बी के झा
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 18 अगस्त
पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया सामरिक समीकरण उभरता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खुलकर सराहना किए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने उन्हें धन्यवाद देते हुए भारत-पाकिस्तान तनाव और क्षेत्रीय शांति का मुद्दा फिर उठाया। शहबाज़ ने दावा किया कि ट्रंप के नेतृत्व ने दक्षिण एशिया में संभावित परमाणु टकराव को टालने में भूमिका निभाई, जबकि भारत पहले भी ऐसे दावों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर चुका है।
मक्का रक्षा समझौता: क्या है इसकी रणनीतिक अहमियत?
7 अगस्त को हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया समन्वय और सामरिक साझेदारी को मजबूत करना बताया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ हिस्सों ने इसकी तुलना NATO के सामूहिक रक्षा सिद्धांत से की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी इसे औपचारिक सैन्य गठबंधन कहना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि इसकी संस्थागत संरचना और कानूनी दायित्व पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हैं।
ट्रंप के बयान ने क्यों बढ़ाई चर्चा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मंच Truth Social पर इस समझौते को “एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला कदम” बताया। उन्होंने कहा कि इससे मध्य पूर्व के सहयोगी देश अपनी सुरक्षा अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित कर सकेंगे और क्षेत्रीय स्थिरता को बल मिलेगा।
शहबाज़ ने फिर भारत का क्यों किया ज़िक्र?
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद शहबाज़ शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान अपने सहयोगियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा में सकारात्मक भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने साथ ही ट्रंप की “निर्णायक नेतृत्व क्षमता” की प्रशंसा करते हुए भारत-पाकिस्तान के पिछले तनाव का हवाला दिया और शांति को दक्षिण एशिया की समृद्धि की सबसे बड़ी शर्त बताया।हालांकि भारत की आधिकारिक नीति लगातार यही रही है कि भारत-पाकिस्तान के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी।
भारत सरकार का स्पष्ट रुख
नई दिल्ली ने वर्षों से यह दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर सहित सभी द्विपक्षीय विषय केवल भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का विषय हैं। विदेश नीति के जानकारों के अनुसार भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम है और किसी बाहरी शक्ति की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या पाकिस्तान बदल रहा है अपनी कूटनीतिक रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज़ का बयान केवल ट्रंप का आभार नहीं, बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब और तुर्की के साथ अपने सामरिक रिश्तों को अधिक मजबूत दिखाने का प्रयास भी है। पाकिस्तान स्वयं को इस्लामी दुनिया के एक प्रमुख सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है, जबकि भारत इंडो-पैसिफिक और बहुपक्षीय रणनीतिक साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।
रक्षा विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह समझौता भविष्य में संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उत्पादन और खुफिया साझेदारी तक विस्तारित होता है, तो इसका प्रभाव अरब सागर, हिंद महासागर और पश्चिम एशिया की सामरिक राजनीति पर पड़ सकता है। फिर भी भारत की सैन्य क्षमता और सुरक्षा नीति किसी एक गठबंधन पर निर्भर नहीं, बल्कि बहुआयामी वैश्विक साझेदारियों पर आधारित है।
शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विदेश नीति के अध्येताओं का कहना है कि आधुनिक रक्षा समझौते केवल हथियारों तक सीमित नहीं होते; इनमें तकनीक, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित भी शामिल होते हैं। इसलिए मक्का समझौते का वास्तविक प्रभाव उसके क्रियान्वयन और सदस्य देशों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता से तय होगा।
वरिष्ठ राजनयिकों का आकलन
पूर्व भारतीय राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप और शहबाज़ के बयान राजनीतिक संकेत अवश्य देते हैं, लेकिन किसी भी अंतरराष्ट्रीय रक्षा समझौते की सफलता उसके संस्थागत ढांचे, साझा सैन्य कमान और व्यवहारिक सहयोग पर निर्भर करती है। इसलिए आने वाले महीनों में इस समझौते की वास्तविक दिशा अधिक स्पष्ट होगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
भारतीय विपक्ष ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों और पश्चिम एशिया में उभरते नए रक्षा गठबंधनों पर संसद को समय-समय पर विश्वास में लिया जाए। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न पर राजनीतिक एकजुटता सर्वोपरि होनी चाहिए।
निष्कर्ष
मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट ने पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप की सराहना और शहबाज़ शरीफ की प्रतिक्रिया ने इसे और राजनीतिक आयाम दिया है,
लेकिन भारत का रुख अब भी स्पष्ट और स्थिर है—राष्ट्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय मुद्दों पर निर्णय भारत अपनी संप्रभु नीति के अनुसार ही करेगा।
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