बी के झा
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काठमांडू / न ई दिल्ली, 29 अगस्त
नेपाल में आसमान से उतरी आफत अब सिर्फ तबाही की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि हर गुजरते घंटे के साथ एक नए खतरे का चेहरा सामने आ रहा है। विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने अब तक करीब 600 लोगों की जान ले ली है, जबकि लगभग 2,000 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है।
इनमें करीब 320 भारतीय नागरिक शामिल हैं, जिनसे संपर्क स्थापित करने के लिए भारतीय एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं।
सबसे भयावह बात यह है कि एक ओर राहत और बचाव दल मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं, तो दूसरी ओर नेपाल-चीन सीमा के तिब्बती इलाके में बनी एक कृत्रिम झील से पानी के ओवरफ्लो होने की खबर ने नई चिंता पैदा कर दी है। पानी का दबाव बढ़ने से भोटे कोशी नदी का जलस्तर ऊपर जा रहा है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मौत के मलबे में जिंदगी की तलाश
नेपाल की सेना और पुलिस ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। हजारों सुरक्षाकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और मलबे, सुरंगों तथा दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान जारी है।नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के मुताबिक, खोज एवं बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं और अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम भी जारी है।लेकिन पहाड़ों के बीच आई इस आपदा ने बचाव अभियान को बेहद कठिन बना दिया है। कई इलाकों में सड़कें और संपर्क मार्ग तबाह हैं, जबकि हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगें पानी और मलबे से भर गई हैं।
त्रिशूली हाइड्रो प्रोजेक्ट में फंसी जिंदगियां
बचींरसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर परियोजना के आसपास चलाए गए अभियान में बड़ी सफलता मिली है। नेपाल की सेना और पुलिस की संयुक्त टीमों ने परियोजना से जुड़े 63 कर्मचारियों समेत कुल 84 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।इन 84 लोगों में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित भारत वापस पहुंचाया गया है।यह ऑपरेशन इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि फ्लैश फ्लड के बाद परियोजना की सुरंगों और आसपास के क्षेत्रों में पानी और मलबा भर गया था। कई जगह बचाव दलों के लिए पहुंचना तक मुश्किल हो गया था।
320 भारतीयों से संपर्क नहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रियों की भी चिंता
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें कई लोगों के कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने की जानकारी सामने आई है।भारत सरकार नेपाल और चीन, दोनों देशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की सीमा की ओर फंसे करीब 400 भारतीय नागरिक फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
यानी इस आपदा में भारत के लिए चुनौती दोहरी है—-नेपाल में लापता नागरिकों की तलाश और चीन के तिब्बती हिस्से में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा।
77 तीर्थयात्री लापता, 19 देशों के नागरिक शामिल
आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तिब्बत में चीन-नेपाल सीमा के पास सैलाब की चपेट में आए ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यीय तीर्थयात्री दल से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है।ईशा फाउंडेशन की समूह समन्वयक मां गंभीरी के मुताबिक, दल में 19 देशों के नागरिक शामिल थे। पिछले दो दिनों से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
बचाव दल मौके पर मौजूद हैं, लेकिन अभी तक लापता तीर्थयात्रियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।समूह की ओर से भारत, चीन और नेपाल के संबंधित दूतावासों तथा विभिन्न सरकारी कार्यालयों और मंत्रालयों से संपर्क किया गया है।ईशा फाउंडेशन के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जियारोंग जाकर राहत कार्य में मदद करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिल सकी।
तिब्बत की कृत्रिम झील बनी नई चिंता
नेपाल की तबाही के बीच अब सबसे बड़ी चिंता नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत के दोभाल क्षेत्र में बनी कृत्रिम झील को लेकर है। यहां से पानी के लगातार ओवरफ्लो होने की खबरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।पानी बढ़ने का सीधा असर भोटे कोशी नदी पर पड़ रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे इलाकों और निचले क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
यानी जिस नेपाल ने अभी पहली बाढ़ की तबाही का हिसाब भी पूरा नहीं किया है, उसके सामने दूसरी जल आपदा का खतरा खड़ा हो गया है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में मुश्किलों को देखते हुए भारत ने रेस्क्यू टीम और तकनीकी सामग्री नेपाल भेजी है।विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत नेपाल के राहत एवं बचाव अभियान में हरसंभव सहयोग कर रहा है।भारत की मदद सिर्फ सरकारी स्तर तक सीमित नहीं है। विभिन्न राज्यों की सरकारें भी अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए नेपाल प्रशासन और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर रही हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नेपाल में फंसे कर्नाटक के नागरिकों से बात की और उन्हें सुरक्षित घर लौटाने का भरोसा दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दिल्ली पहुंचने वाले कर्नाटक के नागरिकों के ठहरने की समुचित व्यवस्था की जाए।
चीन की सूचना व्यवस्था पर भी सवाल
नेपाल में तबाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन तिब्बत के चीनी हिस्से में हुए नुकसान की पूरी तस्वीर अब भी साफ नहीं है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत से आने वाली सूचनाओं पर चीन के कड़े नियंत्रण के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा के चीनी हिस्से में बाढ़ से हुए नुकसान का स्वतंत्र आकलन मुश्किल हो रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है, जबकि चीन की ओर से अपेक्षाकृत कम मौतों की जानकारी सामने आई है।चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को बचाव अभियान तेज करने और लापता लोगों की तलाश करने का निर्देश दिया है, जबकि प्रधानमंत्री ली कियांग को प्रभावित क्षेत्र में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।‘
विदेशी मदद ठुकराने’ की बात को नेपाल ने बताया भ्रामक
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने उन दावों को भ्रामक बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि नेपाल ने विदेशी सहायता लेने से इनकार कर दिया है।उन्होंने कहा कि राहत और बचाव के लिए जरूरी सहयोग और सामग्री को लेकर भारत, चीन तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब नेपाल को बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत है और दुर्गम इलाकों तक राहत पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
एक तरफ मलबा, दूसरी तरफ मंडराता नया सैलाब
नेपाल की त्रासदी का सबसे भयावह पहलू यही है कि बचाव दल अभी पहली आपदा के घावों पर मरहम भी नहीं लगा पाए हैं और दूसरी आपदा का खतरा सिर पर मंडराने लगा है।
करीब 600 मौतें, हजारों लापता लोग, 320 भारतीयों से संपर्क टूटना, 77 तीर्थयात्रियों की अनिश्चित स्थिति और भोटे कोशी में बढ़ता पानी—
ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की बेचैनी की तस्वीर हैं जो अपनों की एक खबर का इंतजार कर रहे हैं।
पहाड़ों में आई इस जल तबाही ने नेपाल के सामने एक बेहद कठिन सवाल खड़ा कर दिया है—क्या मलबे के नीचे जिंदगी तलाशने का अभियान खत्म होने से पहले ही एक और सैलाब नई तबाही लिख देगा?
फिलहाल नेपाल की नजर आसमान से लेकर नदियों तक है। सेना और पुलिस मोर्चे पर हैं, भारत मदद के लिए आगे खड़ा है और हजारों परिवार अपने प्रियजनों की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।
