पटना में आज छात्रों का शक्ति प्रदर्शन: CM आवास घेराव की तैयारी, BPSC से भर्ती कैलेंडर तक 14 संगठनों की हुंकार

बी. के. झा

NSK news Ind

पटना, 25 अगस्त

बिहार में भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के रोजगार का सवाल मंगलवार को एक बार फिर सड़क पर उतरने जा रहा है। ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU) ने आज मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। गांधी मैदान से सुबह 11 बजे प्रस्तावित मार्च में 14 छात्र संगठनों के शामिल होने और विपक्षी राजद के समर्थन के कारण प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

ABSU पिछले एक सप्ताह से गर्दनीबाग में धरना दे रहा है। मंगलवार को गांधी मैदान से डाकबंगला, तारामंडल और जेपी गोलंबर होते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च प्रस्तावित है। प्रशासन ने मुख्यमंत्री आवास और आसपास के क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए सुरक्षा बढ़ा दी है।

मांगों की लंबी फेहरिस्त केंद्र में BPSC

छात्र संगठनों की सबसे प्रमुख मांग BPSC परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की है। प्रदर्शनकारी परीक्षा संचालन और परिणाम प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। वे पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच किसी हाईकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा लाइब्रेरियन भर्ती, BSSC में संविदा वेटेज समाप्त करने और परीक्षा तिथि घोषित करने, असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति से पहले पात्रता परीक्षा, कथित धांधली वाली दरोगा भर्ती की जांच, भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष और 90 प्रतिशत तक डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग भी शामिल है।

छात्र संगठनों की मांग है कि बिहार में सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी हो और पेपर लीक व परीक्षा में कथित सेटिंग के मामलों में कठोर कार्रवाई के साथ अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

TRE-4 और नेगेटिव मार्किंग भी मुद्दा

शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 में एकल परीक्षा कराने और नेगेटिव मार्किंग समाप्त करने की मांग भी आंदोलन के एजेंडे में है। छात्र नेताओं का तर्क है कि बार-बार परीक्षा, अनिश्चित तारीख और भर्ती प्रक्रिया में देरी ने युवाओं के भविष्य को असमंजस में डाल दिया है।

शिक्षाविदों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े युवा आबादी वाले राज्य में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और समयबद्धता केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता का विषय भी है।

परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा टूटना

प्रतिभाशाली युवाओं में निराशा पैदा कर सकता है।सरकार के सामने परीक्षा से बड़ी परीक्षा सरकार के लिए आज की चुनौती केवल छात्रों को नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि उनके असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बनने से रोकने की भी है।

प्रशासन ने प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल तैनात किया है। मुख्यमंत्री आवास के आसपास प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण जेपी गोलंबर के आगे बढ़ने की कोशिश पर टकराव की आशंका जताई जा रही है।

कानूनविदों का कहना है कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश या कानून-व्यवस्था भंग करने की स्थिति में प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार है। जरूरी यह है कि बल प्रयोग अंतिम विकल्प रहे और संवाद का रास्ता खुला रहे।

विपक्ष को मिला सरकार घेरने का मौका

राजद समेत विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन को समर्थन दिया है। विपक्ष के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और युवाओं की नाराजगी बिहार की राजनीति में प्रभावी चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, छात्र आंदोलन का विस्तार हुआ तो यह महज परीक्षा रद्द कराने की मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की भर्ती नीति, रोजगार व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर जनमत संग्रह जैसा रूप ले सकता है।

हालांकि सरकार के पक्ष से यह तर्क सामने आता रहा है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत और न्यायिक रास्ते उपलब्ध हैं तथा कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।

असली सवाल—छात्र सड़क पर क्यों?

आज के प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी यही है कि बिहार में छात्र फिर परीक्षा से आगे बढ़कर व्यवस्था पर भरोसे का सवाल उठा रहे हैं।

यदि सरकार संवाद के जरिए शिकायतों का समाधान निकालती है तो आंदोलन शांत हो सकता है। लेकिन यदि मार्च टकराव में बदलता है, तो BPSC से शुरू हुआ विवाद सरकार बनाम छात्र संघर्ष का व्यापक राजनीतिक रूप ले सकता है।

आज गांधी मैदान से निकलने वाला मार्च सिर्फ मुख्यमंत्री आवास की ओर नहीं होगा—वह बिहार की परीक्षा व्यवस्था, रोजगार नीति और युवाओं के भरोसे की ओर भी बढ़ेगा।

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