बी के झा
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नई दिल्ली, 28 सितंबर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश की राजनीति में जारी घमासान के बीच उनके नाम से वायरल एक कथित इस्तीफा पत्र ने नई सनसनी पैदा कर दी।
सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित इस पत्र में दावा किया गया कि ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है।लेकिन कुछ ही समय बाद इस दावे की हवा निकल गई। चुनाव आयोग ने वायरल पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया है।
आयोग के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि ज्ञानेश कुमार ने ऐसा कोई इस्तीफा नहीं दिया है। आयोग ने वायरल दस्तावेज को AI-generated और मनगढ़ंत बताया तथा लोगों से इस तरह की सामग्री पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
इस्तीफे की भाषा असली जैसी, लेकिन पत्र निकला फर्जी
वायरल पत्र में बेहद औपचारिक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इसमें कथित तौर पर लिखा गया था कि “आत्मचिंतन और विचार” के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया गया है। पत्र में भारत सरकार और देश के नागरिकों के प्रति आभार जताते हुए निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना सम्मान की बात बताया गया था।यही वजह रही कि पत्र ने सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींचा।
लेकिन चुनाव आयोग की सफाई के बाद स्पष्ट हो गया कि वायरल दस्तावेज को आधिकारिक इस्तीफा मानना गलत होगा।
SIR विवाद के बीच क्यों गरमाया मामला?
ज्ञानेश कुमार के नाम से फर्जी इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब निर्वाचन आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज है।इंडियन एक्सप्रेस की 23-25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में मतदाता जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और कुछ प्रक्रियात्मक फैसलों को लेकर उनके सवालों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इन रिपोर्टों के बाद निर्वाचन आयोग ने किसी आंतरिक टकराव की धारणा से इनकार किया है। आयोग का कहना रहा है कि महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और वैचारिक या प्रक्रियागत मतभेदों को संस्थागत टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दो आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा राजनीतिक दबाव
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए और उनके इस्तीफे की मांग उठाई। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए।इस बीच सुप्रीम कोर्ट में भी SIR से जुड़े कुछ पहलुओं पर सुनवाई चल रही है।
दिल्ली में SIR के दौरान जारी कुछ “logical discrepancy” नोटिसों के आधार पर अदालत ने निर्वाचन आयोग से प्रक्रिया और उसके आधार को स्पष्ट करने को कहा है।यानी एक तरफ आयोग के कामकाज पर राजनीतिक बहस तेज है, दूसरी तरफ न्यायिक स्तर पर भी SIR से जुड़े कुछ मुद्दों की पड़ताल हो रही है। ऐसे माहौल में CEC के नाम से इस्तीफे का फर्जी पत्र सामने आना अपने आप में सूचना की विश्वसनीयता को लेकर एक नया सवाल खड़ा करता है।
CJP ने भी उठाई इस्तीफे की मांग
विपक्षी दलों के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन ने SIR को रोकने और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की समीक्षा जैसी मांगें भी उठाई हैं।हालांकि, CJP या किसी अन्य राजनीतिक संगठन की ओर से की गई मांग और ज्ञानेश कुमार का वास्तव में इस्तीफा देना—दो अलग-अलग बातें हैं।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया है।
असली सवाल: फर्जी पत्र वायरल किसने किया?
इस पूरे प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे या नहीं। सवाल यह भी है कि CEC के नाम से तैयार यह फर्जी पत्र किसने बनाया, किस उद्देश्य से वायरल किया और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह फैलाया गया?
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में किसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख के नाम से तैयार किया गया कथित आधिकारिक दस्तावेज महज सोशल मीडिया पोस्ट नहीं रह जाता। ऐसी सामग्री लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकती है और चुनाव जैसी संवेदनशील संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर अविश्वास बढ़ा सकती है।
इसलिए इस मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है—वायरल इस्तीफा पत्र को चुनाव आयोग ने फर्जी बताया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
एन एस के फैक्ट अलर्ट:
वायरल पत्र को आधिकारिक इस्तीफा मानकर साझा न करें।
किसी संवैधानिक पदाधिकारी के इस्तीफे की पुष्टि के लिए आधिकारिक स्रोत या विश्वसनीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
