लेह-लद्दाख में सुबह-सुबह कांपी धरती, 5.5 तीव्रता के भूकंप से मची दहशत; कुछ घंटे बाद फिर हिली जमीन

बी के झा

NSK news Ind

लेह/लद्दाख, 13 अगस्त

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में गुरुवार की सुबह धरती के दो बार डोलने से लोगों में दहशत फैल गई। लेह और आसपास के इलाकों में कुछ ही घंटों के अंतराल पर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। पहले झटके की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 रही, जबकि दूसरे भूकंप की तीव्रता 4.3 दर्ज की गई। झटकों के बाद कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए।

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, पहला भूकंप 13 अगस्त की सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर आया। इसकी गहराई जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर थी। सुबह का वक्त होने के कारण कई लोग उस समय नींद में थे। अचानक घरों के हिलने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे।इसके करीब चार घंटे बाद सुबह 9 बजकर 54 मिनट पर एक बार फिर धरती कांपी।

दूसरे भूकंप की तीव्रता 4.3 और गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई है। लगातार दो झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

नींद से जागे लोग, सड़कों पर दिखी भीड़

पहले भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई लोगों ने नींद में ही घर को हिलता महसूस किया। अचानक आए कंपन और शोर से लोग घबरा गए। कई परिवार एहतियात के तौर पर घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए।स्थानीय लोगों में संभावित आफ्टरशॉक्स को लेकर भी डर बना हुआ है। हालांकि, अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।

गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में भी भूकंपीय हलचल

भूकंप का केंद्र गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के आसपास बताया जा रहा है। कम गहराई पर आए इन झटकों का असर कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों में भी महसूस किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता के साथ-साथ उसकी गहराई और स्थानीय निर्माण की गुणवत्ता भी नुकसान की गंभीरता तय करने में अहम भूमिका निभाती है।

5.5 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?

रिक्टर स्केल पर 5 से 5.9 तीव्रता वाले भूकंप को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे भूकंप के झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं और कमजोर या पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

वहीं, 4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप भी लोगों को स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं, हालांकि नुकसान की संभावना परिस्थितियों पर निर्भर करती है।भूकंप की तीव्रता बढ़ने के साथ संभावित नुकसान भी बढ़ता जाता है। 7 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप व्यापक स्तर पर भारी तबाही मचाने की क्षमता रखते हैं।

भूकंप के बाद क्यों जरूरी है सतर्कता?

लगातार दो झटकों के बाद लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। भूकंप के बाद आफ्टरशॉक्स आ सकते हैं, इसलिए क्षतिग्रस्त इमारतों के भीतर जाने से बचना चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

फिलहाल लेह-लद्दाख में स्थिति पर नजर बनी हुई है और किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक सूचना का इंतजार है।

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