ISI से खतरे के इनपुट के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा और कड़ी, सियासत से सुरक्षा तंत्र तक हलचल

बी के झा

NSK news Ind

भोपाल/दिल्ली , 13 दिसंबर

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से संभावित खतरे के इनपुट के बाद केंद्र सरकार ने शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा को और मजबूत करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) को भी अलर्ट पर रखा गया है।

भोपाल से दिल्ली तक बढ़ी चौकसी

खुफिया इनपुट मिलने के बाद शुक्रवार देर रात भोपाल के 74 बंगला क्षेत्र में स्थित शिवराज सिंह चौहान के सरकारी आवास और दिल्ली स्थित उनके सरकारी बंगले पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया। अतिरिक्त बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को कुछ ऐसे संकेत मिले थे, जिनके बाद किसी भी तरह की ढिलाई बरतने का जोखिम नहीं लिया गया।पहले से Z+ सुरक्षा, फिर भी सख्ती गौरतलब है कि शिवराज सिंह चौहान पहले से ही Z+ श्रेणी की सुरक्षा के दायरे में हैं, जो देश की सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा मानी जाती है। इस श्रेणी में 10 से अधिक NSG कमांडो सहित करीब 55 प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। बावजूद इसके, नए इनपुट के बाद उनकी सुरक्षा में अतिरिक्त जवानों की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है।

राजनीतिक हलकों में अटकलें,

लेकिन एजेंसियों का फोकस सुरक्षा पर भोपाल में शिवराज के समर्थकों के बीच इस सुरक्षा बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक अटकलें भी लगाई जा रही हैं। कुछ लोग इसे दिल्ली में संभावित बड़े राजनीतिक फेरबदल और शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती राष्ट्रीय भूमिका से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर साफ किया गया है कि सुरक्षा बढ़ाने का फैसला पूरी तरह खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर है, न कि किसी राजनीतिक घटनाक्रम के कारण।

राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शिवराज सिंह चौहान न केवल मध्य प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक प्रभावशाली चेहरा हैं। विश्लेषक प्रो. राजीव शुक्ला कहते हैं, “जब कोई नेता राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होता है और उसकी नीतियां सीमा पार ताकतों को असहज करती हैं, तो ऐसे खतरे असामान्य नहीं होते। यह मामला राजनीति से ज्यादा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।”

हिन्दू संगठनों और धर्म गुरुओं का रुख कई हिन्दू संगठनों ने इस इनपुट को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से और कड़े कदम उठाने की मांग की है। विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े एक पदाधिकारी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान एक ऐसे नेता हैं, जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जनकल्याण की राजनीति का प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका स्वाभाविक है।

वहीं एक वरिष्ठ हिन्दू धर्म गुरु ने कहा, “देश के सेवाभावी और राष्ट्रहित में काम करने वाले नेताओं की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता का प्रश्न है।”

रक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि आईएसआई का किसी भारतीय नेता में ‘इंटरेस्ट’ दिखाना साधारण बात नहीं होती।

रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) आर.एस. मेहता के अनुसार, “ऐसे इनपुट मिलने का मतलब है कि एजेंसियों को कुछ ठोस संकेत मिले हैं। इस तरह की चेतावनियों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, इसलिए सुरक्षा बढ़ाना पूरी तरह उचित कदम है।

”कानूनविदों की राय

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह और संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और केंद्रीय मंत्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। वरिष्ठ कानूनविद अमरेश यादव ने कहा, “यह कदम न केवल प्रशासनिक रूप से सही है, बल्कि संविधान के तहत राज्य की उस जिम्मेदारी का भी निर्वहन है, जिसमें वह अपने नागरिकों और प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

”निष्कर्ष

कुल मिलाकर, शिवराज सिंह चौहान की सुरक्षा बढ़ाया जाना एक गंभीर और संवेदनशील कदम है, जो बताता है कि देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। यह मामला केवल एक नेता की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की नजरें और ज्यादा चौकस रहेंगी, ताकि किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।

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