नेपाल में मौत का सैलाब थमा नहीं, अब दूसरी तबाही का साया! चीन-नेपाल ने जारी किया अलर्ट, पहाड़ों में बनी झीलें बनीं बारूद का ढेर; मृतकों का आंकड़ा 469, 30 से ज्यादा देशों के लोग अब भी लापता

बी के झा

NSK news Ind

काठमांडू/बीजिंग / न ई दिल्ली, 28 अगस्त

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने तबाही की ऐसी तस्वीर छोड़ी है, जिसके निशान आने वाले लंबे समय तक मिटने वाले नहीं हैं। घर उजड़ चुके हैं, पुल बह चुके हैं, सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं और सैकड़ों परिवार अपनों की तलाश में हैं। लेकिन इस त्रासदी का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। हिमालय में एक नई आशंका ने राहत और बचाव अभियान में जुटी एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।नेपाल और चीन ने हिमालयी क्षेत्र में अगले कुछ दिनों के दौरान फिर अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की है। सीमा क्षेत्र में भारी मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है और दो झीलनुमा जलाशय बन गए हैं। इनके जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि इनमें से कोई झील अचानक टूटती है तो नीचे की ओर बसे इलाकों में फिर भारी तबाही मच सकती है।

469 मौतें… और खतरा अभी बाकी

नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के मुताबिक प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 469 तक पहुंच गई है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल मलबे, बाढ़ के पानी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ बचावकर्मी पहले से हुई तबाही के मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें एक और संभावित जलप्रलय का सामना करना पड़ सकता है।नेपाल की अथॉरिटी ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव अभियान में शामिल कर्मियों को नदी के किनारों तथा जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

पहाड़ों में बनी झीलें बनीं सबसे बड़ा खतरा

काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के जलवायु एवं पर्यावरण जोखिम विभाग के प्रमुख और जलवायु विशेषज्ञ कियांगगोंग झांग ने चेताया है कि नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में मलबे से बनी रुकावट अभी भी मौजूद है।उनके मुताबिक यही रुकावट पानी के बहाव को रोक रही है और इसके चलते अचानक दूसरी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

विशेषज्ञ का कहना है कि हालात बिगड़े तो यह दूसरी बाढ़ कभी भी आ सकती है।यानी नेपाल अभी पहली आपदा से उबर भी नहीं पाया है और उसके सिर पर दूसरी प्राकृतिक आफत का खतरा मंडरा रहा है।

30 से ज्यादा देशों के लोग लापता

इस आपदा ने सिर्फ नेपाल को नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों को झकझोर दिया है। नेपाल और तिब्बत में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की पुष्टि हुई है। इनमें पर्यटक, ट्रेकर्स, तीर्थयात्री और विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले लोग शामिल हैं।

नेपाल,

नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों के साथ 517 विदेशी नागरिकों समेत 910 लोग लापता बताए गए हैं। अब तक 50 विदेशियों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला जा चुका है।लापता लोगों में पर्यटकों के अलावा सेना और पुलिस के जवान भी शामिल हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं।

चीन,

चीन के तिब्बत क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में भी भारी तबाही हुई है। सरकारी मीडिया के अनुसार वहां कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 558 लोग लापता बताए गए हैं। इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल की ओर भी करीब 100 चीनी नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है।

भारत,

भारत के लिए भी यह त्रासदी बेहद चिंताजनक है। विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें एक पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 लोग भी शामिल हैं।नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक भी मौजूद थे। इनमें कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

अमेरिका,

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक नेपाल और चीन में 90 अमेरिकी नागरिकों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया है।दुनिया के कई देशों के नागरिक फंसे

नेपाल पर्यटन बोर्ड और संबंधित देशों से मिली जानकारी के मुताबिक लापता लोगों में—-

मलेशिया: 51-

यूक्रेन: 55-

ऑस्ट्रेलिया: 39-

ब्रिटेन: 33-

कनाडा: 25-

दक्षिण कोरिया: 9-

सिंगापुर: 8-

जर्मनी: 8-

रूस: 8-

दक्षिण अफ्रीका: 6-

लातविया: 6-

जापान: 5-

न्यूजीलैंड: 5-

फ्रांस: 4-

बेल्जियम: 3-

स्पेन: 3

इसके अलावा इटली, कजाकिस्तान, पुर्तगाल, आयरलैंड और नीदरलैंड के दो-दो नागरिक लापता बताए गए हैं।बेलारूस, फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, बुल्गारिया, स्विट्जरलैंड, सर्बिया और स्वीडन के एक-एक नागरिक के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

एक आपदा, जिसने हिमालय की असली ताकत दिखा दी

नेपाल की यह त्रासदी सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं है। यह हिमालयी क्षेत्र की बढ़ती संवेदनशीलता की भी चेतावनी है। पहाड़ों में भूस्खलन, ग्लेशियरों का टूटना और मलबे से नदियों का रास्ता रुकना बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।सबसे खतरनाक स्थिति तब बनती है जब प्राकृतिक रूप से बनी झीलों के पीछे पानी जमा होता रहता है।

यदि किसी बिंदु पर यह दबाव बांध जैसी बनी रुकावट को तोड़ देता है, तो कुछ ही मिनटों में नीचे के इलाकों की ओर पानी और मलबे का विशाल प्रवाह दौड़ सकता है।

नेपाल में इस समय यही डर सबसे बड़ा है, राहत अभियान के बीच सबसे बड़ा सवाल

अभी बचावकर्मी पहली बाढ़ में बिछड़े लोगों को खोज रहे हैं। परिवार अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल घायलों से भरे हैं और प्रशासन मलबे में तब्दील हो चुके इलाकों को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।लेकिन पहाड़ों में जमा पानी और मलबे ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—

क्या नेपाल पहली तबाही से निकलने से पहले ही दूसरी तबाही की चपेट में आने वाला है?

अगले कुछ दिन नेपाल के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। नदियों के जलस्तर, पहाड़ी झीलों और मलबे से बनी प्राकृतिक रुकावटों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है—नदी किनारे और जोखिम वाले पहाड़ी इलाकों से दूरी बनाए रखें।

क्योंकि पहली बाढ़ का पानी उतर सकता है, लेकिन हिमालय का खतरा अभी पूरी तरह नहीं टला है।

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