बी के झा
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नई दिल्ली / वॉशिंगटन डीसी,26 सितंबर
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान टकराव के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की रणनीतिक दिशा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को कथित तौर पर खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर शुरू हो सकती है।
अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिशों के बीच सैन्य विकल्प की वापसी का संकेत माना जाएगा। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ट्रंप की ओर से इस रिपोर्ट में किए गए प्रत्येक दावे की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
UN में ट्रंप ने दिया था ‘समझौता या तबाही’ का संदेश
इस रिपोर्ट को ट्रंप के 22 सितंबर के संयुक्त राष्ट्र महासभा भाषण के संदर्भ में देखा जा रहा है। ट्रंप ने ईरान को लेकर कहा था कि उनके सामने एक बड़ा फैसला है—ईरान के साथ ऐसा समझौता करना जिससे वह दोबारा मजबूत हो सके या इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म करने की कार्रवाई करना।ट्रंप ने साथ ही कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के साथ समझौता हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।यानी एक तरफ ट्रंप कूटनीतिक समझौते की संभावना की बात कर रहे थे और दूसरी तरफ सैन्य विकल्प को खुला रख रहे थे।
अब WSJ की रिपोर्ट ने इसी दोहरे दबाव की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।ईरान ने अमेरिका के सामने रखा 7 दिन का रोडमैप
दूसरी तरफ ईरान ने बातचीत का रास्ता बंद करने के बजाय सात दिन का एक प्रस्ताव अमेरिका के सामने रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, यह योजना मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई गई है।प्रस्ताव के अनुसार, यदि अमेरिका कुछ निर्धारित शर्तें स्वीकार करता है, तो सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जा सकता है और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू हो सकती है।ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव जून में दोनों पक्षों के बीच बनी समझ की शर्तों से जुड़ा हुआ है।
तेहरान का संदेश साफ है—यदि सैन्य दबाव और आर्थिक नाकेबंदी में कमी आती है तो बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकता है।
होर्मुज क्यों है इतनी बड़ी कुंजी?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का मुद्दा नहीं है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इस जलमार्ग से गुजरने वाली तेल और गैस आपूर्ति में किसी भी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।यही वजह है कि ईरान के सात दिन के प्रस्ताव में होर्मुज को दोबारा खोलने की पेशकश को महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी में राहत और युद्धविराम जैसी शर्तों के बदले ईरान ने जलमार्ग को सामान्य बनाने की बात कही है।
ईरान बोला- बातचीत चाहते हैं, लेकिन शर्तों पर
अराघची ने कहा है कि ईरान ने अमेरिका को कूटनीति आगे बढ़ाने के लिए अपनी शर्तों और जरूरतों से अवगत करा दिया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए अमेरिकी सैन्य दबाव और आक्रामक कार्रवाई को समाप्त करना जरूरी है।तेहरान लगातार यह भी कह रहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा मतभेद यही है कि बातचीत किस क्रम में होगी और सैन्य एवं आर्थिक दबाव में कितनी राहत पहले दी जाएगी।
पेजेश्कियन का आरोप- अमेरिका ने खुद तोड़ा रास्ता
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी अमेरिका पर बातचीत की प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले समझ बनी थी और ईरान उसके आधार पर आगे बढ़ने को तैयार था, लेकिन बाद की अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई ने उस प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया।ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि बातचीत के दौरान सैन्य कार्रवाई होने से आपसी विश्वास को गहरा नुकसान पहुंचा। अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अलग दृष्टिकोण रखा जाता रहा है।
अब असली सवाल- युद्ध या बातचीत?
पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। एक ओर ईरान सात दिन में होर्मुज खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव दे रहा है, तो दूसरी ओर Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और मिडटर्म चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने की संभावना पर अपने सहयोगियों से बात की है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने स्वयं संयुक्त राष्ट्र में यह कहा था कि वह ईरान के साथ समझौते की संभावना देखते हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति को तत्काल युद्ध की अंतिम घोषणा के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल गेंद दोनों पक्षों के पाले में है—तेहरान कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात कर रहा है और वॉशिंगटन की ओर से सैन्य दबाव के साथ समझौते की संभावना भी बनी हुई है।
आने वाले दिनों में यह तय होगा कि सात दिन का ईरानी रोडमैप बातचीत की मेज तक पहुंचता है या पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।
