मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें तेज! 23-24 सितंबर को मंत्रियों की ‘क्लास’, PM मोदी के सामने होगा रिपोर्ट कार्ड? सवाल—सिर्फ समीक्षा होगी या इसके बाद बदलेगी मोदी टीम की तस्वीर?

बी के झा

NSK news India

बी के झा

नई दिल्ली, 18 सितंबर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के बीच केंद्रीय मंत्रियों के कामकाज और सरकार की आगे की दिशा पर बड़े मंथन की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ होने जा रही है। इसमें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे और शासन व्यवस्था, नीति-निर्माण, सुधारों तथा सरकार की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक, सभी कैबिनेट मंत्रियों को अगले सप्ताह दिल्ली में रहने और बैठक की तैयारी करने को कहा गया है।बैठक की घोषणा होते ही राजनीतिक गलियारों में एक दूसरा सवाल भी तेजी से घूमने लगा है—

क्या प्रधानमंत्री मोदी सरकार की कार्यप्रणाली की समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में भी बदलाव करेंगे?

अभी इसका जवाब किसी के पास आधिकारिक तौर पर नहीं है। सरकार ने कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। लेकिन बैठक की टाइमिंग, सभी कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी और सरकार के तीसरे कार्यकाल के मध्य में होने वाले इस व्यापक मंथन ने अटकलों को जरूर हवा दे दी है।

‘चिंतन’ सिर्फ बैठक नहीं, सरकार के अगले चरण की रूपरेखा?

रिपोर्टों के मुताबिक, यह सामान्य कैबिनेट बैठक से अलग प्रारूप में होगी। मंत्रियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर शासन व्यवस्था, संवाद, समन्वय, सुधार और नीति क्रियान्वयन जैसे विषयों पर चर्चा कराई जा सकती है। कुछ मंत्रालय अपनी योजनाओं और अब तक के कामकाज पर प्रस्तुतीकरण भी दे सकते हैं।

यानी इस बैठक में सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि सरकार ने क्या तय किया, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि तय की गई नीतियां जमीन पर कितनी तेजी और प्रभाव के साथ पहुंचीं।योजनाओं की प्रगति, मंत्रालयों के बीच तालमेल, समय प्रबंधन, जनसेवाओं की डिलीवरी और सुधारों को लागू करने की गति जैसे विषय बैठक के केंद्र में रहने की संभावना है।

प्रधानमंत्री के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार अब अपने तीसरे कार्यकाल के मध्य बिंदु की ओर बढ़ रही है। अगले चरण में किन नीतियों को गति दी जाए, किन क्षेत्रों में प्रशासनिक सुधार की जरूरत है और सरकार की प्राथमिकताओं को किस तरह अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए—इन सवालों पर मंथन हो सकता है।

मंत्रियों के समूह क्यों बनाए जा रहे हैं?

इस बैठक का सबसे दिलचस्प पहलू इसका समूह आधारित प्रारूप बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रियों के छोटे-छोटे समूह बनाकर उन्हें अलग-अलग विषयों पर चर्चा करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।इसका एक मतलब यह भी है कि सरकार सिर्फ ऊपर से निर्देश देने के बजाय अलग-अलग मंत्रालयों के अनुभवों और सुझावों को एक साझा मंच पर लाने की कोशिश कर रही है।एक समूह प्रशासनिक सुधार पर बात कर सकता है तो दूसरा सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर।

कहीं जनसंचार और सरकार के संदेश को जनता तक पहुंचाने पर चर्चा हो सकती है तो कहीं मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय पर।यानी दो दिनों का यह मंथन सरकार के अगले चरण का प्रशासनिक ब्लूप्रिंट तैयार करने की कवायद भी बन सकता है।

लेकिन सियासी सवाल इससे बड़ा है—क्या मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड बनेगा?

यहीं से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा शुरू होती है।केंद्र में लंबे समय से समय-समय पर मंत्रियों के प्रदर्शन, मंत्रालयों के कामकाज और भविष्य की राजनीतिक-प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार बदलाव की अटकलें लगती रही हैं। अब जब प्रधानमंत्री खुद सभी कैबिनेट मंत्रियों के साथ दो दिन बैठने जा रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहा है कि क्या इस दौरान मंत्रियों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा भी होगी।यदि किसी मंत्रालय की योजनाओं की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, किसी विभाग में समन्वय की समस्या है या सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप नई जिम्मेदारियों की जरूरत महसूस होती है, तो भविष्य में बदलाव की संभावना पर चर्चा होना असामान्य नहीं होगा।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है—अभी तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि 23-24 सितंबर की बैठक के बाद कैबिनेट फेरबदल निश्चित है।सरकार की तरफ से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट पर निगाहें

कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को इसलिए भी हवा मिली है क्योंकि हाल में बीजेपी संगठन में बदलाव हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब सरकार और संगठन के बीच अगले चरण के तालमेल पर है।मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सहयोगी दलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बने मंत्रिपरिषद में बीजेपी के साथ एनडीए के सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व मिला था। ऐसे में यदि भविष्य में कोई बदलाव होता है तो उसका प्रशासनिक पहलू ही नहीं, बल्कि गठबंधन का राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होगा।

आखिरी बड़ा फेरबदल कब हुआ था?

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 7 जुलाई 2021 को बड़ा मंत्रिमंडलीय फेरबदल हुआ था। उस समय कई नए चेहरे सरकार में शामिल किए गए और कई मंत्रालयों में जिम्मेदारियां बदली गई थीं। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति में उस समय हुए विभागीय आवंटन का विवरण दर्ज है।इसके बाद अलग-अलग मौकों पर कुछ मंत्रियों के इस्तीफे और विभागों में बदलाव हुए।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और नई मंत्रिपरिषद का गठन हुआ।इसलिए मौजूदा तीसरे कार्यकाल में अब तक किसी बड़े औपचारिक कैबिनेट फेरबदल की घोषणा नहीं हुई है।

विपक्ष ने बैठक को लेकर साधा निशाना

बैठक की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर राजनीतिक हमला भी किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘चिंतन बैठक’ को तंज कसते हुए ‘चिंता बैठक’ कहा और सरकार से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी का मुद्दा भी उठाया।

विपक्ष की इस प्रतिक्रिया को राजनीतिक आलोचना के रूप में देखा जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से बैठक का घोषित एजेंडा मुख्य रूप से शासन, नीति-निर्माण और सुधारों पर केंद्रित बताया गया है।

असली परीक्षा बैठक के बाद शुरू होगी

दो दिन की बैठक में क्या चर्चा होती है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि उस चर्चा का परिणाम क्या निकलता है।

क्या मंत्रालयों को नई समयसीमा मिलेगी?

क्या योजनाओं की निगरानी का तरीका बदलेगा?

क्या मंत्रालयों के बीच समन्वय का नया ढांचा बनेगा?

क्या सरकार कुछ नई प्राथमिकताओं को गति देगी?

और सबसे अहम—क्या आने वाले समय में मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव दिखाई देगा?

इन सवालों का जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है।

एनएसके विश्लेषण

प्रधानमंत्री मोदी की 23-24 सितंबर की चिंतन बैठक को केवल एक नियमित सरकारी बैठक मानना भी जल्दबाजी होगी और इसे सीधे कैबिनेट फेरबदल की भूमिका घोषित करना भी।तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री ने सभी कैबिनेट मंत्रियों को दो दिन के व्यापक मंथन के लिए बुलाया है। तथ्य यह भी है कि बैठक में शासन, सुधार, नीति-क्रियान्वयन और सरकार की आगामी प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।

लेकिन कैबिनेट फेरबदल की पुष्टि अभी नहीं हुई है।फिर भी राजनीति में टाइमिंग का अपना महत्व होता है।सरकार के तीसरे कार्यकाल के मध्य में होने वाली यह बैठक यदि केवल विचार-विमर्श तक सीमित रहती है तो इसका परिणाम प्रशासनिक सुधारों के रूप में सामने आ सकता है।

लेकिन यदि इसके बाद मंत्रियों के विभाग बदलते हैं, नए चेहरे सामने आते हैं या जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास होता है, तो यही दो दिवसीय चिंतन बैठक मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के अगले राजनीतिक-प्रशासनिक अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जाएगी।

फिलहाल निगाहें 23 और 24 सितंबर पर हैं—क्योंकि इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं कि मंत्री क्या रिपोर्ट देंगे, बल्कि यह भी है कि प्रधानमंत्री उस रिपोर्ट के बाद क्या फैसला लेते हैं।

बी. के. झा

एनएसके न्यूज इंडिया

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