष के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने विरोध को ठोस तर्कों और स्पष्ट मांगों के साथ जनता के सामने रखे।
अब निगाहें प्रदर्शन के संदेश पर
तमिलनाडु में होने वाला यह प्रदर्शन तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है—
पहला, SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां;
दूसरा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग; और तीसरा, विजय की TVK तथा कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों की साझा राजनीतिक सक्रियता।
आज की लामबंदी यह जरूर बताएगी कि विपक्ष अपने मुद्दों पर कितनी एकजुटता दिखा पाता है। लेकिन इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन के बाद उठाए गए सवालों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े विवादों पर जनता के सामने कितने ठोस तथ्य रखे जाते हैं।
तमिलनाडु की सड़कों पर आज का विरोध केवल एक दिन का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गठबंधन की एकजुटता और चुनावी व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को लेकर विपक्ष की रणनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
