ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी? SIR पर INDIA गठबंधन का महामंथन, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान से बड़े आंदोलन का ऐलान

बी के झा

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बी के झा नई दिल्ली, 30 सितंबर

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR को लेकर देश की राजनीति में जारी टकराव बुधवार को दिल्ली में विपक्षी दलों की एक अहम बैठक तक पहुंच गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोलते हुए SIR, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संविधान क्लब में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में CEC के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग की रणनीति, चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन और भविष्य की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के नेता तेजस्वी यादव, सुप्रिया सुले, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उद्धव ठाकरे वर्चुअली बैठक से जुड़े।

हालांकि, विपक्षी एकता की तस्वीर पूरी तरह एकजुट नजर नहीं आई। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में स्वयं शामिल नहीं हुए और उनकी ओर से दो सांसदों के शामिल होने की बात सामने आई। आम आदमी पार्टी और DMK ने भी बैठक से दूरी बनाई।

CEC को हटाने का प्रस्ताव एजेंडे में

बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव रखे जाने की बात सामने आई है। विपक्षी दलों ने इसे SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपने आरोपों से जोड़ते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा की।हालांकि, किसी संवैधानिक पदाधिकारी को हटाने की प्रक्रिया संसद और संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अधीन होती है। इसलिए बैठक में प्रस्ताव पर राजनीतिक सहमति बनना और उसके बाद वास्तविक संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होना दो अलग-अलग चरण हैं।

‘लाइफटाइम कानूनी छूट’ पर राहुल का सवाल

बैठक के बाद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित तौर पर ‘लाइफटाइम कानूनी छूट’ क्यों दी गई है।विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की मौजूदा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा।इन आरोपों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का पक्ष अलग रहा है तथा विपक्ष के दावों को राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित तथ्य या न्यायिक निष्कर्ष उन्हें प्रमाणित न करें।

1 नवंबर को रामलीला मैदान से आंदोलन की तैयारी

बैठक में INDIA गठबंधन की ओर से चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर आंदोलन का कार्यक्रम तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बताई गई है। इसके बाद मुंबई और कोलकाता में भी रैलियां आयोजित किए जाने की बात सामने आई है।विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल केवल किसी एक राज्य या चुनाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े हैं।

2023 के कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून में दी गई कानूनी सुरक्षा/प्रतिरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, INDIA गठबंधन इस प्रावधान को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। यह सुझाव वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से दिए जाने की बात सामने आई है।यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि किसी कानून को राजनीतिक रूप से चुनौती देना और उसके किसी प्रावधान को अदालत द्वारा असंवैधानिक घोषित करना अलग-अलग बातें हैं। प्रस्तावित याचिका पर न्यायालय का रुख आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।

ममता ने कहा- INDIA का कुनबा और बढ़ना चाहिए

बैठक में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी गठबंधन का विस्तार करने की जरूरत पर जोर दिया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने सुझाव दिया कि BJD जैसी पार्टियों से भी संवाद किया जाना चाहिए।ममता ने कथित तौर पर कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में विपक्षी दलों को ज्यादा व्यापक मंच तैयार करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने BJD के एक नेता से बातचीत की है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब बैठक में शामिल दलों की संख्या और विपक्षी गठबंधन की वास्तविक संरचना को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है।

खड़गे ने बैलेट पेपर की फिर उठाई मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भविष्य के चुनावों में EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की वकालत की। उन्होंने SIR से पहले वाली मतदाता सूची के इस्तेमाल की मांग भी उठाई।खरगे ने विपक्षी दलों से एकजुट होकर साझा एक्शन प्लान तैयार करने का आह्वान किया। कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

वहीं, EVM की विश्वसनीयता को लेकर चुनाव आयोग लगातार अपने पक्ष में तकनीकी और प्रक्रियागत तर्क देता रहा है। इसलिए बैलेट बनाम EVM की बहस अब विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक विवाद का एक प्रमुख हिस्सा बन गई है।

जितेंद्र आव्हाड ने महाराष्ट्र के मतदान आंकड़ों पर उठाए सवाल

NCP (SP) नेता जितेंद्र आव्हाड ने बैठक के बाद महाराष्ट्र के मतदान प्रतिशत में अलग-अलग समय पर हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने EVM हटाकर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग दोहराई। हालांकि, मतदान प्रतिशत में समय के साथ बदलाव अपने आप में किसी चुनावी अनियमितता का प्रमाण नहीं होता। ऐसे दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक मतदान आंकड़ों और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े प्रमाणों की जांच जरूरी होती है।

विपक्षी एकता पर BJP का पलटवार

INDIA गठबंधन की बैठक पर BJP ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने गठबंधन की एकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि INDIA गठबंधन के पास न स्पष्ट संगठनात्मक ढांचा है और न स्थायी नेतृत्व।

वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर विपक्षी दलों में कथित असहमति का मुद्दा उठाया और कहा कि कई बड़े नेता बैठक से दूर रहे।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बैठक से पहले कहा कि विपक्ष का एकजुट रहना भाजपा के लिए चिंता का विषय है।

जयराम रमेश बोले- संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष एकजुट

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस, SP, TMC, NCP (SP), शिवसेना (UBT), RJD, वाम दलों, JMM, JKNC, PDP समेत कई विपक्षी दल संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के मुद्दे पर एक साथ हैं।उनका आरोप है कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए चुनाव आयोग के जरिए ‘वोट चोरी’ की कोशिश कर रही है। यह कांग्रेस और विपक्ष का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग और सरकार स्वीकार नहीं करते।

विपक्ष के सामने चुनौती सिर्फ आंदोलन की नहीं, एकजुटता की भी

INDIA गठबंधन की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने देशव्यापी राजनीतिक अभियान का संकेत दिया है। एक तरफ विपक्ष CEC के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई, न्यायिक चुनौती और जन आंदोलन की रणनीति पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ बैठक से कुछ प्रमुख सहयोगी दलों की अनुपस्थिति गठबंधन की आंतरिक राजनीति को भी चर्चा के केंद्र में ले आई है।

अब असली परीक्षा यह होगी कि SIR के विरोध और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर विपक्ष अपने अलग-अलग राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर कितनी देर तक साझा रणनीति बनाए रख पाता है।

1 नवंबर की प्रस्तावित रामलीला मैदान रैली इस राजनीतिक अभियान का अगला बड़ा पड़ाव होगी।

उसके बाद मुंबई और कोलकाता में प्रस्तावित कार्यक्रम यह तय करेंगे कि दिल्ली की बैठक में बनी रणनीति राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन में कितना रूप लेती है।

एन एस के विशेष, बी के झा

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