नीतीश ने बुलाई JDU के सांसदों-विधायकों की बैठक, अमित शाह के 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद बढ़ी हलचल; श्याम रजक के विरोध से लेकर तेजस्वी के ‘अब पछताए होत क्या’ तंज तक, NDA के भीतर बढ़ा दबाव

बी के झा

NSK news Ind

पटना, 16 सितंबर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 से पहले देश के 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC लागू करने के ऐलान के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच जेडीयू ने पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में UCC के अलावा फरक्का जल संधि समेत बिहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

लेकिन इस बैठक को केवल संगठनात्मक कवायद के तौर पर देखना मुश्किल है। असली सवाल यह है कि भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में शामिल जेडीयू UCC के मुद्दे पर आखिर अपनी राजनीतिक लाइन क्या तय करती है?

एक तरफ भाजपा देशभर में UCC को लेकर स्पष्ट समयसीमा का संकेत दे चुकी है, वहीं दूसरी तरफ जेडीयू के भीतर इस मुद्दे पर पूरी तरह एकरूपता नजर नहीं आ रही। यही वजह है कि नीतीश कुमार की बैठक पर बिहार की राजनीति की निगाहें टिक गई हैं।

अमित शाह के बयान के बाद बढ़ा दबाव

मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इसके बाद भाजपा शासित राज्यों में इस मुद्दे को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है, जबकि कई अन्य राज्यों में इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में भी UCC को लेकर सरकार की तैयारियों और राजनीतिक बयानबाजी ने बहस को तेज कर दिया है। ऐसे में बिहार की स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां भाजपा के साथ सत्ता में शामिल जेडीयू का रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

JDU में UCC पर दो अलग-अलग सुर

जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने संकेत दिया है कि पार्टी UCC के अंतिम स्वरूप और प्रावधानों को देखने के बाद ही अपना रुख तय करेगी। यानी जेडीयू फिलहाल न तो सीधे समर्थन की घोषणा कर रही है और न ही विरोध का अंतिम फैसला।दूसरी ओर जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने बिहार में UCC लागू किए जाने का खुलकर विरोध किया है। इससे पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद की चर्चा तेज हुई है।

यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार पार्टी के भीतर एक साझा लाइन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं?

तेजस्वी का हमला—‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’इसी सियासी माहौल के बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार और जेडीयू नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।

तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा—“अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।”तेजस्वी ने इसके साथ जेडीयू के भीतर नेतृत्व और भाजपा के प्रभाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “जब खुद के घर में विभीषण बैठे हों तो बाहरी का सत्ता का सिक्का बोलने लगता है।”तेजस्वी का आरोप था कि जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने नीतीश कुमार और जेडीयू को अमित शाह के पास गिरवी रख दिया है।

हालांकि, यह तेजस्वी यादव का राजनीतिक आरोप है और संबंधित नेताओं की ओर से इस आरोप को स्वीकार करने का कोई आधार इसमें प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

तेजस्वी के इस हमले का राजनीतिक निशाना साफ तौर पर जेडीयू की मौजूदा स्थिति और भाजपा के साथ उसके गठबंधन को लेकर है। खास बात यह है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जेडीयू के भीतर अलग-अलग आवाजें सुनाई देने के बीच विपक्ष को हमला करने का एक नया मुद्दा मिल गया है।

प्रशांत किशोर ने भी साधा निशाना

जनसुराज के संस्थापक और बांकीपुर के नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने भी इसी बहस के बीच जेडीयू के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जेडीयू को दिल्ली में बैठे अमित शाह चला रहे हैं और दावा किया कि बहुत जल्द जेडीयू इतिहास बनकर रह जाएगी।

हालांकि प्रशांत किशोर का यह भी राजनीतिक दावा है, जिसे तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता। लेकिन उनके बयान और तेजस्वी यादव के हमले से यह जरूर स्पष्ट है कि विपक्ष ने UCC के बहाने जेडीयू और भाजपा के रिश्ते को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

नीतीश के सामने दोहरी चुनौती

नीतीश कुमार के सामने चुनौती सिर्फ भाजपा के साथ गठबंधन की नहीं है। जेडीयू को बिहार के अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को भी ध्यान में रखना होगा।यदि UCC पर पार्टी भाजपा के प्रस्ताव के साथ जाती है तो विपक्ष उसे भाजपा के दबाव में आने के आरोपों के साथ घेर सकता है। दूसरी ओर, यदि जेडीयू खुलकर विरोध करती है तो NDA के भीतर मतभेद का सवाल उठेगा।इसी बीच विजय चौधरी का रुख यह संकेत देता है कि जेडीयू अभी अंतिम निर्णय से पहले कानून के वास्तविक प्रारूप को देखना चाहती है।

संजय झा की अमित शाह से मुलाकात क्यों अहम?

UCC के मुद्दे पर जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी की ओर से संकेत दिया गया है कि UCC से जुड़ी आशंकाओं और प्रावधानों पर बातचीत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।यानी जेडीयू फिलहाल ‘पहले ड्राफ्ट, फिर फैसला’ की रणनीति पर चलती दिखाई दे रही है।यहीं से तेजस्वी यादव का “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत” वाला तंज राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण हो जाता है।

आरजेडी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि जेडीयू के भीतर जिस राजनीतिक स्वतंत्रता की बात होती थी, वह अब भाजपा के साथ गठबंधन के दबाव में कमजोर पड़ रही है।

18 सितंबर की बैठक में क्या निकलेगा रास्ता?

नीतीश कुमार की बैठक इसलिए अहम है क्योंकि इसमें पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को एक साथ बुलाया गया है। UCC पर चर्चा के दौरान पार्टी के अलग-अलग नेताओं की राय सामने आ सकती है।

बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि जेडीयू—- UCC के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद समर्थन की ओर बढ़ती है;-

बिहार की परिस्थितियों को देखते हुए कुछ शर्तों या संशोधनों की मांग करती है;- या फिलहाल अंतिम ड्राफ्ट आने तक अपना रुख सुरक्षित रखती है।

NSK विश्लेषण:

असली लड़ाई UCC से आगे की है

बिहार में UCC की बहस अब सिर्फ एक कानून की बहस नहीं रह गई है। इसके साथ NDA के भीतर शक्ति-संतुलन, जेडीयू की राजनीतिक स्वतंत्रता और नीतीश कुमार के नेतृत्व का सवाल भी जुड़ गया है।

भाजपा के लिए UCC एक राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडा है, जबकि जेडीयू के लिए बिहार की सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह बेहद संवेदनशील विषय है। ऐसे में नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे गठबंधन की राजनीति और अपनी पार्टी की अलग राजनीतिक जमीन के बीच संतुलन कैसे साधते हैं।

तेजस्वी यादव का हमला इसी कमजोर बिंदु को पकड़ने की कोशिश है। “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत” कहकर उन्होंने सिर्फ UCC पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि जेडीयू के भाजपा के साथ मौजूदा रिश्ते पर भी राजनीतिक बहस को केंद्रित कर दिया है।

अब सबकी नजर नीतीश कुमार की बैठक पर है। क्योंकि इस बैठक से यह संकेत मिल सकता है कि UCC के मुद्दे पर जेडीयू भाजपा के साथ कदम मिलाकर चलेगी, अपनी शर्तें रखेगी या बिहार के लिए अलग राजनीतिक रास्ता तलाशेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *