बी के झा
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नई दिल्ली, 20 अगस्त
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो पद गाने के निर्णय पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के लिए राष्ट्रगौरव का अपमान किया है और उसे “आज की नई मुस्लिम लीग” तक करार दिया।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक रहे वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने ऐतिहासिक और वैचारिक तर्क पेश कर रहे हैं।
नितिन नवीन का हमला: ‘अपमान अब नीति बन गया
‘बीजेपी अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस के निर्णय की आलोचना करते हुए लिखा कि पहले जिस घटना को कांग्रेस ने संयोग बताया था, अब उसी सोच को कार्यसमिति के प्रस्ताव का रूप दे दिया गया है।
“कांग्रेस ने अपमान को अपनी नीति बना लिया है। वंदे मातरम् के केवल दो छंद गाने का निर्णय उन हजारों बलिदानियों का तिरस्कार है जिन्होंने इसी गीत से प्रेरणा लेकर देश के लिए प्राण न्योछावर किए।” — नितिन नवीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपाउन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हर बार वोट बैंक की राजनीति को राष्ट्र के स्वाभिमान से ऊपर रखा है।
कांग्रेस का पक्ष: ‘1937 के ऐतिहासिक निर्णय का पालन’
दूसरी ओर कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि उसका निर्णय नया नहीं, बल्कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले की निरंतरता है।कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में परंपरा के अनुसार वंदे मातरम् के पहले दो पद ही गाती रही है और आगे भी यही व्यवस्था जारी रहेगी।उनके अनुसार, यह निर्णय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की सहमति से बनी ऐतिहासिक परंपरा पर आधारित है।
“वंदे मातरम् कांग्रेस के लिए भावनात्मक विषय है, जबकि बीजेपी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है।” — के.सी. वेणुगोपाल
विवाद की जड़ क्या है?
‘वंदे मातरम्’ बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ से लिया गया राष्ट्रगीत है। स्वतंत्रता आंदोलन में इसके पहले दो पद व्यापक रूप से राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बने। बाद के पदों को लेकर ऐतिहासिक रूप से कुछ धार्मिक आपत्तियां उठी थीं, जिसके बाद कांग्रेस ने 1937 में सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले दो पद गाने की परंपरा अपनाई।यही ऐतिहासिक निर्णय आज फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
राजनीतिक संदेश
बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे ऐतिहासिक परंपरा और संवैधानिक संतुलन का विषय बता रही है।
ऐसे में वंदे मातरम् एक बार फिर केवल सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि देश की राजनीति का प्रमुख विमर्श बन गया है।
(नोट: “नई मुस्लिम लीग” संबंधी टिप्पणी भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का राजनीतिक आरोप है। कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं किया है और अपने निर्णय को 1937 की ऐतिहासिक परंपरा पर आधारित बताया है।)
