नेपाल की जलप्रलय से यूपी-बिहार में बढ़ी धड़कन, 10 जिलों में नदियों के डेंजर मार्क पर पैनी नजर

बी के झा

NSK news Ind

पटना/लखनऊ, 27 अगस्त

पड़ोसी देश नेपाल की पहाड़ियों में कुदरत के कहर ने भारत के मैदानी इलाकों में भी खतरे की घंटी बजा दी है। चीन सीमा से सटे नेपाल के इलाकों में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई।

त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में आए अप्रत्याशित उफान का असर अब भारत की ओर बहने वाली नदियों पर दिखाई देने लगा है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के चार और बिहार के छह जिलों में नदी के जलस्तर, तटबंधों और निचले इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है।नेपाल में आई इस आपदा में अब तक करीब 160 लोगों की मौत और 750 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है।

बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। अब भारत में सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि नेपाल से आने वाले पानी का दबाव गंडक और अन्य नदियों पर कितना बढ़ता है।

नेपाल का पानी, भारत की चिंता

नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और अचानक बढ़े जलप्रवाह के कारण नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा है। भारत में यही नदी गंडक के नाम से जानी जाती है। नेपाल में नदियों के उफान का सीधा असर बिहार के गंडक नदी तंत्र पर पड़ता है।वाल्मीकिनगर बैराज में बुधवार रात तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन इसके बाद पानी तेजी से बढ़ा।

रात करीब 11 बजे तक बैराज पर लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी पहुंचने की सूचना है। पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों में एहतियातन 5 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

बिहार के छह जिले हाई अलर्ट पर

नेपाल से आने वाले संभावित अतिरिक्त जलप्रवाह को देखते हुए बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को नदियों के जलस्तर के साथ-साथ तटबंध, पुल-पुलिया और निचले इलाकों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सीतामढ़ी और शिवहर समेत अन्य संवेदनशील जिलों में भी हालात पर नजर रखी जा रही है।

निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिलाधिकारियों को जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी के साथ स्थानीय लोगों को समय रहते सूचना देने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के लिए टीमें तैनात की गई हैं।NDRF की 10 टीमें भी बिहार में पहले से मौजूद हैं।

यूपी में चार जिलों की सांसें अटकीं

नेपाल से लगे उत्तर प्रदेश के इलाकों में भी प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंडक नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए महराजगंज और कुशीनगर समेत प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं।महराजगंज, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर और कुशीनगर में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासनिक टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। ग्रामीणों से निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और जरूरत पड़ने पर ऊंचे स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहने की अपील की गई है।

महराजगंज के जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के मुताबिक, भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने की खबरों के बाद गंडक नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को दूर रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की भी अपील की है।

फिलहाल खतरा टला, लेकिन निगरानी जारी

सिद्धार्थनगर समेत कुछ इलाकों में फिलहाल बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं बताया जा रहा है। लेकिन नेपाल की पहाड़ियों में होने वाली बारिश और अचानक आने वाले जलप्रवाह का असर भारत की नदियों पर बेहद तेजी से पड़ सकता है।

यही कारण है कि प्रशासन किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।नेपाल की जलप्रलय ने एक बार फिर भारत-नेपाल की साझा नदी व्यवस्था की उस हकीकत को सामने ला दिया है, जिसमें पहाड़ों में हुई कुछ घंटों की बारिश मैदानी इलाकों की कई दिनों की चिंता बन सकती है।

फिलहाल गंडक और अन्य नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगाह है और प्रशासन का मूल मंत्र है—खतरे का इंतजार नहीं, खतरे से पहले तैयारी।

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