टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: शूटरों तक कैसे पहुंचे हथियार, QR कोड से होती थी फंडिंग; जांच में सामने आया चौंकाने वाला नेटवर्क, कोटा में मुंबई पुलिस की पूछताछ तेज, सड़क मार्ग से आरोपियों को मुंबई ले जाने की तैयारी

बी के झा, एनएसके

NSK news Ind

मुंबई/कोटा, 20 अक्टूबर

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कथित हमलावरों के नेटवर्क, फंडिंग और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े नए पहलू सामने आ रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तीनों शूटरों को हथियार अनिल पंडित के कहने पर उपलब्ध कराए गए थे। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर अनिल पंडित को कभी आमने-सामने नहीं देखा था। उनके बीच संपर्क के लिए जंगी ऐप का इस्तेमाल किया जाता था।पुलिस की जांच अब केवल फायरिंग को अंजाम देने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि कथित साजिश के पीछे कौन लोग सक्रिय थे, हथियार कहां से आए और आरोपियों के खर्च का इंतजाम किस तरह किया जाता था।

जांच में सामने आए इन तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति और कथित नेटवर्क से जुड़े इन दावों की पुष्टि जांच के आधिकारिक निष्कर्षों और पुलिस के बयान से होना अभी बाकी है।

QR कोड के जरिए भुगतान, रोजाना मिलते थे 5 से 10 हजार रुपये

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मुंबई में मौजूद तीनों आरोपियों के खर्च के लिए प्रतिदिन करीब 5,000 से 10,000 रुपये तक ऑनलाइन भुगतान किया जाता था। कथित तौर पर भुगतान के दौरान सीधे बैंक खाते में रकम भेजने के बजाय QR कोड का इस्तेमाल किया जाता था।बताया जा रहा है कि आरोपी किसी स्थानीय दुकानदार या अन्य व्यक्ति का QR कोड अनिल पंडित को भेज देते थे, जिसके बाद संबंधित QR कोड के जरिए भुगतान किया जाता था। आरोप है कि इसी तरीके से मिलने वाली रकम से आरोपियों के रहने, खाने और अन्य जरूरतों का खर्च चलाया जाता था।इस भुगतान व्यवस्था के पीछे कथित उद्देश्य लेन-देन की कड़ियों को छिपाना और जांच एजेंसियों की ट्रैकिंग से बचना था।

अब पुलिस के लिए यह पता लगाना अहम होगा कि भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए QR कोड किन लोगों के थे, रकम किन खातों से भेजी गई और इस पूरी प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे।अगर इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह पहलू जांच को एक बड़े वित्तीय नेटवर्क तक ले जा सकता है।

जंगी ऐप के जरिए संपर्क, पहचान छिपाने की कोशिश

पुलिस की जांच में जंगी ऐप के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। आरोप है कि तीनों शूटर इसी ऐप के माध्यम से अनिल पंडित के संपर्क में रहते थे। बताया जा रहा है कि आरोपियों और पंडित के बीच आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई थी।दावा है कि इस ऐप पर खाता बनाने के लिए मोबाइल नंबर या व्यक्तिगत जानकारी देना जरूरी नहीं होता। साथ ही, इसके डेटा को लेकर भी ऐसी व्यवस्था होने की बात कही जा रही है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए संचार संबंधी जानकारियां जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, ऐप की वास्तविक तकनीकी व्यवस्था और डेटा संग्रह से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से आरोपी बातचीत के बाद अपने सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे। यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो इससे संकेत मिलता है कि आरोपी अपनी पहचान और संपर्कों के डिजिटल सुराग मिटाने की कोशिश कर रहे थे।जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने संपर्क के लिए किन उपकरणों का इस्तेमाल किया और उनके डिजिटल संचार से जुड़े कोई सबूत बरामद हुए हैं या नहीं।

इंदौर और मुंबई से पहुंचे हथियार, कचरे के ढेर के पास छोड़े जाते थे पैकेट!

इस मामले में हथियारों की आपूर्ति का तरीका भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के पास पहुंचे हथियार इंदौर और मुंबई से आए थे। कथित तौर पर हथियार पहुंचाने के लिए किसी व्यक्ति को सीधे आरोपियों के पास भेजने के बजाय मोबाइल फोन पर लोकेशन और वीडियो के जरिए जानकारी दी जाती थी।इसके बाद हथियारों को किसी डिब्बे में रखकर कचरे के ढेर के पास छोड़ दिया जाता था।

आरोपियों को कथित तौर पर मोबाइल पर भेजी गई लोकेशन और वीडियो के आधार पर उस स्थान तक पहुंचकर हथियार हासिल करने की जानकारी मिलती थी।इस तरीके का इस्तेमाल क्यों किया गया, हथियार किसने उपलब्ध कराए और आपूर्ति की इस कथित श्रृंखला में कितने लोग शामिल थे, ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब पुलिस की आगे की जांच से सामने आ सकते हैं।

हथियारों की बरामदगी, उनकी खरीद-फरोख्त और आपूर्ति से जुड़े लोगों की पहचान इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

अमृतसर में व्यापारी पर हमले का भी जिक्र, पुराने संपर्कों की जांच

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रेहान और फूल सिंह अमृतसर में एक व्यापारी पर हमले की घटना में भी शामिल रहे थे। इस जानकारी के सामने आने के बाद आरोपियों की पिछली गतिविधियों और संभावित आपराधिक संपर्कों की जांच का पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि अमृतसर की घटना और मुंबई में हुई फायरिंग के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।

क्या दोनों घटनाओं में एक ही नेटवर्क सक्रिय था, क्या हथियारों की आपूर्ति का तरीका समान था और क्या आरोपियों को किसी साझा सूत्र से निर्देश मिलते थे—इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं। हालांकि, पिछली घटना से जुड़े आरोपों और मौजूदा मामले के बीच संबंध स्थापित करने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे।

रेहान के दोस्त समीर से पूछताछ, अभी गिरफ्तारी नहीं

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए सोनीपत निवासी रेहान के दोस्त समीर से भी पूछताछ शुरू की है।जानकारी के मुताबिक, समीर पहले अवैध हथियार के एक मामले में रेहान के साथ जेल में बंद था। इसी पृष्ठभूमि में पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समीर की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।समीर से पूछताछ के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि रेहान के पुराने संपर्क कौन-कौन थे और क्या उसे इस मामले से जुड़ी किसी गतिविधि की जानकारी थी।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी आरोपी का दोस्त होना या उसके साथ किसी पुराने मामले में जेल में रहना अपने आप में मौजूदा अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। समीर की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

कोटा में कड़ी सुरक्षा, तीनों आरोपियों को मुंबई ले जाने की तैयारी

मुंबई पुलिस तीनों आरोपियों को फिलहाल राजस्थान के कोटा स्थित रेलवे कॉलोनी पुलिस स्टेशन में रखे हुए है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने उनसे रात में तीन दौर में पूछताछ की और इस दौरान कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया जा रहा है।

आरोपियों को मुंबई ले जाने की तैयारी भी तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें ट्रेन या हवाई मार्ग के बजाय सड़क मार्ग से मुंबई ले जाने की संभावना अधिक है। हालांकि, उन्हें ले जाने का अंतिम कार्यक्रम पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रेलवे कॉलोनी पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हर चार घंटे में बदले जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, पुलिस का वज्र वाहन भी थाने पर पहुंच चुका है।

आरोपियों को मुंबई ले जाने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने की संभावना है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

अब जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में सामने आ रही जानकारियों के बीच जांच के सामने तीन महत्वपूर्ण सवाल हैं।

पहला—फंडिंग का असली स्रोत कौन था?

पुलिस को कथित QR कोड भुगतान के पीछे मौजूद खातों, भुगतान करने वालों और रकम के अंतिम स्रोत का पता लगाना होगा।

दूसरा—हथियार किसने उपलब्ध कराए?

इंदौर और मुंबई से हथियारों की आपूर्ति के दावों की पुष्टि के साथ उन लोगों की पहचान अहम होगी, जिन्होंने कथित तौर पर हथियार पहुंचाने में भूमिका निभाई।तीसरा—क्या इस घटना के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था?

जंगी ऐप के जरिए संपर्क, कथित तौर पर पहचान छिपाने की कोशिश और भुगतान की व्यवस्था जैसे पहलुओं की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोपी अपने स्तर पर काम कर रहे थे या किसी बड़े नेटवर्क के निर्देश पर।

फिलहाल, मुंबई पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।

आरोपियों को मुंबई ले जाने के बाद उनसे होने वाली पूछताछ में फायरिंग की पूरी योजना, हथियारों की आपूर्ति और पैसों के लेन-देन से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

एनएसके की नजर इस मामले की हर अहम कड़ी पर बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *