इजरायल जाने वाली उड़ानों में पाकिस्तानी पायलटों पर पाबंदी! एयर फ्रांस के फैसले से विमानन जगत में हलचल—राष्ट्रीयता आधारित प्रतिबंधों पर भेदभाव की बहस तेज

बी के झा , एन एस के (NSK Delhi)

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तेल अवीव/नई दिल्ली, 15 अक्टूबर

इजरायल ने विमानन सुरक्षा के नाम पर विदेशी एयरलाइंस के क्रू सदस्यों की नागरिकता को लेकर नए प्रतिबंध लागू किए हैं। इनका असर अब अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों की कार्यप्रणाली पर दिखाई देने लगा है। फ्रांस की एयर फ्रांस ने इजरायल जाने वाली उड़ानों में पाकिस्तानी नागरिकता वाले पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक संबंधी नियमों का पालन करने की बात कही है। अमेरिकी कंपनी यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी क्रू-प्लानिंग में बदलाव किया है, जबकि चेक गणराज्य की स्मार्टविंग्स ने इजरायल के निर्देशों का पालन करने की पुष्टि की है।इस फैसले ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीयता के आधार पर प्रतिबंध और विमानन क्षेत्र में भेदभाव के सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल का तर्क सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, लेकिन आलोचकों का सवाल है कि क्या किसी कर्मचारी की नागरिकता मात्र के आधार पर उसे उड़ान ड्यूटी से बाहर करना उचित है

इजरायल का निर्देश क्या कहता है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि इजरायली हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली उड़ानों के पायलट और केबिन क्रू ऐसे देशों की नागरिकता नहीं रखते हों, जिनके इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। यह प्रतिबंध दोहरी नागरिकता रखने वाले कर्मचारियों पर भी लागू हो सकता है।रिपोर्टों में पाकिस्तान, ईरान, ओमान, सऊदी अरब, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, इराक और लेबनान सहित कई देशों का उल्लेख है। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रभावित देशों की संख्या 29 से 31 के बीच बताई गई है। इसलिए सटीक सूची और प्रतिबंध के दायरे की पुष्टि संबंधित आधिकारिक निर्देश से किया जाना जरूरी है।इस नियम का अर्थ यह नहीं है कि इन देशों के सभी नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर दुनिया भर में प्रतिबंध लगा दिया गया है। मामला विशेष रूप से इजरायल जाने वाली या उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली उड़ानों में क्रू की तैनाती से जुड़ा है।

फ्लाईदुबई विमान की घटना के बाद बढ़ी सख्ती

इन प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई गंभीर घटना को प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के अनुसार, ओमानी सह-पायलट पर भारतीय कमांडर पर आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला करने और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश का आरोप है।घटना के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से कम हुई। चालक दल और यात्रियों के हस्तक्षेप के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना की जांच के बीच विमानन सुरक्षा और क्रू की पृष्ठभूमि की जांच पर गंभीर सवाल उठे।हालांकि, इस घटना में आरोपी की कथित कार्रवाई और उसके बाद सभी प्रभावित देशों के क्रू पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी एक व्यक्ति पर लगे आरोप अपने आप किसी देश के सभी नागरिकों के लिए जोखिम का प्रमाण नहीं होते।

इथियोपियन एयरलाइंस की उड़ान को लौटना पड़ा

नए नियमों का असर इथियोपियन एयरलाइंस की एक उड़ान पर भी पड़ने की खबर है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदीस अबाबा से तेल अवीव जा रही उड़ान को वापस लौटना पड़ा, क्योंकि उसके क्रू में इंडोनेशियाई नागरिकता वाला पायलट शामिल था।रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल और इंडोनेशिया के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के कारण पायलट की तैनाती नए निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। पायलट बदलने के बाद विमान ने दोबारा उड़ान भरी। कंपनी ने इस घटनाक्रम को गलती बताया और कहा कि उसे संबंधित प्रतिबंध की जानकारी नहीं थी।यह घटना दिखाती है कि राष्ट्रीयता संबंधी नियमों का असर केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहता। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अब उड़ान से पहले क्रू की नागरिकता और पात्रता की जांच भी अपने परिचालन का हिस्सा बनानी पड़ सकती है।

एयर फ्रांस ने कर्मचारियों से मांगी दूसरी नागरिकता की जानकारी

फ्रांसीसी खोजी मीडिया संस्थान मीडियापार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एयर फ्रांस ने अपने पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल के नए निर्देशों की जानकारी दी तथा प्रभावित कर्मचारियों की पहचान करने के लिए दूसरी नागरिकता से संबंधित विवरण मांगे।

एयर फ्रांस ने कहा है कि वह उन देशों के प्रवेश नियमों का पालन करती है, जहां उसकी उड़ानें जाती हैं। कंपनी के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों को नए नियमों के बारे में सूचित किया गया है।हालांकि, राष्ट्रीयता संबंधी जानकारी जुटाने और उसके आधार पर कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने के तरीके पर सवाल उठे हैं। पायलटों के एक यूनियन ने इसे भेदभाव से जुड़ा मुद्दा बताया है।

चिंता यह है कि यदि किसी कर्मचारी के पास फ्रांस जैसे देश की नागरिकता के साथ पाकिस्तान या किसी अन्य सूचीबद्ध देश की दोहरी नागरिकता है, तो उसे भी प्रभावित होना पड़ सकता है।

यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स ने भी बदली रणनीति

रिपोर्टों के मुताबिक, यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपनी क्रू-योजना में संबंधित प्रतिबंधों को शामिल किया है, ताकि नियमों के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को इजरायल जाने या वहां से आने वाली उड़ानों में तैनात न किया जाए।चेक गणराज्य की स्मार्टविंग्स ने भी कहा है कि वह इजरायल के नियमों का पालन करेगी। कंपनी के अनुसार, इन निर्देशों का उसके क्रू की तैनाती पर अब तक कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।

एयरलाइंस के सामने अब सुरक्षा नियमों का पालन करने के साथ-साथ कर्मचारियों के अधिकारों, परिचालन की निरंतरता और अलग-अलग देशों के कानूनों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

क्या नागरिकता के आधार पर प्रतिबंध उचित है?

विमानन कानून के विशेषज्ञों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि किसी देश को अपने हवाई क्षेत्र और प्रवेश संबंधी नियम निर्धारित करने का अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन पर लागू शिकागो कन्वेंशन भी राज्यों की हवाई क्षेत्र पर संप्रभुता को मान्यता देता है। लेकिन किसी नियम का लागू होना और उसका भेदभाव-विरोधी कानूनों के अनुरूप होना अलग-अलग प्रश्न हैं।

इस मामले में सुरक्षा संबंधी चिंता को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर जब विमान के भीतर ही सह-पायलट पर हमले और विमान को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हों। लेकिन दूसरी ओर, सुरक्षा जांच में व्यक्तिगत जोखिम, प्रशिक्षण, पृष्ठभूमि और विश्वसनीय खुफिया जानकारी का महत्व भी बना रहता है।

राष्ट्रीयता के आधार पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से निर्दोष कर्मचारियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि इस नीति पर सुरक्षा और भेदभाव—दोनों दृष्टिकोणों से चर्चा हो रही है।

निष्कर्ष:

सुरक्षा की जरूरत या राष्ट्रीयता आधारित भेदभाव?

इजरायल के नए निर्देशों ने अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को अपने क्रू की तैनाती के नियम बदलने के लिए मजबूर किया है। एयर फ्रांस, यूनाइटेड एयरलाइंस और स्मार्टविंग्स की प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि किसी देश के सुरक्षा निर्देश का असर उसकी सीमाओं से बाहर भी पड़ सकता है।

लेकिन इस पूरे मामले में एक बुनियादी सवाल बना हुआ है—क्या विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीयता आधारित व्यापक पाबंदियां जरूरी हैं, या अधिक लक्षित और व्यक्तिगत सुरक्षा जांच से भी वही उद्देश्य हासिल किया जा सकता है?

सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर उठाए गए हर कदम की निष्पक्षता और आवश्यकता की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इजरायल अपने निर्देशों के दायरे को किस तरह लागू करता है और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस तथा कर्मचारी संगठन इस नीति पर क्या रुख अपनाते हैं।

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