नेपाल में जलप्रलय से तबाही, 165की मौत और 750 से अधिक लापता; भोटेकोशी की बाढ़ ने उजाड़े इलाके, पुल-सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं तबाह; 130 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की सूचना, यूपी-बिहार में नदी तटों पर हाई अलर्ट

बी के झा

NSK news Ind

काठमांडू/पटना, 27 अगस्त

नेपाल में प्रकृति के प्रचंड प्रहार ने व्यापक तबाही मचा दी है। रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। अब तक करीब 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका के बीच नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। परिवहन और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

करीब 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की भी सूचना है। कई वाहन तेज बहाव में बह गए या मलबे में दब गए।

मलबे के बीच जिंदगी की तलाश

नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया है। रसुवा के टिमुरे से अब तक 116 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। एक सुरंग में फंसे सात नेपाली नागरिकों को भी बाहर निकाल लिया गया है।

हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री, दवाइयां, टेंट, जनरेटर, मोबाइल टावर और राहत उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं।नेपाल सरकार के मुताबिक, सुबह से राहत अभियान में हेलीकॉप्टरों की उड़ानें लगातार जारी हैं। सेना और निजी हेलीकॉप्टरों की मदद से गंभीर रूप से घायल और दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है।

130 से ज्यादा भारतीय लापता

इस त्रासदी में भारतीय नागरिकों के भी बड़ी संख्या में प्रभावित होने की खबर है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, संपर्कविहीन पर्यटकों में 139 भारतीय पर्यटक शामिल हैं, जबकि 37 भारतीय मूल के एनआरआई पर्यटकों के भी लापता होने की सूचना है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं समेत कई भारतीयों के परिवार उनकी सलामती को लेकर चिंतित हैं।नेपाल में अब तक बरामद शवों में सबसे अधिक 64 शव चितवन से मिले हैं। इसके अलावा धादिंग, नवलपरासी पूर्व, गोरखा, नुवाकोट, तनहु और रसुवा से भी शव बरामद किए गए हैं।

आपदा की वजह पर सवाल

नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास हुई इस आपदा के पीछे एक बड़े भूस्खलन और उससे जुड़े प्राकृतिक घटनाक्रम की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के हवाले से सामने आई जानकारी में भूस्खलन से पैदा हुए शक्तिशाली भूकंपीय संकेतों का उल्लेख है। आशंका है कि ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मलबा और पानी नदी तंत्र में जा मिला, जिससे अचानक विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बनी।इस बीच, नेपाल में यह सवाल भी उठ रहा है कि सीमा पार संभावित खतरे की पूर्व सूचना समय पर क्यों नहीं मिली।

चीन ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि वह खुद भारी नुकसान के बावजूद नेपाल को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल की इस कठिन घड़ी में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत की HADR (मानवीय सहायता एवं आपदा राहत) और मेडिकल सहायता काठमांडू पहुंच गई है। राहत अभियान के लिए अतिरिक्त सहायता जुटाई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।

नेपाल स्थित भारतीय मिशन भी प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और राहत प्रयासों में समन्वय कर रहा है।

बिहार-उत्तर प्रदेश में भी सतर्कता

नेपाल में आई तबाही का असर भारत की सीमा से लगे इलाकों पर भी नजर आ रहा है। बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। गंडक, नारायणी और कोसी समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।बिहार के पश्चिम चंपारण में वाल्मीकिनगर बैराज और तटबंधों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

जल संसाधन विभाग के अनुसार गंडक का जलस्तर बढ़ने के बाद फिलहाल तटबंध सुरक्षित हैं। अधिकारियों को हर घंटे स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार के छह संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत नेपाल सीमा से लगे जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

नेपाल की पहाड़ियों से निकली नदियों का रौद्र रूप अब धीरे-धीरे मैदानी इलाकों की चिंता बढ़ा रहा है।

फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन नेपाल में राहत अभियान के साथ-साथ आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर पर नजर रखना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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