बी के झा
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कौशांबी,(उत्तर प्रदेश) 1 सितंबर
पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद कौशांबी पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। हादसे में 11 लोगों की मौत के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। तड़के करीब चार बजे चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास हुई मुठभेड़ में नौशाद के पैर में गोली लगी। घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस के अनुसार, नौशाद भागने की कोशिश में था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तेरह मील गांव के पास घेराबंदी की। पुलिस का दावा है कि रोकने की कोशिश करने पर आरोपी ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद करने का दावा किया है। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री कहां से आई और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे।
11 मौतों के बाद पुलिस महकमे में भी कार्रवाई
हादसे ने सिर्फ पटाखा कारोबार की निगरानी व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है। लापरवाही के आरोपों के बीच पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। चौकी प्रभारी चायल अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को भी लाइन हाजिर किया गया है। वहीं बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के पीछे सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की जानकारी थी, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब जांच में पुलिस की भूमिका और निगरानी तंत्र की भी पड़ताल की जा रही है।
विस्फोट ने मचा दी थी तबाही
सोमवार को महमूदपुर मनौरी कस्बे में पटाखा फैक्ट्री में लगी आग ने कुछ ही देर में भयावह रूप ले लिया। इसके बाद हुए जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और कुछ घर मलबे में तब्दील हो गए। हादसे में बच्चों और महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
इस घटना ने घनी आबादी के बीच पटाखों और विस्फोटक सामग्री के कथित अवैध भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छह लोगों के खिलाफ FIR, परिवार भी जांच के घेरे में
पिपरी पुलिस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। FIR में नौशाद, शकील, उसके बेटे आदिल, पत्नी शबाना, कहकशा और बेटी शाइना को नामजद कियाउ गया है। पुलिस ने शबाना और शाइना को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने चार टीमें गठित की हैं।ई नौशाद की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य नामजद आरोपियों की तलाश और पूछताछ पर पुलिस का फोकस है।
‘आदिल डीजे’ के नाम पर चल रही थी फैक्ट्री?
जांच में यह बात सामने आई है कि नौशाद कथित तौर पर अपने बेटे आदिल के नाम से ‘आदिल डीजे’ के नाम पर पटाखा फैक्ट्री संचालित कर रहा था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि करीब दो वर्ष पहले जिला प्रशासन ने फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बावजूद इसके दोबारा चोरी-छिपे संचालित किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
हालांकि, फैक्ट्री के लाइसेंस और उसके संचालन की वैधता को लेकर जिला प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए अब लाइसेंस, अनुमति, विस्फोटक सामग्री के भंडारण और खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज अहम सबूत बन गए हैं।
घर में छिपाकर रखा था विस्फोटक? बुलडोजर से ढहाया मकान
हादसे के बाद प्रशासन ने घनी आबादी में विस्फोटक सामग्री के कथित अवैध भंडारण के खिलाफ भी अभियान छेड़ दिया है। मनौरी कस्बे में एक मकान से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद उसे सुरक्षित तरीके से दो DCM वाहनों में लोड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।इसके बाद प्रशासन ने संबंधित मकान पर बुलडोजर चला दिया। कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि प्रशासन अब हादसे के कारणों की जांच के साथ-साथ उन संभावित ठिकानों को भी खंगाल रहा है, जहां आबादी के बीच विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखे जाने की आशंका है।
ATS की एंट्री से बढ़ा जांच का दायरा
कौशांबी ब्लास्ट की जांच अब स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रह गई है। मामले में ATS भी सक्रिय हो गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री तक इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कैसे पहुंची, उसे कहां से खरीदा गया, भंडारण के लिए किन नियमों का पालन किया गया और इस पूरे कारोबार से जुड़े लोगों का नेटवर्क कितना बड़ा है।
बड़ा सवाल: सिर्फ फैक्ट्री या पूरा नेटवर्क?
कौशांबी की इस भयावह घटना ने एक बेहद गंभीर सवाल सामने खड़ा कर दिया है—
क्या यह महज एक लापरवाही से हुआ हादसा था या इसके पीछे नियमों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा कोई बड़ा अवैध नेटवर्क था?
11 मौतों के बाद अब जांच का असली केंद्र सिर्फ यह नहीं है कि धमाका कैसे हुआ, बल्कि यह भी है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री वहां पहुंची कैसे, उसे रखने की अनुमति किसने दी और निगरानी तंत्र आखिर इतने लंबे समय तक सोते क्यों रहा।
नौशाद की गिरफ्तारी और पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई के बाद अब निगाहें ATS और प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।
अगर जांच में अवैध भंडारण या किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो कौशांबी का यह हादसा सिर्फ एक फैक्ट्री विस्फोट नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का मामला बन सकता है।
