UPSC के 100 साल पूरे: भारत मंडपम में शताब्दी का शंखनाद, PM मोदी जारी करेंगे स्मारक सिक्का और डाक टिकट, 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित पुस्तक भी होगी जारी

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 30 सितंबर

देश की प्रशासनिक व्यवस्था को सक्षम, निष्पक्ष और योग्य अधिकारियों की नई पीढ़ियां देने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अब अपने इतिहास के उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां एक संस्था की यात्रा के साथ स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक विकास की पूरी कहानी दिखाई देती है।

आयोग की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शताब्दी समारोह का भव्य समापन होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11 बजे आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और समारोह को संबोधित करेंगे।यह आयोजन केवल एक संस्थागत वर्षगांठ नहीं, बल्कि भारतीय लोकसेवा की एक सदी की यात्रा को स्मरण करने का अवसर भी है। 1926 में स्थापित लोक सेवा आयोग से शुरू हुई यह यात्रा आज संघ लोक सेवा आयोग के रूप में देश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

UPSC ने अपनी शताब्दी के अवसर पर वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 से की थी, जिसका औपचारिक समापन अब भारत मंडपम में होगा।

स्मारक सिक्का और डाक टिकट से दर्ज होगी ऐतिहासिक विरासत

शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी UPSC शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ‘100 Landmark Judgements—Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नामक पुस्तक का लोकार्पण भी करेंगे। पुस्तक में लोक सेवा आयोगों की नीतियों और कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाले 100 महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का संकलन किया गया है।

स्मारक सिक्का और डाक टिकट जहां UPSC की सौ साल की संस्थागत यात्रा को राष्ट्रीय स्मृति में दर्ज करेंगे, वहीं यह पुस्तक लोक सेवा आयोगों के कामकाज को प्रभावित करने वाले न्यायिक विमर्श की महत्वपूर्ण झलक पेश करेगी।

दो दिन तक चलेगा शताब्दी विमर्श

UPSC का शताब्दी आयोजन 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को दो दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह—मंथन’ के तहत विभिन्न विषयों पर वक्ताओं के संबोधन और पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इन चर्चाओं का केंद्र भारतीय लोक सेवा की बदलती भूमिका, प्रशासन की नई चुनौतियां और भविष्य की प्राथमिकताएं रहीं।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, UPSC के अधिकारी तथा लोक प्रशासन से जुड़े अन्य प्रमुख लोग हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में शताब्दी समारोह सिर्फ अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के प्रशासन की दिशा पर मंथन का मंच भी बन गया है।

परीक्षा से प्रशासन तक—एक सदी की कहानी

UPSC का नाम देश के लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ा है। सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की प्रशासनिक व्यवस्था में आने वाले अधिकारी नीति के क्रियान्वयन से लेकर जिला प्रशासन, केंद्र सरकार और विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाते हैं।

यही कारण है कि UPSC की शताब्दी केवल एक संवैधानिक संस्था की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उन असंख्य अभ्यर्थियों, अधिकारियों और प्रशासनिक परंपराओं की यात्रा का भी प्रतीक है, जिन्होंने देश के शासन तंत्र को आकार दिया है।

1 अक्टूबर को भारत मंडपम में होने वाला समारोह इसी लंबी यात्रा को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करेगा।

प्रधानमंत्री द्वारा स्मारक सिक्का, डाक टिकट और पुस्तक का विमोचन इस ऐतिहासिक अवसर को दस्तावेजी और स्मृति-चिह्न, दोनों रूपों में दर्ज करेगा।

एन एस के– विशेष

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