बी के झा
NSK news Ind

नई दिल्ली, 25 सितंबर
मणिपुर में शांति की तलाश के बीच एक बार फिर गोलियों की आवाज ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर कामजोंग जिले में म्यांमार सीमा के पास चार नागरिकों की हत्या ने तनाव बढ़ा दिया है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार ने मणिपुर के अधिकांश हिस्से को अगले छह महीने के लिए फिर ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर दिया है।
यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे इससे पहले वापस नहीं लिया जाता।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 यानी AFSPA की धारा 3 के तहत यह फैसला लिया है। सरकार के अनुसार, राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति की आगे समीक्षा के बाद यह निर्णय किया गया है। इसके तहत पूरे मणिपुर को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है, लेकिन पांच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
13 थाना क्षेत्रों को रखा गया बाहर
छूट वाले क्षेत्रों में इंफाल पश्चिम के इंफाल,
लैम्फेल,
सिटी,
सिंगजामेई,
पैटसोई और वांगोई थाना क्षेत्र शामिल हैं।
इंफाल पूर्व में पोरोमपट,
हेइंगांग और इरीलबांग,
थौबल में थौबल,
बिष्णुपुर में बिष्णुपुर और नंबोल तथा काकचिंग में काकचिंग थाना क्षेत्र को इस घोषणा से बाहर रखा गया है।
यानी तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। राज्य का बड़ा हिस्सा AFSPA के दायरे में रहेगा, जबकि कुछ अपेक्षाकृत शहरी और चुनिंदा थाना क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।
नागालैंड और अरुणाचल में भी बढ़ा AFSPA
केंद्र ने मणिपुर के साथ नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी AFSPA की अवधि बढ़ाई है। नागालैंड में नौ जिलों—
दीमापुर,
न्यूलैंड,
चुमौकेदिमा,
मोन,
किफिरे,
नोकलाक,
फेक,
पेरेन और मेलुरी—को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है। इसके अलावा कोहिमा,
मोकोकचुंग,
लोंगलेंग,
वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को भी अधिसूचना में शामिल किया गया है।
अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ असम सीमा से लगे नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम थाना क्षेत्रों में भी AFSPA लागू रहेगा।
AFSPA के बीच फिर खून से लाल हुई सीमा
केंद्र के इस फैसले के बीच मणिपुर के कामजोंग जिले से आई हिंसा की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। म्यांमार सीमा के पास पिलोंग गांव में चार तांगखुल नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार घटना 24 सितंबर को हुई। मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं।घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में कार्रवाई शुरू की। स्थानीय नागा संगठन Tangkhul Naga Long ने घटना के विरोध में अपने प्रभाव क्षेत्र में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है।
संगठन ने हमले के लिए म्यांमार-आधारित KNA-B से जुड़े लोगों पर आरोप लगाया है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने चार नागरिकों की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि समाज में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
सवाल वही—शांति कब लौटेगी?
मणिपुर में AFSPA का फिर विस्तार केवल एक प्रशासनिक अधिसूचना नहीं, बल्कि राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जटिल स्थिति का संकेत भी है।
केंद्र ने जहां कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद सैन्य बलों के विशेष अधिकार जारी रखने का फैसला किया है, वहीं ताजा हत्याकांड बताता है कि सीमावर्ती इलाकों में हिंसा का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मणिपुर की सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ हिंसा रोकना नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और स्थायी शांति—तीनों को एक साथ जमीन पर उतारना है।
AFSPA की छह महीने की नई अवधि शुरू होने के साथ निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ राजनीतिक संवाद और सामान्य जनजीवन की बहाली किस गति से आगे बढ़ती है।
