विदेश में छिपे भगोड़ों पर भारत का शिकंजा! 36 देशों से 288 अपराधी वापस, अमित शाह ने लॉन्च किया प्रत्यर्पण पोर्टल

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 29 सितंबर

आतंकवाद के बदलते चेहरे, सीमा पार से संचालित अपराध और विदेशों में पनाह लेकर भारतीय कानून से बचने की कोशिश करने वाले भगोड़ों के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुरक्षा तंत्र को और धार देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘प्रहार—राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति’ पर आयोजित सम्मेलन के दौरान नया प्रत्यर्पण पोर्टल (Extradition Portal) लॉन्च किया।इस पोर्टल का उद्देश्य विदेशों में मौजूद वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और प्रत्यर्पण की कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित एवं तेज बनाना है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। शाह ने राज्यों की पुलिस से केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए समर्पित टीमें गठित करने का भी आह्वान किया।

यानी संदेश साफ है—देश से बाहर भाग जाना अब भारतीय कानून से स्थायी बच निकलने की गारंटी नहीं माना जा सकता।

प्रत्यर्पण पोर्टल क्यों है महत्वपूर्ण?

अंतरराष्ट्रीय अपराधों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि अपराधी किसी दूसरे देश में जाकर कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में केवल भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती; विदेश मंत्रालय, राज्य पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और संबंधित विदेशी सरकारों के बीच कानूनी एवं कूटनीतिक समन्वय भी आवश्यक होता है।नए पोर्टल का उद्देश्य इसी समन्वय को अधिक व्यवस्थित करना है।शाह ने राज्य पुलिस बलों से केंद्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल के लिए समर्पित टीम बनाने को कहा है, ताकि विदेश में मौजूद भगोड़ों की पहचान, उनके खिलाफ दस्तावेजी कार्रवाई और प्रत्यर्पण से जुड़ी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को कम किया जा सके।

‘प्रहार’ का अगला चरण—सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, पहले से रोकथाम

अमित शाह ने सम्मेलन में केवल प्रत्यर्पण पर ही जोर नहीं दिया। उनका मुख्य फोकस भारत की नई आतंकवाद-रोधी नीति ‘PRAHAAR’ को जमीन पर अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने पर रहा।भारत ने 23 फरवरी 2026 को अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति ‘PRAHAAR’ जारी की थी। इसमें आतंकवाद से निपटने के लिए सात स्तंभ निर्धारित किए गए हैं—आतंकी हमलों की रोकथाम,

त्वरित प्रतिक्रिया,

आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण,

मानवाधिकार एवं कानून के शासन पर आधारित प्रक्रिया,

आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समाज-व्यापी स्तर पर रिकवरी एवं रेजिलिएंस।

नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में शाह ने इस ढांचे के प्रत्येक स्तर पर ऑटोमेटेड और परिणाम-उन्मुख आतंकवाद-रोधी प्रतिक्रिया को संस्थागत बनाने की आवश्यकता बताई।इसका अर्थ केवल घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खुफिया जानकारी,

तकनीक,

एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें संभावित खतरे पर तेजी से कार्रवाई हो सके।

‘प्रहार’ के सात स्तंभ क्या कहते हैं?

1. Prevention—हमले से पहले रोकथामआतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने से पहले उनकी पहचान और रोकथाम पर जोर।

2. Response—तेज और समन्वित कार्रवाईकिसी आतंकी खतरे या हमले की स्थिति में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच त्वरित प्रतिक्रिया।

3. Aggregating Internal Capacities—सभी क्षमताओं का एकीकरणखुफिया, पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और जांच एजेंसियों की क्षमताओं को एक साझा ढांचे में जोड़ना।

4. Human Rights & Rule of Law—कानून के दायरे में कार्रवाईआतंकवाद विरोधी कार्रवाई में मानवाधिकार और विधि के शासन आधारित प्रक्रियाओं पर जोर।

5. Attenuating Conditions—कट्टरपंथ की जमीन कमजोर करनाउन परिस्थितियों को कम करना जो आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देती हैं।

6. Aligning International Efforts—वैश्विक सहयोगदूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाना।

7. Recovery & Resilience—हमले के बाद समाज को मजबूत करनाआतंकी घटनाओं से प्रभावित क्षेत्रों और समुदायों को दोबारा मजबूत बनाना।

गृह मंत्रालय के अनुसार यह नीति खुफिया-आधारित सक्रिय ढांचे, तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर आधारित है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन

सम्मेलन में अमित शाह ने एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल का एक उदाहरण शहजाद भट्टी नेटवर्क की कार्रवाई के रूप में सामने रखा।गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा पार हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े इस नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया है।इस कार्रवाई में 15 राज्यों में 100 से अधिक FIR दर्ज की गईं और 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सरकार ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।

यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि आतंकवाद की चुनौती अब केवल किसी एक स्थान या एक संगठन तक सीमित नहीं रह गई है। हथियार, ड्रग्स, धन और सीमा पार नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़कर सुरक्षा के लिए जटिल चुनौती पैदा कर सकते हैं।

आतंकवाद और संगठित अपराध के बीच गठजोड़ पर नजर

आज के सुरक्षा परिदृश्य में आतंकवादी नेटवर्क केवल हथियारों और विस्फोटकों के जरिए ही काम नहीं करते। ड्रग तस्करी, अवैध वित्तीय लेनदेन, डिजिटल नेटवर्क, फर्जी पहचान और सीमा पार संपर्क भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन चुके हैं।इसीलिए ‘प्रहार’ का ढांचा आतंकवाद को केवल बंदूक और बम के नजरिए से नहीं देखता।

सरकार की रणनीति में आतंकवादियों तक पैसा, हथियार, सुरक्षित ठिकाने और साइबर संसाधन पहुंचने से रोकना भी शामिल है। नीति दस्तावेज में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने पर भी जोर दिया गया है।

अब थानों तक पहुंचेगा आतंकवाद-रोधी समन्वय

अमित शाह ने आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को केवल राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय पुलिस स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया।उनका कहना है कि ‘प्रहार’ के हर स्तर पर कार्रवाई का ऐसा तंत्र बनाया जाना चाहिए जो तकनीक आधारित हो और परिणाम पर केंद्रित हो।इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी आतंकी नेटवर्क का पहला सुराग अक्सर स्थानीय स्तर पर ही सामने आ सकता है।

संदिग्ध गतिविधि, वित्तीय लेनदेन, हथियारों की आवाजाही या किसी व्यक्ति की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी स्थानीय पुलिस के पास पहले पहुंच सकती है।ऐसे में स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचना का तेज प्रवाह आतंकवाद-रोधी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

सम्मेलन में देश का सुरक्षा तंत्र एक मंच पर‘प्रहार’

सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के DGP तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ATS प्रमुख व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए।अन्य राज्यों के DGP और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

इस व्यापक भागीदारी से सम्मेलन का फोकस केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र, राज्य और सुरक्षा एजेंसियों के बीच संचालनात्मक समन्वय को मजबूत करने पर भी रहा।

‘जीरो टॉलरेंस’ से ‘जीरो गैप’ तक की चुनौती

मोदी सरकार आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देती रही है। लेकिन किसी भी आतंकवाद-रोधी नीति की वास्तविक परीक्षा उसके जमीन पर लागू होने में होती है।यही कारण है कि ‘प्रहार’ के सामने सबसे बड़ा सवाल अब केवल यह नहीं है कि नीति कितनी व्यापक है।

सवाल यह है कि—क्या खुफिया सूचना सही समय पर सही एजेंसी तक पहुंचेगी?

क्या केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच कार्रवाई में देरी कम होगी?

क्या आतंकवाद की फंडिंग, हथियार और साइबर नेटवर्क को समय रहते रोका जा सकेगा?

और क्या विदेशों में छिपे अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और प्रभावी होगी?

नया प्रत्यर्पण पोर्टल इसी व्यापक सुरक्षा ढांचे की एक अहम कड़ी के रूप में सामने आया है।

288 की वापसी के बाद अब नजर बाकी भगोड़ों पर

2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 288 भगोड़ों को भारत वापस लाए जाने का आंकड़ा सरकार की अंतरराष्ट्रीय कानून-प्रवर्तन और प्रत्यर्पण कोशिशों को रेखांकित करता है।लेकिन सरकार का नया पोर्टल बताता है कि अभियान को यहीं रोकने की योजना नहीं है।

अब लक्ष्य विदेशों में मौजूद अन्य वांछित अपराधियों के मामलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।यानी भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का दायरा अब देश की सीमाओं के भीतर कार्रवाई से आगे बढ़कर विदेशी धरती पर मौजूद भगोड़ों तक पहुंचने वाले कानूनी और कूटनीतिक तंत्र को मजबूत करने की दिशा में भी जा रहा है।

आतंक के खिलाफ लड़ाई का नया सुरक्षा-फ्रेम‘प्रहार’ और प्रत्यर्पण पोर्टल को अलग-अलग पहल के रूप में देखने के बजाय इन्हें भारत के व्यापक आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा ढांचे के दो हिस्सों के रूप में देखा जा सकता है।

एक तरफ ‘प्रहार’ का जोर आतंकवाद को रोकने,

खुफिया तंत्र मजबूत करने,

एजेंसियों को जोड़ने,

वित्तीय नेटवर्क काटने और हमले की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया पर है।

दूसरी तरफ प्रत्यर्पण पोर्टल का लक्ष्य उन अपराधियों तक पहुंचना है जो अपराध के बाद देश से बाहर निकलकर भारतीय कानून की पहुंच से बचने की कोशिश करते हैं।

संदेश स्पष्ट है—आतंकवाद हो या संगठित अपराध, सीमा अब कार्रवाई के रास्ते की अंतिम दीवार नहीं मानी जा रही।

अब चुनौती नीति बनाने से ज्यादा उसके प्रभावी क्रियान्वयन की है।

और आने वाले वर्षों में ‘प्रहार’ की असली कसौटी यही होगी कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां सूचना, तकनीक, कानून, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और त्वरित कार्रवाई को एक साझा सुरक्षा कवच में कितनी मजबूती से बदल पाती हैं।

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