थप्पड़ से पुलिसकर्मी पर कथित हमले तक पहुंचा तिलक नगर विवाद, सौरभ भारद्वाज-जरनैल सिंह समेत AAP नेताओं पर FIR, दूसरी तरफ प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 29 सितंबर

दिल्ली के तिलक नगर में सड़क की गुणवत्ता से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव से आगे बढ़कर पुलिस और कानून-व्यवस्था के सवाल तक पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच दिल्ली पुलिस ने आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज, विधायक जरनैल सिंह, साहिब सिंह और अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल के साथ कथित मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस के मुताबिक हेड कांस्टेबल सादे कपड़ों में तिलक नगर में अरविंद केजरीवाल के दौरे की वीडियोग्राफी कर रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर कुछ आप कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।

पुलिसकर्मी का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

यानी जिस विवाद की शुरुआत सड़क की गुणवत्ता और एक युवक को थप्पड़ मारे जाने के आरोप से हुई थी, वह अब ‘किसने किसे मारा’ से आगे बढ़कर ‘कानून लागू करने वाले पुलिसकर्मी के साथ क्या हुआ’ के सवाल में बदल गया है।

केजरीवाल के दौरे में क्या हुआ?

घटना उस समय की है जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तिलक नगर इलाके में सड़क की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे थे। इससे पहले इसी क्षेत्र में PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के सड़क निरीक्षण के दौरान साहिब सिंह नामक युवक को थप्पड़ मारे जाने का वीडियो सामने आया था।आप ने इस घटना को मुद्दा बनाते हुए प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद केजरीवाल तिलक नगर पहुंचे और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

इसी राजनीतिक माहौल में पुलिस का एक हेड कांस्टेबल सादे कपड़ों में कार्यक्रम की वीडियोग्राफी कर रहा था। पुलिस का आरोप है कि भीड़ में मौजूद आप कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मी को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की।

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।

FIR में सौरभ भारद्वाज और जरनैल सिंह के नाम

पुलिस कार्रवाई का सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मामले में आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह के नाम भी सामने आए हैं।पुलिस के अनुसार एफआईआर में इन नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने तथा कथित मारपीट से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। मामले की जांच के दौरान पुलिस घटनास्थल के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि एफआईआर में नाम होना आरोप का दर्ज होना है, अपराध सिद्ध होना नहीं। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

जरनैल सिंह पर PWD अधिकारियों की शिकायत भी

जरनैल सिंह के खिलाफ यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले PWD के एक सहायक अभियंता की शिकायत पर भी उनके खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के काम में कथित बाधा डालने और धमकाने से संबंधित एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी।पुलिस के अनुसार यह शिकायत उस विवाद से संबंधित है जिसमें सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर जरनैल सिंह तथा PWD अधिकारियों के बीच टकराव हुआ था।

इस तरह तिलक नगर विवाद अब कई शिकायतों में बंट चुका है—एक तरफ प्रवेश वर्मा के खिलाफ साहिब सिंह की शिकायत,

दूसरी तरफ PWD अधिकारियों की शिकायतें और अब पुलिसकर्मी से कथित मारपीट की एफआईआर।प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR नहीं, NCR

दूसरी तरफ प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ पुलिस ने Non-Cognisable Report (NCR) दर्ज की है। यह कार्रवाई साहिब सिंह की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के तहत हुई है, जो स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधान है।

NCR और FIR में कानूनी अंतर महत्वपूर्ण है।

असंज्ञेय अपराध में पुलिस सामान्यतः मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती, जबकि संज्ञेय अपराध में पुलिस को कानून के तहत सीधे जांच करने की शक्ति होती है।यही वजह है कि राजनीतिक बहस में दोनों मामलों को समान मान लेना कानूनी रूप से सही नहीं होगा।

एक सड़क, कई सवाल और बढ़ता सियासी टकराव

तिलक नगर की सड़क का विवाद अब दिल्ली की राजनीति में प्रतीकात्मक लड़ाई बन गया है।AAP का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च करके बनाई गई सड़क की गुणवत्ता खराब है और जनता के पैसे का सवाल उठता है। पार्टी ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वहीं भाजपा की ओर से AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रवेश वर्मा ने भी AAP नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं और विवाद को केवल सड़क की गुणवत्ता तक सीमित नहीं माना है।इस राजनीतिक टकराव के बीच अब पुलिसकर्मी से कथित मारपीट की एफआईआर ने विवाद को और गंभीर बना दिया है।

साहिब सिंह कौन हैं और विवाद में उनका नाम क्यों आया?

प्रवेश वर्मा पर थप्पड़ मारने का आरोप लगाने वाले साहिब सिंह का नाम भी अब पुलिस कार्रवाई में सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार साहिब सिंह का संबंध विधायक जरनैल सिंह से बताया गया है और वह उनके सोशल मीडिया से जुड़े काम भी संभालते रहे हैं।भाजपा नेताओं ने साहिब सिंह के पुराने मामले का हवाला देते हुए उन पर आरोप लगाए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक उनके खिलाफ इस साल जून में एक MCD कर्मचारी के साथ कथित मारपीट का मामला दर्ज हुआ था और उस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था; बाद में उन्हें जमानत मिली।हालांकि किसी व्यक्ति का पूर्व मामला वर्तमान घटना में उसकी भूमिका का स्वतः प्रमाण नहीं होता।

मौजूदा मामले में पुलिस को अलग से उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी होगी।

राजनीतिक प्रदर्शन बनाम कानून-व्यवस्था

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है—क्या राजनीतिक विरोध की सीमा वहां समाप्त हो जाती है जहां सरकारी कर्मचारी अपना काम कर रहा हो?

राजनीतिक दलों को सरकार और मंत्रियों के खिलाफ प्रदर्शन, सवाल और विरोध करने का अधिकार है। लेकिन यदि किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी के साथ कथित मारपीट होती है, तो मामला राजनीतिक विरोध से निकलकर कानून-व्यवस्था के दायरे में आ जाता है।इसीलिए इस प्रकरण में जांच का केंद्र यह होना चाहिए कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ, किसने पुलिसकर्मी को घेरा, किसने हाथापाई की और क्या नामजद नेताओं की प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं।

‘थप्पड़’ की राजनीति अब पुलिस थाने तक

तिलक नगर का पूरा घटनाक्रम दिल्ली की राजनीति में तेजी से बदलते समीकरण का उदाहरण बन गया है।पहले सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठा।

फिर निरीक्षण के दौरान युवक को थप्पड़ मारे जाने का वीडियो सामने आया।

AAP ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

केजरीवाल तिलक नगर पहुंचे।

AAP कार्यकर्ताओं ने विरोध किया।

पुलिस ने कार्रवाई की।

प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज हुई।

जरनैल सिंह के खिलाफ PWD शिकायत पर FIR हुई।और अब पुलिसकर्मी से कथित मारपीट के मामले में सौरभ भारद्वाज, जरनैल सिंह और अन्य के नाम एफआईआर में आ गए।

यानी एक सड़क का विवाद अब दिल्ली की सत्ता बनाम विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई और कानून-व्यवस्था के प्रश्न में बदल गया है।

सौरभ भारद्वाज का पलटवार

एफआईआर दर्ज होने के बाद सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और प्रवेश वर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग दोहराई। AAP का कहना है कि यदि प्रवेश वर्मा के खिलाफ शिकायत पर NCR दर्ज की जा सकती है तो उनके खिलाफ भी निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि अलग-अलग शिकायतों पर उपलब्ध तथ्यों और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है।

अब जांच बताएगी किसका दावा कितना सही

तिलक नगर विवाद में फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों के साथ मैदान में हैं।

AAP का सवाल सड़क की गुणवत्ता और प्रवेश वर्मा के व्यवहार पर है।

भाजपा का सवाल AAP कार्यकर्ताओं के व्यवहार और सरकारी अधिकारियों के काम में कथित हस्तक्षेप पर है।

पुलिस का सवाल अब कथित रूप से उसके अपने कर्मचारी पर हुए हमले से जुड़ गया है।ऐसे में आने वाले दिनों में CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, पुलिस की वीडियोग्राफी, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

एनएसके का विश्लेषण

तिलक नगर की कहानी सिर्फ एक थप्पड़ की कहानी नहीं है। यह उस राजनीतिक संस्कृति का आईना भी है जिसमें सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाने से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते व्यक्तिगत आरोप, प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और एफआईआर तक पहुंच गया।

जनता के पैसे से सड़क बनती है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाना जरूरी है। मंत्री और अधिकारी सार्वजनिक जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकते। लेकिन उसी तरह किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी कानून से ऊपर नहीं हो सकते।

अगर प्रवेश वर्मा ने किसी नागरिक को थप्पड़ मारा है तो उस घटना की निष्पक्ष कानूनी जांच होनी चाहिए।

अगर AAP कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। और यदि किसी नेता पर लगाए गए आरोप जांच में साबित नहीं होते हैं तो केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

लोकतंत्र में सड़क जनता की है, सरकार जनता की है और कानून भी जनता के लिए है।इसलिए तिलक नगर विवाद का अंतिम सवाल यह नहीं होना चाहिए कि AAP जीती या BJP हारी।

सवाल यह होना चाहिए—सड़क किस गुणवत्ता की बनी?

जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?

मंत्री के आचरण की जांच कैसे होगी?

पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?

और क्या दिल्ली की राजनीति में विरोध का मतलब अब टकराव और टकराव का मतलब एफआईआर बनता जा रहा है?

इन सवालों का जवाब राजनीतिक नारों से नहीं, वीडियो, दस्तावेज, जांच और कानून से मिलना चाहिए।

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