बी के झा
नई दिल्ली/लखनऊ, 28 सितंबर
लोकसभा चुनाव में अमेठी की सीट गंवाने के बाद क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एक बार फिर संसद के गलियारों में लौटेंगी?
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर शुरू हुई सियासी हलचल के बीच यह सवाल अब भाजपा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।भाजपा ने अभी उम्मीदवारों के नामों का औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन संभावित नामों की चर्चाओं में स्मृति ईरानी का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में यदि पार्टी उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजती है तो संगठन में नई भूमिका के साथ संसद में उनकी वापसी का रास्ता भी खुल सकता है।
अमेठी के बाद अब राज्यसभा का रास्ता?
स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हराकर लोकसभा पहुंची थीं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा।अब भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया है और संगठनात्मक स्तर पर भी उनकी भूमिका बढ़ी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों पर उनका नाम चर्चा में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, राज्यसभा टिकट मिलना अभी तय नहीं है।
भाजपा की ओर से अंतिम निर्णय और उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची का इंतजार है।
10 सीटें, भाजपा के सामने बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है। निर्वाचन आयोग के अनुसार 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 16 अक्टूबर को मतदान होगा। 10 सीटों में फिलहाल आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है। इन सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
भाजपा के जिन प्रमुख राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, अरुण सिंह, नीरज शेखर और बृजलाल शामिल हैं। दिनेश शर्मा की सीट उनके अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद पहले ही रिक्त हो चुकी है।
यानी पार्टी के सामने सिर्फ सीटें भरने का सवाल नहीं है। सवाल यह भी है कि पुराने चेहरों को दोहराया जाए या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जाए।
हरीश द्विवेदी पर भी निगाह
स्मृति ईरानी के साथ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए हरीश द्विवेदी का नाम भी संभावित राज्यसभा उम्मीदवारों की चर्चाओं में है।द्विवेदी को भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में उनकी भूमिका बढ़ी है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ऐसे में यदि भाजपा नए चेहरों को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी दोनों के नाम पर नजर रहेगी।
सामाजिक समीकरण भी बनेगा टिकट का आधार
राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लिए केवल वरिष्ठता या संगठनात्मक भूमिका ही मुद्दा नहीं होगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व भी टिकट वितरण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी के स्थान पर नए चेहरों की चर्चा है।
ओबीसी और दलित वर्ग से भी कई नाम संभावित दावेदारों के तौर पर सामने आ रहे हैं।भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में भी उत्तर प्रदेश से विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
विश्लेषणों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की सामाजिक पहुंच मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा गया है।
बीएल वर्मा और हरदीप पुरी को लेकर भी फैसला बाकी राज्यसभा की इन सीटों में दो केंद्रीय मंत्रियों—बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी—का भविष्य भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना पर भी पार्टी के भीतर विचार हो रहा है।
वहीं दूसरी तरफ कई नए चेहरों को संसद भेजने की चर्चा भी चल रही है। यानी भाजपा के सामने इस बार अनुभव बनाम नए चेहरों और सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन साधने की चुनौती है।
विधानसभा का गणित भाजपा के पक्ष में
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के विधायक मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से होता है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास पर्याप्त संख्या है, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले खेमे की भी अपनी हिस्सेदारी है।यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव को केवल उच्च सदन की 10 सीटों का चुनाव नहीं माना जा रहा। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह टिकट वितरण भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है।
असली तस्वीर उम्मीदवारों के ऐलान के बाद
फिलहाल भाजपा की ओर से किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। पार्टी नेतृत्व जल्द ही उम्मीदवारों पर विचार कर सकता है। पार्टी के भीतर संभावित नामों को लेकर चर्चा जरूर तेज है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
ऐसे में अभी सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अमेठी की हार के बाद स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा का अगला अध्याय राज्यसभा से शुरू होगा?
जवाब भाजपा की उम्मीदवार सूची में छिपा है। लेकिन इतना जरूर है कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों ने 2027 की बड़ी सियासी लड़ाई से पहले भाजपा के भीतर टिकट और सामाजिक समीकरणों की नई पटकथा लिखने की हलचल तेज कर दी है।
NSK news Ind

