बी के झा
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पटना/बिहटा, 30 अगस्त
पटना से सटे बिहटा का परेव घाट रविवार की सुबह अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। गंगा किनारे बालू के अवैध कारोबार और नाविकों से कथित रंगदारी वसूली की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम का सामना हथियारबंद अपराधियों से हो गया। देखते ही देखते दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई और नदी का किनारा मुठभेड़ के मैदान में बदल गया।
पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में कुख्यात अपराधी अनीश कुमार के पैर में गोली लगी। घायल होने के बाद वह पुलिस से बचने के लिए गंगा में कूद गया, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे और उसके साथी पीयूष कुमार को गिरफ्तार कर लिया।मुठभेड़ में बिहटा थाने के सब इंस्पेक्टर राजू कुमार सिंह के हाथ को गोली छूती हुई निकल गई, जिससे वह घायल हो गए।
बिहटा थाना प्रभारी अमित कुमार के भी घायल होने की सूचना है
पुलिस ने मौके से एक देसी रायफल, एक देसी कार्बाइन, दो देसी पिस्टल, एक देसी कट्टा और करीब 25 राउंड गोलियां बरामद करने का दावा किया है।यह मुठभेड़ सिर्फ दो अपराधियों की गिरफ्तारी की कहानी नहीं है। इसके पीछे बालू के अवैध कारोबार, नाविकों से रंगदारी, हथियारों के दम पर नदी क्षेत्र में वर्चस्व और पटना के आसपास सक्रिय संगठित अपराध की बड़ी तस्वीर दिखाई देती है।
सूचना मिली थी, नाविकों से रंगदारी वसूलने पहुंच रहा था गिरोह
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि हथियारबंद अपराधी बालू ढोने वाले नाविकों से रंगदारी वसूलने के लिए परेव घाट की ओर पहुंच रहे हैं।सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तैयार की गई।पुलिस जब मौके पर पहुंची तो अपराधियों ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।
एसएसपी के मुताबिक अपराधियों की ओर से करीब 40 राउंड फायरिंग की गई, जबकि पुलिस ने जवाब में 22 राउंड गोलियां चलाईं।फायरिंग के बीच अनीश के पैर में गोली लगी। घायल होने के बाद उसने नदी में छलांग लगा दी। पुलिस ने पीछा किया और आखिरकार उसे पानी के बीच से गिरफ्तार कर लिया। यह घटनाक्रम बताता है कि अपराधियों को पुलिस की मौजूदगी का अंदाजा होने के बाद भी वे पीछे हटने के बजाय सीधे फायरिंग पर उतर आए।
पुलिस पर गोली चली, SI की बांह को छूकर निकली गोली
मुठभेड़ में पुलिसकर्मियों की जान भी खतरे में पड़ गई।सब इंस्पेक्टर राजू कुमार सिंह की बांह को गोली छूती हुई निकल गई और वह घायल हो गए। बिहटा थाना प्रभारी अमित कुमार के भी घायल होने की सूचना है।यानी पुलिस और अपराधियों के बीच हुई यह भिड़ंत महज औपचारिक कार्रवाई नहीं थी। दोनों तरफ से वास्तविक गोलीबारी हुई।
घटना की जानकारी मिलते ही पटना पश्चिमी सिटी एसपी संकेत कुमार, दानापुर डीएसपी-2 अमरेंद्र कुमार झा समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा।इसके बाद पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चलाया गया।
अनीश क्यों है पुलिस की नजर में?
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अनीश कुमार का आपराधिक इतिहास पुराना है और उसका नाम पटना के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल बताया जा रहा है।पिछले वर्ष पुलिस द्वारा एक AK-47 राइफल बरामद किए जाने के मामले में भी अनीश वांछित रहा है। एसएसपी के अनुसार बरामद की गई वह AK-47 अनीश की ही बताई गई थी।अब पुलिस उसके पूरे आपराधिक रिकॉर्ड को खंगाल रही है।
जांच का दायरा सिर्फ रविवार की मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि अनीश का नेटवर्क कितना बड़ा है, उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं और हथियारों की आपूर्ति कहां से होती थी।
नदी का इलाका बना अपराधियों का ‘सेफ जोन’?
बिहटा और आसपास का सोन-गंगा नदी क्षेत्र लंबे समय से बालू के कारोबार को लेकर चर्चा में रहा है।नदी, घाट, नाव और बालू की ढुलाई—इन सबका इस्तेमाल वैध कारोबार के साथ-साथ अवैध गतिविधियों के लिए भी किए जाने की आशंका रहती है।नदी का विस्तृत इलाका अपराधियों के लिए चुनौती इसलिए भी बनता है क्योंकि जमीन की तुलना में पुलिस की निगरानी कठिन होती है। नाव के जरिए आने-जाने, घाट बदलने और नदी के बीच छिपने की संभावना अपराधियों को भागने का मौका देती है।रविवार की घटना में भी घायल अपराधी का नदी में कूदना इसी चुनौती की तस्वीर सामने लाता है।
लेकिन पुलिस ने उसे पानी के बीच से गिरफ्तार कर यह संकेत जरूर दिया है कि नदी क्षेत्र को अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने दिया जाएगा।
बालू माफिया की असली ताकत सिर्फ बालू नहीं, रंगदारी का नेटवर्क है बालू के अवैध कारोबार की चर्चा अक्सर खनन तक सीमित रह जाती है। लेकिन पुलिस के मुताबिक इस मामले में अपराधियों की भूमिका कथित तौर पर रंगदारी वसूली से भी जुड़ी थी।
यही सबसे गंभीर पहलू है
अगर अपराधी गिरोह अवैध बालू खनन करने वालों से पैसा वसूल रहे थे और नाविकों को भी निशाना बना रहे थे, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि उसके समानांतर चल रहे आपराधिक अर्थतंत्र का संकेत है।
बालू से पैसा, पैसे से हथियार और हथियार के दम पर रंगदारी—
यह चक्र किसी भी इलाके की कानून-व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।एक रायफल, कार्बाइन, तीन तरह की पिस्टल और 25 गोलियां—किसके लिए था इतना हथियार?
मुठभेड़ के बाद पुलिस द्वारा बरामद हथियारों की सूची भी कई सवाल खड़े करती है।
एक देसी रायफल।
एक देसी कार्बाइन।
दो देसी पिस्टल।एक देसी कट्टा।
और करीब 25 राउंड गोलियां।
इतना हथियार किसी सामान्य आपराधिक गतिविधि की बजाय संगठित गिरोह की ओर संकेत कर सकता है—हालांकि इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ये हथियार कहां से आए और क्या इनके इस्तेमाल का संबंध पहले के आपराधिक मामलों से भी है।
फरार साथियों की तलाश तेज
पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के दौरान कुछ अपराधी मौके से भागने में सफल रहे।अब पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।यह जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। अनीश और पीयूष से पूछताछ के जरिए पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, हथियार सप्लायरों और रंगदारी नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।
अगर पुलिस इस नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचती है तो यह कार्रवाई केवल दो गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बिहटा के बालू और अपराध के गठजोड़ पर बड़ा प्रहार साबित हो सकती है।
बिहटा में अब असली परीक्षा पुलिस की भीमुठभेड़ में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अपराधियों की गिरफ्तारी निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण है। लेकिन असली सफलता तभी मानी जाएगी जब इस कार्रवाई के बाद पुलिस उस पूरे नेटवर्क को तोड़ पाए जिसके जरिए कथित तौर पर बालू कारोबार से रंगदारी वसूली जा रही थी।
किससे रंगदारी ली जाती थी?
कितनी रकम वसूली जाती थी?
कौन पैसा पहुंचाता था?
कौन हथियार उपलब्ध कराता था?
क्या इस नेटवर्क में और बड़े नाम जुड़े हैं?
और क्या इसके पीछे केवल स्थानीय अपराधी हैं या कोई संगठित गिरोह?
इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं।
‘एक अनीश’ की गिरफ्तारी से आगे जाना होगा
बिहटा के परेव घाट की मुठभेड़ ने एक बार फिर दिखाया है कि अपराधी जब हथियार के दम पर नदी और बालू के कारोबार में अपना प्रभाव कायम करने की कोशिश करते हैं तो चुनौती सिर्फ पुलिस के सामने नहीं होती—पूरे इलाके की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
इसलिए अनीश की गिरफ्तारी को अंतिम उपलब्धि मानना जल्दबाजी होगी।असली जीत तब होगी जब उसके पीछे खड़ा पूरा नेटवर्क सामने आएगा।
क्योंकि अपराध की दुनिया में अक्सर चेहरा एक होता है, लेकिन उसके पीछे कई हाथ काम करते हैं।
रविवार को पुलिस की गोलियों ने एक कुख्यात अपराधी को घायल कर गिरफ्तार जरूर कर लिया, लेकिन अब जांच की बारी है।
परेव घाट में चली गोलियों का अगला निशाना अगर अपराध का पूरा नेटवर्क बना, तभी यह मुठभेड़ बिहटा की कानून-व्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़ साबित होगी।
