BRICS Summit 2026: तनावों के बीच, मोदी-पुतिन की गर्मजोशी से लेकर गुटेरेस और विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत तक—BRICS के दूसरे दिन भारत की कूटनीतिक सक्रियता पर दुनिया की नजर

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 13 सितंबर

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और शक्ति-संतुलन की बदलती तस्वीर के बीच नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 का दूसरा दिन भी कूटनीतिक गतिविधियों से भरपूर रहा।

भारत मंडपम में दुनिया के प्रमुख नेताओं और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधियों का जुटना इस बात का संकेत है कि BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में संवाद और सामूहिक आवाज का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

BRICS के 18वें शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली। विभिन्न मतभेदों और वैश्विक संघर्षों के बीच सदस्य देशों के बीच सहमति बनाते हुए नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष ध्यान आकर्षित किया।

अब सम्मेलन के दूसरे दिन भारत की कूटनीतिक सक्रियता और व्यापक हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम पहुंच रहे विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं का स्वयं स्वागत किया। दूसरे दिन के कार्यक्रम में BRICS आउटरीच के तहत मेहमान देशों के साथ संवाद भी अहम रहा। इसका व्यापक उद्देश्य ग्लोबल साउथ की आवाज को अधिक प्रभावी बनाना और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी को मजबूत करना है।

भारत मंडपम में नेताओं का स्वागत

दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं का स्वागत किया। सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पहुंचे। इसके बाद वियतनाम, युगांडा, मलेशिया, नाइजीरिया, कजाखस्तान, मिस्र, फिलीपींस और बुरुंडी समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।इन मुलाकातों और स्वागत समारोहों के पीछे केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भारत की उस व्यापक रणनीति की झलक भी दिखाई दी जिसमें वैश्विक दक्षिण के देशों को एक साझा मंच पर लाने और उनकी प्राथमिकताओं को वैश्विक विमर्श के केंद्र में रखने पर जोर है।

मोदी-पुतिन की गर्मजोशी ने खींचा ध्यान

दूसरे दिन भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी गर्मजोशी देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन का स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता साथ चलते और आपस में बातचीत करते हुए नजर आए।भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को देखते हुए दोनों नेताओं की यह सहजता और गर्मजोशी सम्मेलन के कूटनीतिक माहौल में विशेष चर्चा का विषय बनी।

सऊदी और युगांडा के प्रतिनिधि भी पहुंचे

BRICS सम्मेलन के दूसरे दिन सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो भी भारत मंडपम पहुंचीं। इनके अलावा कई अन्य देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने सम्मेलन के दायरे को और व्यापक बनाया।

BRICS से आगे बढ़ता भारत का संदेश

नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब विश्व व्यवस्था कई स्तरों पर परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। युद्ध, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी बदलाव और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में हैं।ऐसे दौर में भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही दिखाई देता है कि मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।

पहले दिन घोषणा पत्र पर बनी सर्वसम्मति और दूसरे दिन ग्लोबल साउथ के देशों के साथ बढ़ता संवाद भारत की उस कूटनीतिक सोच को रेखांकित करता है, जिसमें टकराव की राजनीति के बीच सहयोग, संवाद और समान भागीदारी को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

NSK विश्लेषण:

नई दिल्ली का BRICS सम्मेलन केवल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नहीं है। यह उस बदलती दुनिया की तस्वीर भी पेश कर रहा है, जहां विकासशील देश वैश्विक फैसलों में अपनी हिस्सेदारी और आवाज दोनों को अधिक मजबूती से दर्ज कराना चाहते हैं।

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