बी के झा
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मुंबई/नई दिल्ली, 2 अक्टूबर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गांधी जयंती के दिन मुंबई से शुरू होने जा रहे इस आंदोलन ने प्रदर्शन के साथ-साथ उसकी फंडिंग, संसाधनों और नेतृत्व के खर्च को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब दीपके से पूछा गया कि चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग करने वाली उनकी पार्टी अपनी फंडिंग का स्रोत सार्वजनिक क्यों नहीं करती, तो उन्होंने सवाल को ही गैर-तार्किक करार दिया।दीपके ने कहा कि फंडिंग सार्वजनिक कर देने से क्या चुनाव व्यवस्था ठीक हो जाएगी?
उनके मुताबिक, CJP को मिलने वाली फंडिंग और चुनाव आयोग में जिस कथित गड़बड़ी का वह आरोप लगा रहे हैं, दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है।
‘मैं 30 हजार के जूते पहनता हूं, इसमें शर्म की क्या बात है?
‘प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात सिर्फ फंडिंग तक सीमित नहीं रही। दीपके से उनके करीब 30 हजार रुपये के जूतों को लेकर भी सवाल किया गया। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें महंगे जूते पहनने पर कोई शर्म नहीं है और वह इसकी क्षमता रखते हैं।दीपके ने कहा कि उनके जूतों की तस्वीरें काफी चर्चा में रही हैं। उन्होंने अपने विदेश दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह अमेरिका जाने के लिए फ्लाइट ले सकते हैं, तो मुंबई से दिल्ली तक भी यात्रा कर सकते हैं।
यानी दीपके का संदेश साफ था—आंदोलन के खर्च या उनके निजी खर्च को लेकर उठने वाले सवालों को वह आंदोलन के मूल मुद्दे से अलग मानते हैं।
मुंबई में प्रदर्शन से पहले हिरासत
मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन से एक दिन पहले दीपके को मरीन ड्राइव इलाके में पुलिस ने कुछ देर के लिए हिरासत में लिया। वह समर्थकों के साथ प्लेकार्ड लेकर पहुंचे थे। पुलिस उन्हें मरीन ड्राइव थाने ले गई, जहां पहचान संबंधी औपचारिकताओं के बाद कुछ ही देर में उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया।
CJP ने मुंबई पुलिस से अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी है और वैकल्पिक स्थान पर कार्यक्रम करने को कहा है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
दीपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को मुंबई से आगे देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाया जाएगा।CJP की ओर से गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी प्रदर्शन की बात कही गई है। इसके बाद अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है।
दीपके ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। ये उनके राजनीतिक आंदोलन के आरोप और मांगें हैं; इन आरोपों पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का पक्ष अलग विषय है।
तीन बड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन
CJP ने अपने आंदोलन को केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ प्रदर्शन तक सीमित नहीं बताया है। संगठन की प्रमुख मांगों में SIR प्रक्रिया को रोकना, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करने की मांग और चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।दीपके का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतंत्र के मूल सवाल हैं। इसी आधार पर वह सड़क से लेकर अदालत तक अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहे हैं।
अब सवाल आंदोलन से आगे का है…
मुंबई से शुरू होने वाला यह अभियान CJP के लिए सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की परीक्षा भी है। एक तरफ दीपके चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी पार्टी की फंडिंग और आंदोलन के संसाधनों को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं।
फंडिंग के सवाल पर दीपके का जवाब फिलहाल इतना ही है कि उनकी निजी आर्थिक क्षमता या पार्टी की फंडिंग का चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों से क्या संबंध है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है और क्या CJP अपने घोषित कार्यक्रम के मुताबिक इसे दूसरे राज्यों और अंततः दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जा पाती है।
