बी के झा – एन एस के
NSK news India


नई दिल्ली, 28 अक्टूबर
दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया है। राहुल गांधी बुधवार दोपहर दो बजे भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात करने जामिया जाने वाले थे। हालांकि, अब उनका यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। उनके दौरे के रद्द होने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
जामिया में छात्र संघ की बहाली और चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलन के केंद्र में केवल चुनाव कराने की मांग नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी, छात्र नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रशासन की जवाबदेही जैसे सवाल भी हैं।
18 साल से छात्र संघ पर ताला, प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) 18 साल से भी अधिक समय से बंद या निलंबित है। उनका कहना है कि इतने लंबे समय से निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व का अभाव होने के कारण विद्यार्थियों के पास अपनी समस्याओं को संगठित तरीके से उठाने और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए लोकतांत्रिक मंच नहीं है।
छात्रों का तर्क है कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई और परीक्षाओं तक सीमित व्यवस्था नहीं है। यह वह स्थान भी है, जहां विद्यार्थियों को अपने अधिकारों, समस्याओं और विचारों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में छात्र संघ की बहाली का मुद्दा उनके लिए महज चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व और भागीदारी से जुड़ा सवाल बन गया है।
चुनाव कराने का भरोसा, लेकिन तारीख पर सस्पेंस
विरोध प्रदर्शन की मौजूदा लहर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र संघ के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के फैसले के बाद तेज हुई। छात्रों के अनुसार, प्रशासन ने नए संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराने की बात कही है। लेकिन चुनाव की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट एवं बाध्यकारी समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।यही अनिश्चितता छात्रों की नाराजगी की प्रमुख वजह है।
उन्हें आशंका है कि यदि चुनाव की समय-सीमा तय नहीं की गई, तो मतदान की प्रक्रिया लंबे समय तक टल सकती है।प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल आश्वासन देने के बजाय चुनाव का स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करे। उनका कहना है कि संविधान तैयार करने से लेकर चुनाव कराने तक की पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें देरी की गुंजाइश न रहे।

छात्र नेताओं पर कार्रवाई से भी बढ़ा विवाद
जामिया में जारी आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई है। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं को जारी कारण बताओ नोटिस और उनके निलंबन वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि चुनाव की मांग उठाने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई से उनकी चिंताएं और बढ़ी हैं। वे चाहते हैं कि प्रशासन आंदोलन में शामिल छात्रों को कार्रवाई से सुरक्षा देने की गारंटी दे और छात्र नेताओं के खिलाफ उठाए गए कदमों पर पुनर्विचार करे।
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक चुनाव की निश्चित समयसीमा घोषित नहीं होती और आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों को कार्रवाई से सुरक्षा देने का भरोसा नहीं मिलता, तब तक भूख हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी।
राहुल गांधी के दौरे पर नजर, आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
राहुल गांधी के प्रस्तावित जामिया दौरे को लेकर अब उनका कार्यक्रम रद्द होने के बाद राजनीतिक और छात्र हलकों में आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी। हालांकि, दौरा रद्द होने के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसके राजनीतिक निहितार्थों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल, जामिया का विवाद विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच संवाद, छात्र संघ की बहाली तथा चुनाव की समयसीमा जैसे सवालों पर केंद्रित है। छात्रों की मांग है कि प्रशासन इस मामले में स्पष्ट निर्णय ले और चुनाव की प्रक्रिया को अनिश्चितता से बाहर निकाले।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और छात्र संघ चुनाव को लेकर कोई ठोस समयसीमा सामने आती है या नहीं।
फिलहाल भूख हड़ताल जारी है और छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
एन एस के – नई दिल्ली
