बी के झा
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अयोध्या, 22 अगस्त
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की कथित चोरी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय के इस्तीफे के बाद उठे विवाद के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर केंद्र या राज्य सरकार के धन से नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा ट्रस्ट को दिए गए दान से निर्मित हुआ है।
मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के तीसरे दिन मिश्रा ने निर्माण कार्यों की प्रगति, शेष परियोजनाओं और ट्रस्ट की जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी।
70 में से 60 निर्माण कार्य पूरे
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर परियोजना के लिए निर्धारित लगभग 70 कार्यों में से 60 पूरे हो चुके हैं। विभिन्न निर्माण एजेंसियों ने अपना कार्य ट्रस्ट को सौंप दिया है और अब इन परिसंपत्तियों के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट निभाएगा।
उन्होंने कहा कि परिसर में संग्रहालय, ऑडिटोरियम, ट्रस्ट कार्यालय तथा आधुनिक ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था पर विशेष प्राथमिकता के साथ काम किया जा रहा है। संग्रहालय की सातवीं गैलरी पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि प्रवेश शुल्क पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट करेगा।
चंपत राय की वायरल चिट्ठी पर क्या बोले?
चंपत राय की उस वायरल चिट्ठी में ट्रस्ट की आंतरिक वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया था, जिसने नए सवाल खड़े कर दिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा,
“मैंने वह पत्र नहीं देखा है। फिलहाल ऐसा लगता है कि विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं रही और उन्हें उस प्रक्रिया की जानकारी नहीं है।
श्रद्धा के महाप्रकल्प पर वेतन संकट की छाया
जहां एक ओर मंदिर निर्माण को श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर परिसर में कार्यरत कई एजेंसियों के कर्मचारियों के महीनों से लंबित वेतन ने गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं।मिली जानकारी के अनुसार:| एजेंसी | लंबित वेतन
बीवीजी (सफाई व्यवस्था) – 4 माह
यूनी प्वाइंट – 3 माह
जिलाजीत -3 माह
बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को स्वयं भुगतान कर बाद में ट्रस्ट से राशि प्राप्त करती हैं, जबकि छोटी एजेंसियों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
निर्माण से प्रबंधन तक नई चुनौती
राम मंदिर अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के आगमन वाला विशाल धार्मिक परिसर बन चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण की सफलता के बाद पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन, समय पर भुगतान और जवाबदेह प्रशासन ही ट्रस्ट की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
चढ़ावे के विवाद, वायरल पत्र और लंबित भुगतान जैसे मुद्दों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस महाप्रकल्प में विश्वास जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही आवश्यक पारदर्शिता और सुशासन भी है।
