जूतों में छिपे 12 भारतीय सिम, सोलर कैमरों से ‘लाइव जासूसी’! एनआईए की चार्जशीट में पाकिस्तानी हैंडलरों तक संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें और लोकेशन पहुंचाने की साजिश का खुलासा

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 6 सितंबर

देश के संवेदनशील रेलवे स्टेशनों और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठानों पर निगरानी के लिए लगाए गए सोलर पैनल कैमरे और उन्हें विदेश बैठे संदिग्ध पाकिस्तानी हैंडलरों से जोड़ने की कथित साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करते हुए ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया है, जिनमें जूते के भीतर छिपाकर 12 भारतीय सिम कार्ड दुबई भेजे जाने का मामला भी शामिल है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क केवल तस्वीरें खींचने तक सीमित नहीं था, बल्कि संवेदनशील स्थानों की निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए और उनकी लाइव पहुंच कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित संदिग्ध संगठन तक उपलब्ध कराई गई। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियो और तस्वीरें जुटाकर उनकी सटीक लोकेशन भी साझा की गई।

दिल्ली कैंट स्टेशन पर कैमरा, विदेश बैठे हैंडलर तक लाइव पहुंचाया

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, आरोपी सरदार जोरा सिंह ने अन्य आरोपियों की मदद से 15 फरवरी को दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन का दौरा किया। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके बाद स्टेशन पर सोलर पैनल से संचालित कैमरा लगाया गया और इसकी लाइव स्ट्रीमिंग संदिग्ध पाकिस्तानी संगठन तक पहुंचाई गई।जांच में यह भी सामने आया कि इन कैमरों के जरिए आसपास के सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। कैमरों के संचालन के लिए शिवा वाल्मीकि के नाम पर पंजीकृत भारतीय सिम कार्ड का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।

जूते बने सिम कार्ड की ‘ढाल’

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू भारतीय सिम कार्ड को विदेश भेजने का तरीका है। चार्जशीट के मुताबिक, राज वाल्मीकि और शिवा वाल्मीकि ने कौशांबी स्थित ब्लू डार्ट कूरियर के माध्यम से स्पोर्ट्स शूज की एक जोड़ी दुबई भेजी।

आरोप है कि इन्हीं जूतों के भीतर छिपाकर 12 भारतीय सिम कार्ड भेजे गए।एनआईए का दावा है कि यह खेप सरदार जोरा सिंह और विक्की जद्दू के निर्देश पर भेजी गई थी। कूरियर बुकिंग के दौरान शिवा वाल्मीकि के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

एक ओटीपी से खुलता था विदेशी नेटवर्क का रास्ता?

चार्जशीट में साने इरम की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। एनआईए के अनुसार, भारतीय सिम कार्ड के साथ व्हाट्सऐप इंस्टॉल करने के लिए साने इरम ने सरदार जोरा सिंह को दो ओटीपी भेजे थे।यानी जांच एजेंसी जिस कथित नेटवर्क की तस्वीर अदालत के सामने रख रही है, उसमें सिम कार्ड की व्यवस्था से लेकर मोबाइल एप के सक्रियण और कैमरों को संचालित करने तक अलग-अलग लोगों की भूमिका बताई गई है।

सोनीपत में भी लगाया गया सोलर कैमरा

एनआईए के मुताबिक, संदिग्ध पाकिस्तानी संगठन के निर्देश पर आरोपी प्रवीण और शिवराज दो अन्य लोगों के साथ 25 फरवरी को सोनीपत रेलवे स्टेशन पहुंचे। आरोप है कि वहां भी सोलर पैनल से संचालित कैमरा लगाया गया और इसकी लाइव पहुंच विदेशी हैंडलरों को उपलब्ध कराई गई।जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने जीपीएस मैप और कैमरों की मदद से विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों की तस्वीरें और वीडियो जुटाए। इन सामग्री को कथित तौर पर जियो-टैगिंग के साथ विदेश बैठे हैंडलरों तक भेजा गया।

सिर्फ कैमरा नहीं, पूरा तकनीकी नेटवर्क तैयार करने का आरोप

चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने कथित नेटवर्क को तकनीकी रूप से सक्रिय रखने के लिए कंप्यूटर माउस समेत अन्य सामान भी भेजे। एनआईए का दावा है कि शिवा वाल्मीकि, ऋतिक गंगवार और सुहैल मलिक ने छह कंप्यूटर माउस भेजे थे।जांच एजेंसी के अनुसार, यह गतिविधियां अलग-अलग घटनाओं का सिलसिला नहीं थीं, बल्कि देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाली कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा थीं।

21 आरोपी गिरफ्तार, पांच नाबालिग

एनआईए ने अदालत को बताया कि मामले में अब तक 21 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें पांच नाबालिग आरोपी भी शामिल हैं। इन पांचों के संबंध में एनआईए ने 18 मई को गाजियाबाद के किशोर न्याय बोर्ड में अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी।जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने प्रतिबंधित और अति संवेदनशील क्षेत्रों में कथित तौर पर अवैध प्रवेश किया, वहां निगरानी कैमरे लगाए और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़ी तस्वीरें एवं वीडियो जियो-टैगिंग के साथ दुश्मन देश में बैठे हैंडलरों तक पहुंचाए।

सिम कार्ड से कैमरे तक…साजिश की कड़ियां जोड़ रही एनआईए

एनआईए की जांच में सामने आई तस्वीर में कथित नेटवर्क की कई कड़ियां दिखाई देती हैं—भारतीय सिम कार्ड, व्हाट्सऐप ओटीपी, कूरियर के जरिए विदेश भेजे गए उपकरण, सोलर कैमरे, जीपीएस लोकेशन और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की वीडियो रिकॉर्डिंग।

अगर जांच एजेंसी के आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह मामला केवल अवैध निगरानी का नहीं, बल्कि देश की रणनीतिक और सैन्य सूचनाओं तक विदेशी हैंडलरों की पहुंच बनाने की गंभीर साजिश का रूप ले सकता है।

फिलहाल एनआईए ने 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है और अदालत में सुनवाई शुरू हो चुकी है।

आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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